संपादकीय दिसंबर 2020 : विज्ञान की आजादी

संपादकीय दिसंबर 2020 : विज्ञान की आजादी

शंभुनाथ भारत में अति-विकसित टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अति-पिछड़े मानस द्वारा हो रहा है। वैज्ञानिक मानसिकता का चरम अभाव है। समस्या यह है कि बाजार और राजनीति पर मानवीय नैतिकता का जरा भी नियंत्रण नहीं है। ये दोनों अब निरंकुश हैं। ये यथार्थ को अपने उद्देश्य के अनुरूप ढालने...
संपादकीय नवंबर 2020 : अब क्या खोना बाकी है !

संपादकीय नवंबर 2020 : अब क्या खोना बाकी है !

शंभुनाथ ‘भूल जाना मेरे बच्चे कि खुसरो दरबारी था / या वह एक ख्वाब था / जो कभी संगीत, कभी कविता, कभी भाषा, कभी दर्शन बनता था।’ (कुंवर नारायण) यदि कभी खड़ी और ब्रजभाषा के कवि खुसरो का कुछ लिखा हुआ सामने आए तो क्या हम पहचान पाएंगे उस ‘हिंदी की तूती’ को?...
संपादकीय अक्टूबर 2020 : गांधी का धर्म

संपादकीय अक्टूबर 2020 : गांधी का धर्म

शंभुनाथ आधुनिक युग में खूब अंग्रेजी पढ़ लेने के बावजूद गांधी ने कहा था, ‘मैं हिंदू पहले हूँ…’ वे तर्क के युग में आस्था की शक्ति को समझते थे, क्योंकि कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ भारतीयों के पास तर्क की जगह आस्था की शक्ति ज्यादा थी। यह ‘पर्वतों को हिला’ सकती थी और आजादी की...