प्रकाशित पुस्तकें : जंगल में पागल हाथी और ढोल  पीठ पर रोशनी (काव्य संकलन), ढुकनी एवं अन्य कहानियां (कहानी संग्रह)

घर से बाहर स्त्री

स्त्री जब बढ़ाती है
चौखट से
एक कदम बाहर
वह तय कर लेती है
आधी दुनिया की दूरी

जब वह करती है
पार सड़क
जीत लेती है पूरी दुनिया
माप लेती है
धरती की परिधि

स्कूटी और कार चलाती हुई स्त्रियां
आजादी के पंख पर सवार
मापती हैं शहर को
उसकी लंबाई और चौड़ाई में
अपनी अंगुलियों पर रखती हैं
उसका हिसाब

वे जानती हैं धरती का व्यास
बराबर होता है
उनके चक्कों के व्यास के

घर से बाहर निकलती स्त्रियां
अपने दोनों हाथों में
उठाए रखती हैं
पृथ्वी का गोलार्ध।

उस दिन की प्रतीक्षा में

लड़कियां हँस रही हैं
हँसती हुई लड़कियां अच्छी लगती हैं
लड़कियां झुंड में हैं
जब झुंड में होती हैं
ठठाकर हँसती हैं
अकेले हँसने से लड़की डरती है

लड़कियाँ गीत गा रही हैं
गीत गाती हुई लड़कियाँ अच्छी लगती हैं
लड़कियां गीत गाती हैं
जब झुंड में होती हैं
अकेले गाने से लड़की डरती है

लड़कियाँ नाच रही हैं
नाचती हुई लड़कियाँ अच्छी लगती हैं
लड़कियों को नाचना आता है
उन्हें नाचना भाता है

लड़कियाँ नाचती हैं, जब समूह में होती हैं
अकेले नाचने से लड़की डरती है

एक दिन आएगा जब लड़कियों को
हँसने के लिए
समूह की आवश्यकता नहीं होगी
उस दिन की प्रतीक्षा में हैं मेरी कविताएं।

संपर्क : आशीर्वाद, बुद्ध विहार, पोस्टअशोक नगर, रांची८३४००२ (झारखंड) मो. ८७८९२६३२३८