15 साल तक हिंदी के प्रमुख समाचार पत्रों में खबरनबीसी के बाद अब अध्यापन। यात्रा, लोक संस्कृति और खेतीबाड़ी में गहरी रुचि।

हँसना

1
ऐसी कौन-सी बात कही गई होगी
पृथ्वी पर पहली बार
कि हँस पड़ा होगा
कोई उदास आदमी दाँत फाड़कर
उसे हँसते देखकर

हँसते हुए गांव की ओर भागा होगा कोई बच्चा
बच्चे की देखादेखी और भी बच्चे
हँसते हुए भागे होंगे अपने घरों से
इस तरह हँसी की रेल बन गई होगी
उस दिन फूल अचंभे से भर गए होंगे
आदमियों को हँसता देखकर

हँसी की बारात देखकर
सरबतिया की बूढ़ी अम्मा ने
हँसने के लिए टटोले होंगे अपने दाँत
हँसी किसी संक्रामक बीमारी की तरह
फैल गई होगी गांव में
फिर देश में, फिर दुनिया में।

2
अक्सर माएं हँसी खोजने निकलती हैं
अक्सर पिता हँसी लेकर लौटते हैं
शब्दों की दुनिया से अपरिचित
छोटे से बच्चे के पेट पर हँसी रहती है
हँसी चरवाहों की कहानियों में भी रहती है
चरवाहे कहीं दूर चले गए हैं
जंगल के उस पार या फिर चांद पर
मुझे उम्मीद है कि चरवाहे
चाँद को सुना रहे होंगे हँसने की कहानियां
चांद हँसते-हँसते किसी दिन थक जाएगा
तो हँसी जरूर बरसेगी।

3
दुनिया का पहला हँसंदड़ा अब कहां मिलेगा
मिले तो उससे पूछूंगा उन शब्दों के बारे में जो उसने पहली बार किसी को हँसाने के लिए कहे होंगे
मिले तो कहूंगा कि एक बार फिर से आओ
हँसना अब धंधा बन चुका है
हँसना सबसे संवेदनहीन क्रिया बनती जा रही है।

4
मलखान हँसता था
तो उसका पूरा शरीर ऐसे हिलता था
मानो हँसी को हिलाकर
गिरा देना चाहता है मिट्टी में
जैसे उसकी हँसी में छिपे हों हँसी के बीज
जिससे उगेंगी छोटी-छोटी हँसियां
हँसते-हँसते वह
एक बार आसमान की ओर देखता था
तो दूसरी बार पृथ्वी की ओर
इस तरह वह नाप लेता था
दोनों के बीच का अनंत विस्तार
और यह सब हँसी से ही संभव था।

5
हँसते हुए आदमी से
कोई उसका दुख नहीं पूछता है
हँसते हुए आदमी के दुख
हँसी में झर जाते हैं।

संपर्क : ग्रामहरदुआ, पोस्टनाहिल, जिलाशाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश243001 मो.7817919164