बीना ने फोन पर ही स्वाति को शिकायती लहजे में कहा, ‘स्वाति! एक बात मेरी समझ में नहीं आई, तुम छुट्टियों में अपने मायके जाने के लिए उतावली रहती थी। इस बार तुम्हारी सासू मां बार-बार कह रही हैं तुम्हें जाने के लिए, फिर भी तुम जाना नहीं चाहती, ऐसा क्यों?’

‘बीना! बात दरअसल यह है कि पिछले वर्ष मैंने उनसे मायके जाने के लिए बहुत मिन्नतें की थीं, पर वह एक की दो नहीं हुई। मुझे मायके जाने नहीं दिया।’

 बीना ने समझाते हुए फिर कहा, ‘इतनी सी बात का बुरा नहीं मानते, तुम तो बहुत समझदार हो स्वाति! बड़ों की बात इस तरह दिल से लगा कर नहीं रखते। इतनी प्यार करने वाली सासूमां नसीब वालों को नसीब होती है। अब गुस्सा थूक दो और मायके चली जाओ, तुम्हारी मां भी तुम्हें बुला रही है।’

‘बीना! माफ करो। इस बार मैं मायके नहीं जाऊंगी चाहे जो हो जाए।’

‘ऐसी जिद क्यों है?’

‘बीना! तुम्हें मालूम नहीं है, पिछले साल मेरी मां के हाथों में प्लास्टर चढ़ा हुआ था और अभी मेरे हाथों में चढ़ा है!’        

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