
असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय। काव्य संग्रह- ‘अरे ओ वसंत!’
बहस
हम एक दिन करेंगे बहस
हम बहस करेंगे
अट्टालिकाओं के कंगूरे
जिनकी रोशनी से जगमगाते हैं
उनके घर को अंधेरे क्यों खा जाते हैं
हम बहस करेंगे
शहर कौन सी डुगडुगी बजाता है
कि गोबर गांव छोड़कर
शहर आ जाता है
हम बहस करेंगे
इतिहास में कितनी सच और
कितनी झूठ की मिलावट है
कौन लिखवाता है इतिहास
हम बहस करेंगे
न्याय की दुहाई देने वाला
राजा बनते ही
अन्यायी क्यों हो जाता है
हम इस पर भी बहस करेंगे
कि सिगरेट लेकर हाथ में
स्त्री जब फोटो खिंचवाती है
तो पुरुष की क्यों जल जाती है
फिलहाल
हम बहस के मुद्दों की पोटली बनाएं
और सिरहाने रखकर सो जाएं
सपनों में ये मुद्दे दबे पांव निकलेंगे
उत्तर तलाशने नई सड़कों पर।
सी-5, लेन-8, सेक्टर-9, बेलापुर सीबीडी, नवी मुंबई, महाराष्ट्र – 400614 मो.9029535295

