हिंदीमैथिली में लेखन। हिंदी में चार कविता संग्रह और मैथिली में तीन पुस्तकें| संप्रति आंबेडकर मेडिकल कॉलेज रोहिणी में काउंसलर।

दो बच्चे साथ खेलते हैं
बच्ची चुन लेती है गुड़िया
स्त्री स्वयमेव एक ताकत है
वह जानती है कि संभाल लेगी
अपने भाई-बहन भी
किसी बड़ी इमारत के बनते समय
सबसे ज्यादा चढ़ती है सीढ़ियां
पसीने से तरबतर
मिट्टी और गारे से सनी-लिपटी
बना जाती है महल और पुल
लड़कियां उन दिनों और तेज भागती हैं
जब आते होते हैं उनके पेट में मरोड़
पैर में तेज दर्द
वे ले जाती हैं पिता को अस्पताल
जागती हैं रात-रात
आंखों में पड़ते हैं स्याह
कई बरस के अनुभव और तह
हां, कुछ कम चढ़ पाती हैं हिमालय
कुछ कम पढ़ पाती हैं किताबें
कुछ कम पी पाती हैं दूध
कुछ कम रह पाती हैं कोख में
फिर भी अब खूब जन्म ले रही हैं बेटियां
दादी-नानी भी बांट रही हैं मजबूरी में पेड़े-लड्डू
गा रहीं सोहर आंगन में
समय बदल जो गया है अब!

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