अनुवादक – मंजु श्रीवास्तव
आकाशवाणी में उद्घोषणा के कार्य।कविता संग्रह : हजार हाथ।बांग्ला और अंग्रेजी से कई रचनाओं का अनुवाद।



रवींद्रनाथ टैगोर (1861-1941) बांग्ला के महान भारतीय कवि।

जहां चित्त में न हो भय

जहां चित्त में न हो भय और सर रहे ऊंचा
जहां ज्ञान हो मुक्त
जहां धरती बंटी न हो टुकड़ों में
और संकीर्ण दीवारों से
जहां शब्द हृदय की गहराई से निकलें
जहां दिशा-दिशा में फूट उठती हो
कर्मों की धारा अबाध नदी-सी
जहां विवेक के स्वच्छ झरने
बहते हों मृत कुरीतियों के रेगिस्तान में
जहां मस्तिष्क हो उदार विचारों से भरा
और कर्मरत हों सभी आनदंपूर्वक
बढ़ें हमारे कदम
स्वाधीनता के इसी स्वर्ग की ओर
मेरे पिता, जाग्रत करो
मेरे देश भारत को इसी दिशा में!

अलेक्जेंडर सर्जेईविच पुश्किन (1799-1837) रूस के सर्वाधिक चर्चित कवि। 

नन्ही चिड़िया

अजनबी भूमियों पर रख देता हूँ
पुराने देशी रस्मोरिवाज के गट्ठर
और वसंतोत्सव पर खुशी खुशी
आजाद कर देता हूँ एक नन्ही चिड़िया को
अब मैं आजाद हूँ, मुझे तसल्ली है
और कृतज्ञ हूँ उस सर्वशक्तिमान का
कि इस दुनिया में उसके पैदा किए जीवों में से
कम से कम एक को मैंने आजादी दी है।

लैंग्सटन ह्यूज
(1901-1967) अमेरिका की एक महत्वपूर्ण अश्वेत आवाज।

आजादी का हल

जब कोई व्यक्ति शून्य से शुरुआत करता है
जब कोई व्यक्ति
खाली मगर साफ हाथों से शुरुआत करता है
जब कोई व्यक्ति
एक दुनिया बनाने के लिए शुरुआत करता है
वह शुरू करता है खुद से

अपने उस विश्वास से जो उसके दिल में है
अपनी उस ताकत से जो उसके अंदर है
बनाने की अपनी उस इच्छा से जो उसमें है
पहले दिल में एक स्वप्न पलता है
फिर दिमाग उसके रास्ते तलाशता है
फिर निगाहें दुनिया को देखती हैं
वनों-जंगलों से भरी महान दुनिया को
दुनिया की उर्वर मिट्टी को
दुनिया की नदियों को

आंखें देखती हैं वहां निर्माण सामग्री
देखती हैं कठिनाइयां और बाधाएं भी
हाथ खोजता है औजार जंगल काटने के
जमीन जोतने के, पानी की ताकत के दोहन के
फिर हाथ मदद के लिए खोजता है दूसरे हाथों को
हाथों के एक बड़े समुदाय को
इस तरह
स्वप्न नहीं रह जाता कभी किसी अकेले का
बन जाता है सामाजिक स्वप्न
मेरा स्वप्न नहीं, बल्कि हमारा स्वप्न
मेरी अकेली दुनिया नहीं
बल्कि तुम्हारी दुनिया और हमारी दुनिया
उन सब हाथों की दुनिया जिन्होंने इसे बनाया
काफी पहले लेकिन बहुत पहले नहीं
सागर पार से जहाज आते थे
तीर्थयात्रियों और पुरोहितों को लेकर
साहसिकों और लुटेरों को लेकर
आजाद लोगों और ठेके पर नौकरों को लेकर
दासों और दास-स्वामियों को लेकर
आए सभी एक नई दुनिया अमेरिका में

पाल फहराते जहाज आए
पुरुषों और उनके स्वप्नों
स्त्रियों और उनके स्वप्नों को लेकर
छोटी-छोटी टोलियों में एक साथ
दिल से दिल मिले, हाथों से मिले हाथ
उन्होंने हमारी धरती संवारनी शुरू की

कुछ आजाद हाथ थे
जिन्हें और आजादी चाहिए थी
कुछ अनुबंधित हाथ थे
अपनी आजादी की उम्मीद करते हुए
कुछ गुलामी से जकड़े हाथ थे
अपने दिलों में आजादी के बीज बचाए हुए
लेकिन एक शब्द वहां हमेशा था- आजादी

नीचे धरती के अंदर तक गया हल
आजाद हाथों से और दास हाथों से
अनुबंधित हाथों से और साहसिक हाथों से
उर्वर मिट्टी को पलटते हुए हल कई हाथों से चले
फसलें उगाई गईं काटी गईं
पैदा हुआ अन्न जिससे हमारे पेट भरे
और कपास जिससे अमेरिका के तन ढके

पेड़ों पर टनकती कुल्हाड़ियां
अनेक हाथों से चलीं
काट गिराई गईं लकड़ियां
जिनसे आकार पाईं अमेरिका की छतें
नदियों और समुद्रों में छपाक-छपाक चलीं नावें
वे चलीं और उनसे चला अमेरिका का यातायात
चाबुक चलाए गए जिनसे घोड़े सरपट दौड़े
अमेरिकी मैदानों के आर-पार
आजाद हाथ और गुलाम हाथ
अनुबंधित हाथ और साहसिक हाथ
गोरे हाथ और काले हाथ
सभी ने पकड़ीं हल की मूंठें
कुल्हाड़ियां और हथौड़े
चलाईं नौकाएं, चलाए चाबुक घोड़ों पर
जिसने अन्न दिया अमेरिका को

घर दिए और उसे गतिमान किया
इस तरह साथ मिलकर अपने परिश्रम से
इन हाथों ने बनाया अमेरिका को
परिश्रम और सिर्फ परिश्रम से गांव बने
और कस्बे फिर नगर बन गए
परिश्रम और सिर्फ परिश्रम से आईं
बड़ी पतवार वाली नौकाएं
फिर पाल वाली नावें और स्टीमर
वैगन आए, कोच आए
बंद वैगन और भाड़ा-गाड़ी
श्रम से आए कल-कारखाने
ढलाई कारखाने आए, रेल की पटरियां आईं
हाट आई बाजार आया दुकानें आईं स्टोर आए

आए शक्तिशाली उत्पाद सांचों में ढले
दुकानों में बिकते गोदामों में ढेर लगते
सारी दुनिया में पहुंचते
यह संभव हुआ गोरे हाथों काले हाथों के
सिर्फ और सिर्फ परिश्रम से

स्वप्न आया, शक्ति आई और आई इच्छा
और अमेरिका के निर्माण का रास्ता बना
और अब मैं यहां, तुम वहां
और है मैनहट्टन, शिकागो, सिएटल
न्यू ऑरलियंस
बोस्टन और एल पासो
और अब यह है यूएसए

काफी समय पहले किसी ने कहा था
पर बहुत पहले नहीं कि
सभी व्यक्ति अपने ईश्वर द्वारा
समान जन्मते हैं
कुछ अविच्छेद्य प्राकृतिक अधिकारों के साथ
उनमें जीवन, स्वाधीनता और खुशी के
शामिल अधिकार हैं

उसका नाम जेफर्सन था
उन दिनों गुलाम हुआ करते थे
लेकिन अपने दिलों में ये गुलाम
चुपचाप मानते थे कि उसने जो कहा था
वह उनके लिए भी है

यह काफी पहले की बात है
लेकिन इतना पहले भी नहीं
जब लिंकन ने कहा था
कोई व्यक्ति इतना भी श्रेष्ठ नहीं कि

वह किसी दूसरे व्यक्ति को बिना उसकी
सहमति के नियंत्रित कर सके
उन दिनों भी गुलाम होते थे
मगर अपने दिलों में वे जानते थे
कि उन्होंने जो कहा वह जरूर हर मनुष्य
के लिए कहा होगा
अन्यथा इस बात का
किसी के लिए कोई अर्थ नहीं था
और तब एक व्यक्ति ने कहा

गुलामी की जिंदगी से
आजादी की मौत भली
वह एक काला आदमी था
जो गुलाम हुआ करता था

लेकिन आजादी पाने के लिए भाग गया था
और गुलामों को पता था कि
फ्रेडरिक डगलस ने जो कहा, वह सच था
हार्पर फेरी पर
जॉन ब्राउन के साथ कई नीग्रो मरे
जॉन ब्राउन को फांसी पर लटकाया गया
गृहयुद्ध के पूर्व अंधेरा ही अंधेरा था
किसी को भी ठीक-ठीक पता नहीं था कि
आजादी को जीत कब मिलेगी
मिलेगी भी कि नहीं
कुछ लोग सोचते थे
औरों को भी पता था कि जीत मिलेगी
गुलामी के उन अंधेरे दिनों में
आजादी के बीज को सुरक्षित रखते हुए
गुलामों ने एक गीत बनाया
पर हल को अपने हाथों से पकड़ के रखो
पकड़े रखो
इस गीत का वही अर्थ है जो इसमें कहा गया है
पकड़े रखो हलों को, आजादी आएगी
हल को अपने हाथों से पकड़ के रखो, पकड़े रखो
युद्ध से आई आजादी रक्तरंजित
और भयानक लेकिन आई

हमेशा की तरह कुछ लोग थे
जिन्हें शक था कि युद्ध खत्म हो जाएगा
गुलामों को आजादी मिल जाएगी
संगठन खड़े हो जाएंगे
आज हम जानते हैं कि
यह सब कैसे हुआ
जनता और राष्ट्र के सबसे अंधेरे दिनों से
कैसे सब बाहर निकले

युद्ध के बादल जब छंट गए
वहां प्रकाश था
वहां वनों-जंगलों से भरी भूमि थी
और लोग जुड़कर बन गए थे एक राष्ट्र
अमेरिका एक स्वप्न है

कवि कहता है ये वादे हैं
लोग कहते हैं ये वादे एक दिन सच होंगे
लोग हमेशा ऐसी बातें जोर से नहीं बोलते
न ही कागज पर लिखते हैं
लोग अक्सर महान विचारों को अपने दिल
की अतल गहराइयों में रखते हैं
और कभी-कभी व्यक्त कर देते हैं

रुक-रुक कर लड़खड़ाते हुए कहते हैं वे
लेकिन एक-दूसरे को हमेशा नहीं समझते
फिर भी समझने की कोशिशें रहती हैं
और कहने की कोशिशें भी
तुम एक व्यक्ति हो
हम मिलकर अपनी धरती तैयार कर रहे हैं
अमेरिका की
सबकी धरती तैयार कर रहे हैं
सबके स्वप्न सजे हुए हैं
पर हल को अपने हाथों से पकड़ कर रखो
पकड़े रखो

अगर घर अभी पूरी तरह से नहीं बना है
हिम्मत मत हारो लोगों
अगर लड़ाई में अभी विजय नहीं मिली है
तो चिंतित मत हो सैनिको!

योजना और नमूना यहां है
अमेरिका के ताने-बाने में आरंभ से बुना हुआ

सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं
कोई व्यक्ति इतना श्रेष्ठ नहीं है कि
किसी दूसरे को बिना उसकी सहमति के
नियंत्रित कर सके
गुलाम जीवन से आजाद मरना हमेशा बेहतर
ये बातें किसने कहीं?
अमरीकियों ने
ये शब्द कहां के हैं?
अमेरिका के
अमेरिका कौन?
तुम, मैं
हम अमेरिका हैं
हमें बाहर से हराने वाले शत्रुओं को
हमारा जवाब होगा- ‘नहीं’
हमें अंदर से बांटने और हराने वाले शत्रुओं को
हमारा जवाब होगा- ‘नहीं’
आजादी
भाईचारा
लोकतंत्र
इन महान शब्दों के सभी शत्रुओं को
हमारा जवाब होगा- ‘नहीं’

बहुत समय पहले
आजादी की ओर बढ़ रहे गुलाम लोगों ने
एक गीत बनाया था

हल को अपने हाथों से पकड़ कर रखो
पकड़े रखो
हल ने इतिहास के पूरे खेत को
इस पार से उस पार तक
जोत कर एक नई मेंड़ बनाई
और उस मेंड़ पर आजादी के बीज बोए गए

बीज से एक वृक्ष उगा
वह बढ़ रहा है और हमेशा बढ़ता रहेगा
यह वृक्ष सबके लिए है
पूरे अमेरिका के लिए, पूरे विश्व के लिए
इसकी शाखाएं फैलें और छाया बढ़े

जब तक सभी जातियां
सारी जनता इसकी छाया में न आएं
तब तक
हल को अपने हाथों से पकड़ कर रखो
पकड़े रखो!

मंजु श्रीवास्तव, सी११., एनबीसीसी विबज्योर टावर्स, न्यू टाउन, कोलकाता७००१५६ मो.९६७४९८६४९५