गुरभजन गिल

लुधियाना के जनप्रिय पंजाबी कवि। कविताओं और गजलों के कई संग्रह। बलराज साहनी मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित।

रावेल पुष्प

कोलकाता के वरिष्ठ रचनाकार और पत्रकार।  कविता संग्रह मुझे गर्भ में ही मार डालो’, यात्रा संस्मरण, ‘मेरी बांग्लादेश यात्रा। युगल किशोर सुकुल पत्रकारिता सम्मान। शोध पत्रिकावैचारिकीमें साहित्यसंपादक।

अब आगे की बात करो

माना कि ताली एक हाथ से नहीं बजती
पर तुम ताली नहीं थप्पड़ मार रहे हो
और संविधान के मुंह को
तमतमाता हुआ लाल कर रहे हो
हम जानते हैं कि थप्पड़
एक हाथ से ही बजता है
ताली का ताल तो सुमेल से निकलता है
थप्पड़ का हेकड़ी से
हम से पहले कितनों के साथ तुमने
कौन-कौन सी ताली बजाई है
कैसे-कैसे थप्पड़ मारा है
वक्त के बही खाते में
एक-एक पाई का हिसाब दर्ज है
मेहरबान
दोनों की आवाज में बुनियादी फर्क है-
थप्पड़ तड़ाक से एक बार बजता है
और ताली लगातार बजती है
हमारे हाथ-पैर बांधकर
हमें तालियां बजाने के लिए मत कहो
हमारे हाथ खोलो, फिर हम बताएंगे
कि ताली कैसे बजानी है
अभी तो सिर्फ तुम बोल रहे हो
और हम सुन रहे हैं
इसमें संवाद कहां है
हमारे गुरु का उपदेश है
जब तक जीवित हो
कुछ सुनो भी और कुछ कहो भी
उत्तर दो, गुस्सा मत करो
अब आगे की बात करो…।

गजल

तेरे ही सवालों का जवाब ले के आए हैं
दिल वाली उखड़ी किताब ले के आए हैं
कहां-कहां कैसा-कैसा तीर तीखा मारा है
इन सब बातों का हिसाब ले के आए हैं
कांटों के घेरे पीछे कहो क्यों हो छिपती
हम तो तेरे वास्ते गुलाब ले के आए हैं
सूख गया व्यास, अब सतलज भी उदास है
आंसुओं से भरी रावी, चिनाब ले के आए हैं
अंतर की डोर में हैं दर्दों के मोती
देखो नजराने क्या जनाब ले के आए हैं
एक-एक सफ़ा तुम पढ़ लो ध्यान से
टुकड़े टुकड़े हो गए ख्वाब ले के आए हैं
दानियों को भिखारी बनाने लगी दिल्ली तू
चाक हुआ दर्द से, पंजाब ले के आए हैं।

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