बेटा बाहर से आया।आते ही भुनभुनाते हुए उसने सबसे पहले टीवी बंद किया और मां को घूरते हुए बोला, ‘जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ रही है, अक्ल कम होती जा रही है।आप को नहीं मालूम कि गुड्डू की दसवीं की परीक्षा होने वाली है!

कुछ दिन के लिए बेटे-बहू के आग्रह पर आई मां ने कुछ कहना चाहा, पर आंसुओं ने वाणी को अवरुद्ध कर दिया।उसे विश्वास नहीं हुआ कि ये शब्द उसके बेटे के हैं।तभी बहू आ गई।

टीवी खोलते हुए बहू ने कहा, ‘मम्मी जी कहीं और तो जाती नहीं हैं।न ही यहां किसी को जानती हैं …उनके मनोरंजन का यही तो एक साधन है!’

‘पर गुड्डू …?’

‘गुड्डू दूसरे कमरे में भी तो पढ़ सकता है।’

मां को लगा यह मेरी बहू नहीं बेटी बोल रही है।

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(Painting by Jitendra Gaikwad)