वरिष्ठ कवि और लेखक।अद्यतन कविता संग्रह इस दुनिया को सुंदर बनाने में लगा हूँ

दर्द

मैं जब दौड़ रहा था दर्द में मेरा पैर
मुझे सभ्य भाषा में गाली दे रहा था
मुझे कतई बर्दाश्त नहीं था कि
मेरा पैर मेरी अवहेलना करे
मैं कुछ इसलिए नहीं कर सकता था
क्योंकि दिमाग में
दौड़ जीतने की आकांक्षा
उतनी ही बलवती हो रही थी
जितना दर्द का वजन था

मेरे सिर में जितने बाल हैं उससे अधिक कदम
मैं दौड़ना चाहता था ताकि खुद को हरा सकूँ
मैं अपने दर्द को जीतने की कोशिश में
रगों में जितना खून दौड़ रहा था
उसमें नहाना चाहता था
कि पसीने की बदबू कम हो सके
और ऐसा नहीं हो पा रहा था
क्योंकि खून से पसीने की बदबू आने लगी थी
लगा कि मुझे इस विषय पर भी
विचार करना चाहिए
कि दर्द जो असह्य हो रहा था उसका रंग कैसा है

मैं मन ही मन चाहता था
कि उसका रंग उस जैसा तो बिलकुल न हो
जिसे मैं बहुत प्यार करता हूँ
या ऐसा भी न हो कि चंद्रमा
मुझे नीले रंग का दिखाई पड़ने लगे
ठीक वैसा
जैसा दर्द की नसें उभरने पर दिखाई देती हैं
हालांकि उसमें खून लाल ही दौड़ता है

मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था
कि मैं क्या करूं

धीरे-धीरे एक समय ऐसा भी आया
कि मेरा दर्द
पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाने लगा था
और पैर उसके पीछे दौड़ रहा था
कि किसी तरह वहां तक उसके भीतर धंस सके
जहाँ तक कम से कम सभ्य भाषा में
उसे गाली न देना पड़े
कि दर्द में केवल पैर ही नहीं
पूरा शरीर कविता लगने लगे
और उसका दुखना अच्छा लगने लगे।

असंभव

मेरे पास जितना दुख है
किसी ईश्वर के दुख से उसकी तुलना
असंभव है
यही बात सुख के बारे में कहते हुए
मैं चकित हूँ कि मेरी जुबान
लड़खड़ा नहीं रही है
मेरी कतई इच्छा नहीं है
कि मैं किसी को शर्मिंदा करूं
भले वह ईश्वर ही
क्यों न हो।

बदलाव

बहुत कुछ घटित हो रहा है
जैसे गधों के रेंकने से
वातावरण का बहरापन बढ़ रहा है
चूल्हों के जलने
और बाल्टी में पानी की टकराहट से
शाम के गिरने का भान होता
तो कोई आश्चर्य नहीं था

आश्चर्य इस बात का है
कि ऐसा हो नहीं रहा है

एक मकड़ी है
जो जाला बुनने में इतना व्यस्त है
कि पत्तों के ऊपर गिरती ओस
जिसमें चंद्रमा के आंसू हैं
उसके जाले पर गिर रहे हैं
और उसे कोई होश नहीं है
हालांकि जब जाला टूटता है
आंसुओं से उसे चंद्रमा के दुख से दुख होता है
और वह फिर अपने काम में लग जाती है

घर तो किसी भी हालात में बचाना पड़ेगा
गायों और सांढ़ों के पास अपना घर नहीं है
उनके भीतर की गर्माहट तहस-नहस हो रही है
गायों को अपने दूध को संतुलित करना
मुश्किल हो रहा है
खून की एक अंधेरी नदी
सड़कों पर बेहिसाब बह रही है
मुझे गुस्सा इस बात का है कि मेरी रगों में भी कुछ हलचल क्यों नहीं है
मेरी पत्नी को छननी में चंद्रमा
खिला-खिला दिखता है
उसे उसका दुख दिखाई नहीं देता
मुझे दिखाई देता है
चाहे कितना भी दुख उसके जीवन में हो
मैं जानता हूँ कि वह है
फिर भी उसे मेरी चिंता है
क्या प्रकृति इसीलिए शक्ति है

वैसे एक बात समझ में नहीं आती
कि चंद्रमा पुल्लिंग है
लेकिन उसे हमेशा स्त्रीलिंग के रूप में
क्यों प्रयोग में लाया जाता है
बहुत कुछ घटित हो रहा है
और मैं सुख में नहीं हूँ
मुझे चिंता इस बात की है
कि प्रकृति के रोने की आवाज
गधों को क्यों नहीं सुनाई दे रही है
वे लगातार रेंकते हुए
पूरे देश को बहरा कर रहे हैं
और अपने विकास से इतने प्रसन्न हैं
कि कान बंद करने पर उन्हें
अनहद नाद सुनाई देता है

वे खुश हैं कि संतों के निर्गुण को
उन्होंने सगुण रूप में जीवित किया है
कि अचानक आकाशवाणी होती है
और तानाशाह का शरीर संत हो जाता है
मेरी छटपटाहट अब गुस्से में बदल रही है
हालांकि फिर सोचता हूँ कि गधे तो गधे हैं
वे मनुष्य बन ही नहीं सकते
रेंकना उनका धर्म है
और आजकल धर्म रसोई की आग बन गया है
वैसे जितना कुछ घटित हो रहा है
उसमें इतना तो जोड़ ही सकता हूँ
कि आज नहीं तो कल
इस वाक्य में केवल इतना बदलाव करना पड़ेगा
कि बहुत कुछ सार्थक घटित हो रहा है।

घंटी

मेरे तलुओं में टूटने के तमाम चिह्न हैं
वे धीरे-धीरे घिस रहे हैं
चिह्न मिट रहे हैं या कहूँ कि
टूटने की पराकाष्ठा
टूटने की औषधि बन रही है
अब इतना तो विश्वास हो गया है कि मैं
सूरज के गले में घंटी
बांध सकता हूँ।

एक आदमी अंततः

एक आदमी दिल और दिमाग से
अलग कुछ नया कर रहा है
एक आदमी इतना विचलित है कि उसे नहीं पता
कि उसका दर्द सबसे अद्वितीय दर्द है
एक आदमी खुद पर इतना भरोसा करता है
कि लोग उस पर संदेह करने लगते हैं
एक आदमी अपनी मृत्यु के इतने सपने देखता है
कि वह जीवन के बारे में सोचने लगता है
एक आदमी सिर्फ विजय के बारे में सोचता है
और अपने बेटे से हार जाता है
एक आदमी अपनी मातृभाषा से
इतना प्रेम करता है
कि दूसरे भाषा-भाषियों को
तिरछी नजर से देखने लगता है
हालांकि वह टैगोर और तकषी को
सबसे बड़ा लेखक मानता है

एक आदमी के जीवन में
उसके घर के बर्तन इतना खड़कते हैं
कि वह बंटवारा नहीं करता
एक सबसे बड़ा बर्तन रखता है
और उसे बजाने लगता है कि घर की दीवारों से
भले बेसुरी हो एक ही सुर बाहर निकले
एक आदमी घिसे-पिटे औजारों के नव निर्माण में
इतना निपुण है
कि वह कंपनियों को मुनाफा देने लगता है
वह खुश है कि उसे
चपरासी की नौकरी मिल गई है
एक आदमी रिंग में लगातार हारता है
और करोड़पति बन गया है
उसकी पत्नी को नहीं पता
कि यह ऐसा विचित्र समय है
कि हारने वाले को जीतने वाले से
ज्यादा पैसे मिलते हैं
एक आदमी सिर्फ रोटियों से खेलता नहीं है
उनसे इतनी लंबी सड़क बनाता है
कि किसी देश का प्रधानमंत्री
या राष्ट्रपति किसी विकासशील देश की
निर्विघ्न यात्रा कर सके
एक आदमी को सिखाया गया है
कि धरना-प्रदर्शन से हक मिलता है
वह किसी जंतर-मंतर पर नारे लगाता है
लेकिन कोई तीसरा है
जो ‘पिच ऐन्ड टॉस’ करता है
और उसे शहीद का दर्जा दे दिया जाता है
और एक आदमी ऐसा भी है
जो इतना संवेदनशील है
कि अंततः संवेदनहीन होने के तरीके के लिए
गूगल करता है
और उसकी हत्या हो जाती है।

हरतालिका तीज

वह भी लगभग साठ के आस-पास ही है
वह सिर्फ पढ़ी-लिखी नहीं है
बल्कि ज्यादा पढ़ी-लिखी है
उसे पता है
मैं धर्म-कर्म में उतना ही विश्वास करता हूँ
जितना उसे फारसी नहीं आती है
यह व्रत वह मेरे लिए रखती है
और इतनी निष्ठा से रखती है
कि पानी की एक बूँद भी
हलक से नीचे न जाने के बावजूद
उसके चेहरे की चमक फीकी नहीं पड़ती
तेज और बढ़ जाता है

वह कहती है यह व्रत का कमाल है
पार्वती जी मेरे साथ हैं
मैने इतने सोमवार का व्रत रखा
कि मेरे पति का नाम भी महेश है
मैं जानता हूँ यह सब मनोवैज्ञानिक है
लेकिन पता नहीं क्यों उसकी निष्ठा के आगे
मेरी सारी बौद्धिक कवायदें
नतमस्तक हो जाती हैं

वह लगभग आदेश देती है
कि पूजा के लिए यह चाहिए
और मैं न चाहते हुए भी लेकर आता हूँ
क्योंकि मैं जानता हूँ
कि ज्यादा बोलने से उसे प्यास लगेगी
और वह बिना पानी के बीमार हो जाएगी
वह जितना आराम करेगी
उसके व्रत की पूर्णता के लिए उतना ही अच्छा है
मुझे नहीं पता यह सब मैं क्यों कर रहा हूँ
लेकिन कर रहा हूँ
धागे को इतना नहीं खींच सकता
कि वह टूट जाए
लड़ते-झगड़ते बहस करते इतने बरस बीत गए
न वह बदली न हम

यह कहना सचमुच सही होगा
कि भले मुझे लाल गुलाब प्रिय हो
और उसे पीला
हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्रेम करते हैं
इतना जितना उम्र की गिनती करने की
जरूरत ही न पड़े।

तितलियों की चुप्पी

तितलियों की चुप्पी भय पैदा कर रही है
उनकी उड़ान में दुख है
हैरान करने वाली बात यह है
कि फूलों को सब पता है
और वे कतई परेशान नहीं हैं।

गन्ना

मेरे बेटे ने खेत में उगे गन्ने नहीं देखे
वह खेत में खड़े होकर
गन्ना चूसने के बारे में तो
कल्पना भी नहीं कर सकता
गन्ने की मिठास अद्वितीय होती है
और उसका रस
आलू मटर की लपेटवाँ तरकारी के साथ
अद्भुत! वर्णन करना मुश्किल है
ठीक यही वह जगह है जहां
गन्ने की मिठास के बारे में कविता लिखना
लगभग असंभव हो जाता है
मेरा बेटा तो सिर्फ ‘ग’ से गमला जानता है
जिसमें कम से कम गन्ना तो
नहीं उगाया जा सकता।

संपर्क : एसोसिएट प्रोफेसर,एवं अध्यक्ष(हिंदी विभाग), नारायण पी.जी.कालेज, शिकोहाबाद283135मो.9358430238