प्रिय मेरी अच्छीसी छोटी बहना कुसुम,

आज अचानक सुबह-सुबह मेरा झोला तुम्हारी सौगात से भर गया। सौगात यानी ‘वागर्थ’ का मई 2023 अंक। ‘अचानक’ इसलिए कि इस बार कई महीनों के अंतराल में ‘वागर्थ’ आया। ‘समावर्तन’ का भी यही हाल है। प्रकाशित हर महीने वेबसाइट में हो जाता है, किंतु मुद्रण में अर्थाभाव के कारण विलंब हो जाता है।‘वागर्थ’ का मई अंक मेरे हाथ में है और मैं ताजा अंक के पन्ने पलटते- पलटते 67वें पृष्ठ पर पहुंचा। तुम्हारा आलेख एक सांस में पढ़ गया। ‘प्रातःस्मरणीय सीताराम सेकसरिया: एकला चलो रे’। तुम्हारा आलेख हमेशा की तरह स्फूर्ति से भरा होता है। अद्भुत, उत्प्रेरक व्यक्तित्व, अद्भुत तुम्हारा लेखन।

इसी अंक में भारतीय भाषा परिषद के अलंकरण समारोह का विवरण भी है। मुझे मेरे अलंकरण समारोह की याद आ गई। तुम तो याद आई ही, राज्यपाल त्रिपाठी जी भी याद आए। तुम्हारे महत्वपूर्ण स्नेहिल आग्रह से उन्होंने काव्यपाठ किया था। तुम्हारे आग्रहपूर्ण अनुरोध से तुम्हारी शैली मन को छू गई। मन में बार-बार एक ही विचार उठ रहा था। कितना अच्छा होता कि मैं भी किसी रूप में अलंकरण समारोह में हाजिर होता।

मैंने इस समारोह के बाद राज्यपाल महोदय को अपनी कुछ किताबें भेंट की थीं। उनकी अनुकंपा ऐसी हुई कि उन्होंने आगामी वर्ष के विश्व हिंदी सम्मान के लिए मुझे चुन लिया। हिंदी का यह वैश्विक महत्व का सम्मान है, अहो भाग्य। मन ही मन उम्मीद कर रहा हूँ कि अगले अलंकरण समारोह में मैं उपस्थित हो सकूं।

तुम्हारा प्रभात दादा
(प्रभात कुमार भट्टाचार्य)
उज्जैन

राजेश पाठक:‘वागर्थ’ मई 2023 अंक। लघुकथा ‘कालो’ (सुजाता कुमारी)। बच्चों में गलत प्रवृत्तियों के लिए अभिभावक तथा उसका परिवेश जिम्मेदार रहा है जिसे समय रहते परिमार्जित कर दिया जाना चाहिए।

विद्याभूषण की कविताएं उत्कृष्ट हैं, वर्तमान संदर्भ में कविता की अस्मिता को तार-तार करते मानव कुव्यवहार की परत उधेड़ती कविताएं।

अजय प्रकाश, इलाहाबाद:‘वागर्थ’ का मई अंक। सबसे पहले मेरी दृष्टि परिचर्चा पर गई। इलाहाबाद में नई कहानी के तीन कहानीकारों की तिकड़ी चर्चित थी- अमरकांत, ज्ञान प्रकाश, शेखर जोशी। उस समय इनके कहानी संग्रह भी चर्चा में थे- क्रमशः ‘जिंदगी और जोंक’, ‘अंधेरे का सिलसिला’, ‘कोसी का घटवार’। बंग महिला पर वैचारिक लेखन भी प्रासंगिक है। प्रज्ञा विश्नोई की कहानी ‘मिरर इमेज’ कथेतर गद्य की तरह लगी। तरसेम गुजराल की कविताएं एक अरसे बाद पढ़ने को मिलीं। अन्य कवियों की कविताएं भी अच्छी हैं।

कुल मिलाकर यह पत्रिका केंद्रीय भूमिका का निर्वाह कर रही है, क्योंकि कोरोना काल में कुछ पत्रिकाएं बंद हो गई हैं, लेकिन जो भी पत्रिकाएं अलख् जगाए हुए हैं, उनमें ‘वागर्थ’ की मुख्य भूमिका है। अगर हो सके तो इसमें निकलने वाली अन्य पत्रिकाओं की सूची भी दें तो और आयाम खुलेंगे।

आनंद भारती:‘वागर्थ’ का मई 2023 अंक। हमारी अंतरदृष्टि पर ही जब काई बिछ गई है तो कौन आत्मनिरीक्षण की बात करे और कौन अपनी गलतियों से मुक्ति पाए! वैसे हर संपादकीय सोचने के लिए कुछ कर्ज लाद देता है।

राजा अवस्थी:‘वागर्थ’ का मई 2023 अंक। आत्मनिरीक्षण, आत्मालोचन ही मनुष्य को आत्मशोधन की राह पर ले जा सकता है, किंतु हम आत्मनिरीक्षण से बचना चाहते हैं। मनुष्य न आज मुक्ति चाहता है और न संघर्ष। वह लोभ और लालच का दास बन चुका है। विमर्शवाद भी पावर संचित करने का हथियार बन चुका है। विर्मश के विमर्शवाद में बदलने से इससे अधिक की संभावना भी नहीं बचती।

जय चक्रवर्ती की गजल खुद में खुद को बचाने और लोक को बचाने की चाहत से जुड़ी है। दरअसल यह दुनिया को अनुराग से भरे रखने की चाहत है।

प्रकाश:‘वागर्थ’ के मई अंक में प्रकाशित नीतिशा खलखो की कहानी ‘सखड़ी’ विशिष्ट शैली मे लिखी मार्मिक और विचलित करने वाली कथा है।

एस. चंद्रशेखर:‘वागर्थ’ मई 2023 अंक। जया पाठक श्रीनिवासन की कविताओं के विषय हमेशा से उनकी बहुमुखी प्रतिभा से युक्त चिंतन से प्रेरित होते हैं।

वे केवट की नाव के माध्यम से नदी और उस पूरे परिदृश्य को सुंदरता से उकेरती हैं।

केशव शरण, वाराणसी: भाषा-शैली का बहुत ही महत्व है लेकिन नए कथ्य के बिना कविता-कहानी असरदार नहीं हो पाती। ‘वागर्थ’ का मई 2023 अंक स्त्री कथाओं का अंक है। इसमें नीतिशा खलको द्वारा भारतीय आदिवासी अंचल की कहानी  ‘सखड़ी’ पाकिस्तानी लेखिका जाहिदा हिना की कहानी ‘तितलियां ढूंढने वाली’ और अफगानी लेखिका ज़ैनब अख़्लाकी की कहानी ‘प्रस्फुटन’  ऐसी ही ग़मनाक और पुरअसर कहानियां हैं जो पाठकीय उपलब्धि बनती हैं। एक अच्छी कविता तो बड़ी मुश्किल चीज हो गई है।

पी.के.सिंह, पटना:‘वागर्थ’ मई 2023 अंक के लिए संपादकीय परिवार को साधुवाद और बधाई।  अंक की सामग्रियां उच्च स्तरीय हैं। कहानियों में नीतिशा खलखो की कहानी ‘सखड़ी’ अच्छी है। यह अंक की सर्वश्रेष्ठ कहानी है। जाहिदा हिना की ‘तितलियां ढूंढने वाली’ बेहद मार्मिक कहानी है। अफगानी कहानी ‘प्रस्फुटन’ उत्कृष्ट रचना है। यह कहानी अंक में देकर आपने पाठकों का कल्याण किया है। शेखर जोशी पर परिचर्चा बहुत महत्वपूर्ण और दिलचस्प और संग्रहणीय है।

कुलदीप मोहन त्रिवेदी, उन्नाव:‘वागर्थ’ मई 2023 के अंक पढ़ा। साहित्य की तमाम विधाओं को समेटे इस अंक में  कुसुम खेमानी द्वारा सीताराम सेकसरिया पर लिखा संस्मरण अच्छा लगा। समाज के लिए खुले हृदय से कार्य करने वाले लोग प्रातःस्मरणीय है। इनसे उन लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए, जिनकी तिजोरियों में धन रखने की जगह नहीं फिर भी एक धेला की मदद किसी की नहीं करते। सुजाता कुमारी की ‘कालो’ और शशि बाला की ‘नया भाई’ लघुकथाएं अच्छी लगीं। ऐसे साहित्य को स्थान दीजिये, जो बार-बार पढ़ने को मन करे।  श्रेष्ठ संपादन के लिए धन्यवाद।

इंद्रकांत झा, पटना:‘वागर्थ’ के मई 2023  अंक में परिचर्चा के अंतर्गत वेंकटेश कुमार का मूल्यांकन अत्यंत प्रभावपूर्ण है। मूल्यांकन के क्रम में हिंदी के वरिष्ठ आलोचकों और कवियों का जिक्र इसे पठनीय और और संग्रहणीय बना देता है। जया पाठक श्रीनिवासन की कविता ‘नाव और सीता’, जय चक्रवर्ती की गजल, राधेलाल बिजघावने की ‘सब्जीवाली औरत’ सराहणीय है। ‘वागर्थ’ में प्रकाशित सामग्रियों की एक पहचान होती है। एक वजन होता है। इस अंक के सभी लेखकों को बधाई देता हूँ।