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| अक्कितम (1926-2020) भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित मलयालम के प्रसिद्ध कवि। इन्हें दार्शनिक का कवि माना जाता है। वे प्रेम की शक्ति में यकीन करते थे। कविताओं के अलावा नाटक, लघु कथाएं, निबंध भी लिखे। |
आरसु वरिष्ठ साहित्यकार और अनुवादक। भारतीय। हिंदी पुस्तकें ‘आधुनिक वातायन से’, साहित्यनुवाद ः संवाद और संवेदना’। मलयालम में भी कई पुस्तकें। |

परम दुख
कल आधी रात में
फैली स्वच्छ चांदनी
सराबोर रहा मैं
खड़ा रहा आत्मविस्मृत
फूट-फूटकर रोया अनजाने
बिखर गए तारागण
पर वजह नहीं पूछी बुलबुल ने
बस पोंछ डाला हवा ने पसीना
नजदीक के दरख्त ने
नहीं गिराया एक भी पत्ता
दुनिया को नहीं पता चला हाल
पैर तले की घास भी नहीं हिली
औरों को कैसे बताऊं
मेरी सोच के परे की बात?
पूर्ण
पूर्ण से पूर्ण को
कम करके देखें
तब भी वह टिका रहेगा
पूर्ण को जानें हम
दीये की एक बत्ती से
कई बेलियां जला लेंगे
तब भी पहली बत्ती
रहेगी पूर्ववत।
मतदान
सुबह-सुबह किसी ने
दी दरवाजे पर दस्तक
गृहस्थ ने खोला द्वार- उम्मीदवार
खड़ा है सामने हाथ जोड़कर
आगंतुक ने कहा – याद रखें
परसों है हमारा चुनाव
गृहस्थ मुस्कराया – विजयी बनो
मेरी शुभकामनाएं
नहीं चाहिए चाय हमें
बोले- मात्र वोट दें, बस
विदा लेते वक्त
हाथ मिलाया नेता ने बड़े बल से
चुनाव खत्म हो गया
बीता करीब एक हफ्ता
अंगुली में
तब भी पड़ी थी काली मैल
अगला चुनाव आते वक्त
तैयार रहूंगा मैं खुद
धकेलना मत तब मुझे
अंगुली रगड़ूंगा क्या पत्थर पर!
तीन मुहूर्त्त
बस पकड़ने के लिए
जब लोग खड़े होंगे
कतार में कायदे से
तभी शुरू होगा
जनतंत्र का युग भारत में
मन की घाटी में लगाते हैं
झाड़-झंखाड़
उसे देते हैं खाद-पानी
पर करते हैं हम सफाया
बाहर के घने जंगलों का
दिल के भीतर के पशुओं को
खूब खिलाते-पिलाते हैं
पर गोली मार डालते हैं
बाहर चरते जानवरों को
अभ्यर्थना करते हैं मन में
प्रिय जनों की
बाहर के लोगों का
करते हैं तब सरासर अपमान
आंख पर पट्टी बांधकर
आईना देखती दुनिया से
क्या बात करें हम
गले में मंगलसूत्र बांधकर
झूलते झूठ पर
विचार करेगा एक दिन जगत।


