कई विधाओं में लेखन। दो उपन्यास, दो कहानी संग्रह, एक कविता संग्रह प्रकाशित। अद्यतन कहानी संग्रह ‘ना उम्मीद नहीं हम’।

समय से जंग

दुनिया के सबसे व्यस्त लोग वे हैं
जिन्हें भोजन का समय भी गिनकर मिलता है

वे समय की होड़ में नहीं भागते
बल्कि किसी साथी के सूखे टिफिन पर
अपनी आधी हरी मिर्च रख
समय की आंख में आंख डाल
उसे चुनौती देते हैं

उनकी कलाई पर समय की घड़ी नहीं बंधती
समय को उन्होंने खुला छोड़ दिया है
बाबुओं और राजाओं के लिए
वे जानते हैं समय धोखेबाज है
कभी उनका नहीं होता।

असली चेहरे

मेरी सोच के दायरे में राजधानी नहीं आती
आते हैं गांव, किसान, मजदूर, रोटी, बेटी
गरीबी और शिक्षा
आते हैं वे पानीदार चेहरे
जो हवा को हवा
जल को जल
आकाश को आकाश
धरती को धरती बनाए रखते हैं
वे कारखानों की दीवारों के भीतर
बारूद नहीं गढ़ते
बल्कि सबके सामने खड़े होकर
देश की रीढ़ में अपना श्रम मिलाते हैं
और बदले में पीते हैं
जीवन का सारा हलाहल
ताकि धरती पर
थोड़ा नमक और थोड़ी मिठास
अब भी बची रह सके।

झोपड़ियों की छाया

मेरी सोच के दायरे में
बार-बार चली आती हैं
झोपड़ियों की टूटी खटिया पर पड़ी
सूखी बीमार बुढ़ियाएं
या बीमार सूखे बूढ़े
जिन्हें महंगी दवाएं भी जिला नहीं सकतीं

गंदे गड्ढों में खेलते नंग-धडंग बच्चे
हजारों बीमारियों से घिरे हुए
जिनके हाथ कभी पेड़ नहीं काटते
फिर भी वे जीते हैं
नालों के किनारे
तिरपाली की झुग्गियों में

मुझे घिन आती है
उनकी टूटी सड़ी असहाय जिंदगी से
फिर भी
मेरी सोच के दायरे में
बार-बार वे ही आ जाते हैं।

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