कवि और अनुवादक। छह कविता संकलन और छह अनुवाद की पुस्तकें प्रकाशित। संप्रति अध्यापन।

 

दोस्त

देर तक बैठे उसके साथ
अनगिनत दुख अपने गिनाए
पर दोस्त बहुत ढीठ था
उसने किसी भी दुख को
दुख ही नहीं माना
सामने बैठा हुआ मुस्कुराता रहा देर तक
मैं भी थक चुका था
उसे अपने दुख सुनाते, गिनाते
अंत में मैने स्वीकार ली अपनी हार
अंत में उसने कहा-
अब ठीक है
चलो तुम्हारी इस हार का
अब जश्न मनाया जाए।

नदी और बादल

कितनी आसानी से
बादल उतर आते हैं
नदी में
ठहरते हैं कुछ पल
फिर बहने लगते हैं
तो कभी डूब जाते हैं
पर कितनी मुश्किल से
नदी पहुंच पाती है
बादलों तक।

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