मेघराज मेश्राम
युवा कवि। मराठी कविता संग्रह ‘माणूस असण्याच्या नोंदी’ प्रकाशित। संप्रति ‘दैनिक लोकमत’ मे कार्यरत।

 

प्रवीण तुरानकर
लेखक और अनुवादक। मराठी-हिंदी अनुवादित कविता संग्रह ‘जब होती है दगान’, और ‘मेरी हयात का प्रमाण’ प्रकाशित।

 

युद्ध : कुछ टिप्पणियां

1.
शहर का कलेजा छलनी हो गया है
घरों पर दहशत मंडरा रही है

थरथराती खिड़कियों के झरोखों से
कुछ लड़कियां
देख रही हैं
आग की लपटें, धुएं के गुबार

दुकानों में खत्म हो गया है
सैनिटरी पैड्स का स्टॉक
एक बीस वर्षीय लड़की को
तीस साल पीछे जाकर
कपड़े का उपयोग करना पड़ रहा है

लड़कियां रुआंसी हो गई है
खून की नदियां देखकर
युद्ध है कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेता है।

2.
पत्तों जैसे बिखर गए हैं
इस शहर के भग्नावशेष
हवाओं पर तैर रही है
जली हुई इमारतों की राख
उधर देखिए
उस मलबे से
किसी की तस्वीर झांक रही है बाहर
कितना सुंदर है न
नीली आंखों वाला
सुनहरे बालों वाला
बिल्कुल गुड्डे जैसा

यह लड़का कहां होगा अब?
हरे रंग की उसकी साईकिल
उसके साथ होगी न?

3.
डॉक्टर यूरी बोरझेंको बता रहे थे:
इस छह साल के बच्चे के सिर में छर्रा लगा है
मां आंखों के सामने जलकर राख हो गई
फिर भी आंख से एक आंसू भी न टपका
सिर्फ टकटकी लगाकर शून्य में देख रहा था

दो दिनों बाद अपने पिता से बोला
मेरे लिए मां ले आइए
मुझे स्कूल छोड़ने कौन जाएगा?

4
पति को गोली मारी
घसीटते ले गए उसे खंडहर हो चुके घर में
कपड़े उतरवाए बंदूक की नोंक पर
नोच डाला चारों ने एक एक कर

खूब पढ़े गए हैं, सुने गए हैं
युद्धभूमि पर सैनिकों की मर्दानगी के किस्से
फिर ये नामर्द कौन थे?

5.
ओला बुखनो के घर के सामने की इमारत पर
दो दिन पहले मिसाइल का मलबा गिर कर
भयानक आग लगी
कहीं पत्ता भी गिरे अब तो
घबराकर जाग जाती है

अलार्म बजते ही
थरथराते हुए सीढ़ियां उतरती है
बिल्डिंग के भूतल में जाकर छुप जाती है
खाट पर खुद को समेट लेती है
आंखें बंद कर आसमान की तरफ देखती है

प्रार्थना करती है-
सब शांत हो जाने दे।

6.
अपने दस महीने के बच्चे के साथ
वह रुकी है
उजड़ते हुए शहर में
हथियारों के शोर में
उसके वायलिन के सुर
खो न जाए

आओ प्रार्थना करें!

मेघराज मेश्राम, के.डी.के. कॉलेज रोड, गली नं. 12(क), राजेंद्र नगर, नंदनवन, नागपुर-440024 (महाराष्ट्र)
प्रवीण तुरानकर, हनुमान नगर राजुरा, जिला चंद्रपूर-442905 (महाराष्ट्र) मो. 9822572522