
गुजराती की प्रसिद्ध कथाकार और कवयित्री। हिंदी में भी लेखन। कई कहानी संग्रह। हिंदी कविता संग्रह ‘खामोश बातें’, ‘पंख में बारिश’, ‘ढाई इंच का चांद’, ‘धूप के हस्ताक्षर’ आदि। दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर।
धान रोपती स्त्रियां
जागते हुए दिन
जब सोने लगे
और सोती हुई रातें
जब जागने लगे
तो समझना कि यह तीसरा ग्रहण है प्रकृति का!
सर्दी के मौसम में भी
तुम्हारा पूरा शहर पसीने में तरबतर दिखे
बेवजह ही सुनाई देने लगे
हवा की सांय सांय तुम्हें
मुर्दों के तन से या जिंदा जिस्मों से
कोई फर्क ही न पड़ता हो मानो
जब सूखी हवाएं इस तरह गुजरने लगे
बेवजह ही दूब थरथराती रहे
बसंत ऋतु में
बेवजह ही भीतर पतझड़ ठहरने लगे
आधे मन से आधी बरसकर बारिश
बेवजह ही लौटने लगे
नदी अपना पथ भूलकर भटकने लगे
पीर की मजारों पर मन्नतों के धागे
मन्नतों से ज्यादा बंधने लगे
श्राद्ध के काले दिनों में
तुम्हारे पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए
सूने आकाश में एक काला कौवा भी न दिखे
तो समझना
तुमने धान रोपती स्त्रियों के
हाथ देखना छोड़ दिया है…
धान रोपती स्त्रियां
खेतों से परे भी बहुत कुछ रोपती हैं
झिलमिलाती एक चमक के लिए
अपनी पूरी देह रोप देती हैं तुम्हारी आंखों में
वे स्त्रियां
तुम्हारी गाली और घृणा की खरपतवार हटाकर
आनंद की परिभाषा रोपती हैं
आसान नहीं होता
किसी का पश्चिम लेकर
उसे अपना समूचा पूरब दे देना
धान रोपती स्त्रियां
धरतीगर्भ के अंधकार में
अपने हिस्से का सूरज रोपती हैं
वे सिर्फ
तुम्हारे इस जन्म का सूखा ही नहीं पी जातीं
उस घूंट में होते है
तुम्हारे भाग्य के शोकगीत भी
मीठे मधुर लोकगीत गाती वे स्त्रियां
अपने हिस्से का मेघ मल्हार रोपती हैं
घंटों तक पानी भरे खेत में
झुकी हुई अवस्था में रहकर
वे स्त्रियां तुम्हारे मस्तिष्क की उन्नतता रोपती हैं
अपने स्वप्न को स्वत: कैद कर
तुम्हारी मुक्ति रोपती हैं
यह जानते हुए भी कि
तुम जादूगर नहीं एक सौदागर हो
नई फसल के लिए कुछ बीज बचाकर
थोड़े बचे बीजों से
तुम्हारा सुनहरा भविष्य रोपती हैं
तुम्हारे राजकोश से जवाहरात नहीं चाहतीं वे
चाहती हैं तुम्हारी दृष्टि की एक इंच छांह
इसलिए
धान रोपती स्त्रियों को देखो, सुनो-
क्या कहते हैं उनके हाथ?
रात और युद्ध
बहुत कठिन होता है
रात की नदी को पार करना
एक ऐसी नदी
उस पार ले जाने वाला कोई मल्लाह न हो
जिसमें कोई स्वप्न-नाव न हो
तुम कितने भी हो कुशल तैराक
रात का राग तोड़ देता है तुम्हारे हर बैराग
वह रात
जो तुम्हारे वजूद को बहा ले जाने को हो तत्पर
वह रात
जो तुम्हारी आत्मा को डुबोने को हो आतुर
बहुत कठिन है उस रात से युद्ध
जो अदृश्य शस्त्र लिए तुम पर करती हो वार
जिसमें निश्चित होती है तुम्हारी हार
बहुत कठिन है उस रात से युद्ध
जो संघर्ष को संघर्ष न कहती हो
मानती हो एक खेल
अंधेरे के मलबे तुम्हें दफना देने को हों आतुर
मैं जानती हूँ
किसी प्राचीन नगर की तरह
उत्खनन कर कोई नहीं निकाल पाएगा बाहर
तुम्हारा हाथ थामने के लिए
परीलोक से न आएगा कोई मर्त्यलोक में
क्योंकि कोई सुबह नहीं है रात के उस पार
ठंडी रात
आधी आग से आधा जलाएगी तुझे
आधे बचे तुम कई जन्मों की यातनाएं लिए
करते रहोगे उससे पूरा जलाने की याचना
निष्ठुर चांद रात के प्रेक्षागार में
देखता रहेगा रातभर तुम्हारी विवशता
हां
मैंने जी है ऐसी एक रात
केवल मैं और रात का अंधेरा जानते हैं कि
इस युद्ध में कुछ भी नहीं बचेगा युद्ध के सिवाय…!
चुप्पी
एआई से यह नहीं पूछा जा सकता कि
भूख का रंग क्या है
क्या होता है प्यास का रंग
इन दिनों
रातें सफेद और दिन काले क्यों लगते हैं
नींद के आंगन में क्यों नहीं आते स्वप्न खेलने
पश्चिम में डूबता सूरज
कभी क्यों डूबता नहीं है मन गगन में
चांद के पास आग नहीं है
फिर भी क्यों देता है दाह
कृत्रिम बुद्धि चुप है इस बात पर कि
एक औरत कितनी बार मरती है एक दिन में
इतनी सारी और इतनी चौड़ी सड़कों के बावजूद
क्यों नहीं है एक भी सड़क उसके लिए
जो उसे दोयम से प्रथम तक पहुंचा सके!
कृत्रिम बुद्धि मौन है इस बात पर कि
इस पीढ़ी में
दूध के दांत फूटने के साथ
नहीं फूटता है अब बचपन
फूटता है यौवन या बुद्धत्व
इस युग में बोधिज्ञान की प्राप्ति के लिए
क्यों आवश्यक नहीं है कोई अनुभव यात्रा
या बोधिवृक्ष
कृत्रिम बुद्धि से नहीं पूछा जा सकता कि
मनुष्य कुल में जन्म लेने के बावजूद
क्यों भेड़िया बन घूमता है आदमी
क्यों होता है उसकी भाषा में इतना अंधेरा
एआई से यह नहीं पूछा जा सकता कि
क्यों भूल जाती है प्रकृति अपनी प्रकृति
किसी किसी छत पर
बारिश क्यों सूखा बरसाती है
निश्छल और सभ्य मनुष्य के लिए
जीवन और मृत्यु से परे
कोई तीसरा दरवाजा क्यों नहीं खुलता
क्यों अपने ही घर में आगंतुक होता है वह मनुष्य
मैं जानती हूँ
मैं कितनी भी कर लूं लंबी प्रतीक्षा
उसकी चुप्पी बनी रहेगी सदियों तक
अनवरत….
संपर्क : सहायक प्रोफेसर, गुजराती विभाग, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय, उधना मगदल्ला रोड, सुरत-395007 गुजरात मो. 9409565005

