सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी। कविताओं की तीन पुस्तिकाएं, सात संग्रह, चार कहानी संग्रह प्रकाशित।

लड़कियां नहीं डरतीं

लड़कियां चाहती हैं
घर के बाहर खुली दुनिया में घूमना
उन्हें दुनिया से डर नहीं लगता
पिता डरता है
लड़कियां टहलना चाहती हैं
देर रात खुले आकाश के नीचे
लड़कियां नहीं डरतीं
पिता को डर लगता है
पिता चाहता है
लड़कियां समय से घर लौटें

बेटी की तरह
मां को भी बाहर की दुनिया अच्छी लगती है
बेटी की शक्ल में वह चाहती है
खुद को बाहर घूमते हुए देखना
मां को यह लालसा
अपनी मां से मिली है
मां बेटी को नहीं टोकती
वह टोकना नहीं चाहती
उसे यह भी लगता है
घर की सत्ता पिता के पास है
अपने पिता से मिली है
पिता अपनी सत्ता के प्रति सजग है

पर पिता के मन में अधिकार से
कहीं ज्यादा डर है
दरअसल पिता अधिक जानता है
घर के बाहर के डर को
पिता जानता है घर के बाहर भी होती है
पुरुषों की सत्ता
पिता जानता है
पुरुष की घर के बाहर ही सत्ता होती है
कहीं ज्यादा क्रूर, हिंसक और उच्छृंखल
इसलिए पिता डरता है।

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