
चार कविता संग्रह, और तीन ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित। संप्रति सहायक अध्यापक।
पिता जब धान पीटते हैं
पिता जब धान पीटते हैं
तो पीट देते हैं
नफरत, हिंसा, विद्वेष के बीज
पिता के द्वारा हर बार
धान का मुट्ठा उठाना
और पटक देना
दो फाड़ हुए खजूर के तन पर
जैसे वोट लेने के बाद
नेता कुठाराघात करते हैं
अबोध, भोली-भाली जनता के मन पर
पुआल को कर दिया जाता है
आग के हवाले
पुआल जलता नहीं सुलगता है
जिसके मन, मस्तिष्क में समाया हो जल
वह कैसे जलेगा?
हम धान की पोंगी के गीत लिखते हैं
हम क्वार के महीने में धान और
खेत की बात करते हैं
और एक संसदीय पुरुष
हमें घोषित कर देता है
बेशऊर आदमी।
ग्राम –खिजरपुर, पोस्ट बस्तर, मऊ, जिला – कासगंज, उत्तर प्रदेश – 207242 मो. 7398953335

