फैमेलिन के. मरक

(1967) गारो भाषा की प्रतिष्ठित कवयित्री और लेखिका।अंग्रेजी में भी लिखती हैं।

अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद : देवेंद्र कुमार देवेश

(1974) हिंदी कवि, आलोचक, अनुवादक और संपादक।कुल डेढ़ दर्जन पुस्तकें प्रकाशित।रचनाओं के अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाओं में हुए हैं।साहित्य अकादेमी के पूर्व क्षेत्रीय सचिव के रूप में कार्यरत।

आदिवासियों की अनदेखी न करें

मुट्ठी कस लें, जब आलस भरपूर हो
दिल कड़वाहट से भरा हो
विचारहीनता ठसाठस हो
हाथ छोटे पड़ जाएं, दिल ठहर जाए
सर्वोच्च पर उदासीनता का शासन हो
लेकिन मृत्यु के समय, मन डर से कांप उठता है
धरती पर अपने प्रवास में हर कोई
शक्तिहीन और मूक है, चुनौती की उस रात
आपकी चाल
आपके जीवन को प्रभावित करती है
हमेशा सजग रहें
पुरोधाओं का इंतजार न करें-
लेकिन गंभीरता से कूड़ा कम करना
दुबारा उपयोग और पुनर्प्रयोग सिखाएं
शिक्षा को सार्थकता के साथ फैलने दें
जंगलों में, पहाड़ों पर, जहां जीवन स्पंदित होता है
बेहतरीन ढंग से संरक्षित करें
आदिवासियों को शांति और यश प्रदान करें
अवसर मिलने पर एकजुट होकर काम करें
हाथ, शक्ति, मन और
बुद्धि के काम में सद्भव के लिए
पूरी दुनिया को प्रभावित करनेवाले
आदिवासियों की अनदेखी न करें।

पति का विलाप

तूफान और हिंसक लहरों में
जैसे वह बह गया
समय पुरुष की प्रतीक्षा करता है
किसी अपरिहार्य जाल की तरह
पुरुष ने सोचा-
पत्नी परिवार की स्तंभ और आश्रय है
लेकिन प्रचंड हवा से परिवार उजड़ गया
त्रासदी की चोट से सिर अलग हो गया
क्या यह उनकी हल्की चुहल के प्रति ईर्ष्या थी-
अथवा परिवार के स्वावलंबन का अपहरण?
उसकी सुबहें कामकाज से दबी थीं
और शामें हँसी-ठहाकों वाली।
क्या दिनों का विभाजन खत्म हुआ?
अथवा काम पूरा होने के कारण
खत्म होने की तड़प?
विचार जड़ें पकड़ रहे हैं
क्योंकि अंधेरा शक्तिशाली हो गया है
आंसू की बूंदें टपक रही हैं
क्योंकि रात रास्ता देती है
भाग्य ने एक सुंदर जीवन से ईर्ष्या की
विनाश का स्रोत प्रलोभन
जीवन के मूल स्रोत को नष्ट कर रहा है
सुहाग-कक्ष धराशायी हो गया है
अकेलापन, आघात और भ्रम ने घर जमा लिया है
दुख ने दिल को टूटने की कगार तक पहुंचा दिया है
पति अपने भाग्य को कोसने लगा है
देखने और सोचने के लिए
जीवन के साक्ष्य ही बचे हैं
दिवंगत को देखने की एक अनथक खोज
एक आत्मा
किसी रूप अथवा एक दृष्टि के तौर पर
अंतहीन प्रतीक्षा, व्यग्र खोजती निगाहें
घर के पिछवाड़े की खोज
यत्र-तत्र की खोज बन जाती है
दिल और दिमाग का एक ही सवाल :
क्या प्रिया कहीं खड़ी होकर प्रतीक्षा में है?
बेचैन दिल की तड़प :
क्या उसे खोजकर दुबारा पाया जा सकेगा?

फैमेलिन के. मरक: एसोसिएट प्रोफेसर, गारो विभाग, नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, तुरा कैंपस, एन एच 51, चासिंग्रे, मेघालय 794001 मो. 9436160103
देवेन्द्र कुमार देवेश: क्षेत्रीय सचिव, साहित्य अकादेमी, 4 डी एल खान रोड, कोलकाता-700025 मो. 9868456153