वरिष्ठ कथाकार। छह कहानी संग्रह, दो उपन्यास, छह आलेख संग्रह, दो यात्रा वृत्तांत और दो कविता संग्रह प्रकाशित। साहित्यिक पत्रिका ‘पश्यन्ती’ का तीन वर्षों तक सह-संपादन। अंग्रेजी में भी समान अधिकार से लेखन

 

भारत से आए हुए वैज्ञानिकों के दल के सदस्य ताइवान-आगमन की वैधानिक औपचारिकताएं पूरी कर लेने के बाद अब निकास-द्वार के ठीक पहले स्थित करेंसी एक्सचेंज के काउंटर पर खड़े हुए थे। कुछ अटक कर बोली-समझी जा रही अंग्रेजी और कुछ संकेत-भाषा इतना सुनिश्चित कर गई कि वैज्ञानिकों द्वारा साथ लाए गए अमेरिकी डॉलर आराम से ताइवानी डॉलर में परिवर्तित हो गए।

‘चलो, ये काम तो हो गया!’ कहते हुए बलविंदर ने ताइवानी डॉलर पर बने सनयात सेन के चित्र को घूरते हुए आगे जिज्ञासा प्रकट की- ‘सर जी साड्डा गाइड तो दिख नहीं रहा।’

‘सर जी!’ से संबोधित वरिष्ठतम वैज्ञानिक और ग्रुप-लीडर नटराजन मुस्कुराए और पीछे मुंह घुमाकर कनिष्ठतम वैज्ञानिक विपिन से बोले – ‘जरा दाएं-बाएं चक्कर लगाकर देख आओ।’

विपिन अभी एक दिशा में दस कदम आगे बढ़ा ही था कि उसने ही नहीं, बाकी वैज्ञानिकों ने भी सुना- ‘बूऽऽडा! सकामोनी बूऽऽडा!…’

विपिन ठिठक गया।

और तभी उन अटपटे से लग रहे शब्दों को उच्चारित कर रहा आदमी सबकी नजरों के दायरे में आ गया। छोटे कद का एक किंचित स्थूलकाय ताइवानी टोपी से सज्जित अपनी खोपड़ी ऊपर-नीचे हिलाते हुए ‘बूऽऽडा सकामोनी बूऽऽडा’ बोल रहा था और रह-रहकर दाएं हाथ की तर्जनी अपनी छाती पर ठोंक दे रहा था।

हथेली से ‘उसे देख कर आता हूँ।’ का इशारा कर विपिन उस ताइवानी की ओर बढ़ा।

उसके पास पहुंचते ही वह आदमी हाथ बढ़ाकर बोला- ‘निऽहा!’

अनायास ही हाथ आगे बढ़ाकर मिला लेने के बाद विपिन बोला-

‘वीऽ फ्रॉम इंडिया’

‘येऽस! लैंड ऑफ सकामोनी बूऽडा!’ वह आदमी बत्तीसी पूरी ही दिखाते हुए प्रसन्न मुद्रा में बोला तो विपिन ने कहा- ‘मिस्टर निऽहा!’

‘नो, नो, नो… माई नेम टोनी। इन मंडारिन लैंग्वेज ‘निऽहा!’ मीन्स ‘हाऊ आर यू?’

विपिन हँसा, फिर बोला ‘गुड!’ तसल्ली हो जाने के बाद कि यही भारत की ट्रैवेल-एजेंसी द्वारा पहले से निर्धारित फुलटाइम टूर-गाइड है, विपिन ने टोनी के निर्देशानुसार बाकी वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने का इशारा किया।

सारे वैज्ञानिक अपने-अपने पहियेदार अटैची-बैग घसीटते हुए उस ओर बढ़ चले। पास पहुंच जाने पर विपिन ने सबसे टोनी का बाकायदा परिचय कराया। अपने बैग के साथ विपिन का भी बैग घसीट लाया राहुल हैंडिल विपिन को पकड़ाते हुए फुसफुसाया- ‘तो यही नमूना रहेगा हमारे साथ?’

नटराजन ने सुन लिया। बिना मुंह घुमाए, धीरे से बोले- ‘परदेस में आप लोग जरा सोच-समझ के रहें और बोलें।’

राहुल का मुंह लटक गया, वैसे भी अपनी दिशाहीन बकबक के चलते कई बार नटराजन से वह टोका जा चुका था।

टोनी सबको एक बेहद आरामदायक-से लगते वैननुमा वाहन की ओर ले चला। सामान इत्यादि व्यवस्थित कर जब सारे वैज्ञानिक अंदर बैठे तो वाहन के आश्वस्तिदायक मॉडल से प्रसन्न होकर उसकी तारीफ भी करने लगे।

सीटों की दो कतारों के बीचोबीच बड़ी मनोरंजक मुद्रा में छोटा-सा माइक थामे हुए खड़ा टोनी बोला- ‘टिल योर स्टे इन ताइवान, दिस इज द वेहिकल एट योर कमांड। एनी क्वेश्चन?’

‘फर्स्ट, एवरीबडी इंट्रोड्यूसेज हरसेल्फ ऑर हिमसेल्फ।’

नटराजन ने इतना कहा नहीं कि सारे वैज्ञानिकों ने एक के बाद एक परिचय देना शुरू कर दिया, सबसे पहले नटराजन, फिर रामनाथ तिवारी, फिर राहुल, फिर विपिन, बलविंदर… और सबसे अंत में दल की दो महिला-वैज्ञानिक रीता सलूजा और वीणा मेहता।

टोनी हर परिचय को ध्यान से सुनता जा रहा था, शायद बताए गए नाम को दो-तीन बार बुदबुदा कर याद कर लेने की कोशिश भी कर रहा था।

वैज्ञानिकों का परिचय समाप्त हो गया तो टोनी ठोढ़ी सीने से लगाकर जैसे दो क्षण सोच में रहा, फिर झटके से सिर उठाकर बोलने लगा, ‘माई मंडारिन नेम टू लांग, टू डिफिकल्ट टु करेक्टली प्रोनाउन्स फॉर यू… सो शार्ट इंगलिश नेम टोनी।’

और; उसने बताया कि वह रिटायर्ड यूनिवर्सिटी प्रोफेसर है, पॉलिटिकल साइंस का। रिटायर होने के बाद गाइड का काम हॉबी के रूप में करता है।

इस पर नटराजन की आंखों में उसके लिए आदर कौंधा, राहुल ने विपिन को देखकर ऐसा भाव बनाया कि प्रोफेसरी करने के बाद क्या अटपटा काम पकड़ा है इसने।

उसने बताया कि माओ की कम्यूनिस्ट सेना से हारकर इस द्वीप में अपने समर्थकों-सैनिकों के साथ आश्रय लेने वाले च्यांग काई शेक की सेना में उसके पिता अच्छे पद पर थे, उस समय वह पांच वर्ष का बच्चा ही था और दुर्भाग्य यह कि उसकी बहन अफरातफरी में चीनी मुख्यभूमि में ही छूट गई, तबसे कोई भी संपर्क संभव नहीं हो पाया बहन से।

इस पर महिला-वैज्ञानिकों के चेहरे पर करुणा उभरी, रामनाथ, नटराजन से बोले- ‘वक्त की मार खाया हुआ है।’ उसने बताया कि वह दुनिया-जहान की खबर रखता है, भारत के बारे में भी बहुत कुछ जानता है, भारतभूमि को बहुत आदर की दृष्टि से देखता है।

इस पर विपिन पूछ बैठा- ‘एक्सक्यूज मी! व्हाई आर यू शाउटिंग ‘सकामोनी बूऽडा’ एट द एयरपोर्ट?’

टोनी के चेहरे पर घोर आश्चर्य का भाव पसर गया। फिर जैसे एक-एक वैज्ञानिक के चेहरे का भाव पढ़ने की असफल कोशिश करने के बाद वह पीछे हटा और वैन में संभवत: कंडक्टर के बैठने के लिए बनी चौड़ी-सी जगह पर पद्मासन लगाकर बैठते हुए उसने हाथ जोड़े और कहा-‘बूऽडा! सकामोनी बूऽडा!’

‘ओह! ये तो शाक्यमुनि बुद्ध का नाम ले रहे हैं, महात्मा बुद्ध का’, कहते हुए रामनाथ अपनी सीट से उछल ही पड़े।

सकामोनी बूऽडा! का रहस्य खुल जाने के बाद सब मुस्कुरा दिए, टोनी ने तो फिर बत्तीसी ही दिखाकर कहा- ‘येऽस्। यू लेडीज एंड जेंटलमेन फ्रॉम द लैंड ऑफ सकामोनी बूऽडा। द ग्रेट सकामोनी बूऽडा।’

ताइपेई में ठहरने के लिए निर्धारित होटल पहुंचते ही नटराजन, रामनाथ और वीणा ने टोनी से जानना चाहा कि ट्रैवेल एजेंसी को स्पष्ट रूप से निर्देशित पूर्ण शाकाहारी भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उसने क्या-क्या इंतजाम किया है।

टोनी जैसे महात्मा बुद्ध की ही ध्यान-मुद्रा में दो क्षण अवस्थित रहने के बाद बोला-

‘नो चिकन, नो मटन…

नो बीफ, नो पोर्क…

नो एग, नो फिश …

ओनली वेजीटेरियन फूड गारंटीड।’

उसके कहने के अंदाज पर मुस्कुराए जा रहे वैज्ञानिकों को आगे सुनने को मिला- ‘एंड रेस्ट अश्योर्ड, इन ताइवान वी कैन प्लेजेंटली सरप्राइज अवर गेस्ट्स फ्रॉम द लैंड ऑफ सकामोनी बूऽडा इवन इन केस ऑफ वेजिटेरियन फूड… प्योर वेजिटेरियन फूड।’

चीनी मूल के लोगों के घनघोर रूप से सर्वभक्षी होने के डरावने किस्से सुनकर आशंकित हो रखे वैज्ञानिकों को राहत हुई, राहुल तो विपिन की ओर मुड़कर बड़बड़ाया- ‘सरदार जी और मेरे जैसे मांसखोरों को भी मन मारकर वेजिटेरियन ही बनना पड़ेगा, यहां के नॉन-वेजिटेरियन का कोई ठिकाना नहीं।’ इसे सुनकर बलविंदर मुस्कुरा दिया।

होटल में दो-तीन घंटे आराम फरमा लेने के बाद टोनी ने लॉबी में सबको बुलाकर ताइवान-प्रवास का कार्यक्रम सिलसिलेवार समझा दिया।

‘नो कन्फ्यूजन?’

उसके प्रश्न के जवाब में सबके सहमतिसूचक सिर हिला देने के बाद टोनी ने जैसे एक-एक शब्द पर जोर देते हुए कहा- ‘यू हैव कम फॉर साइंटिफिक एंड टेकनॉलाजिकल टुअर ऑफ ताइवान, टु सी अवर प्रॉग्रेस इन दिस रिगार्ड। दैट विल बी टेकेन केयर ऑफ वेरी वेल। बट…

बट … आई विल आल्सो ट्राई टु शो यू दैट वी द ताइवानीज पीपल रिप्रेजेंट द बेस्ट ऑफ चाइनीज कल्चर, वी हैव प्रिजर्व्ड द बेस्ट ऑफ चाइनीज कल्चर …. वी हैव फुल फेथ इन द टीचिंग्स ऑफ सकामोनी बूऽडा…’

उसने बोलते-बोलते आंखें मूंद लीं, जैसे किसी अदृश्य शक्ति के आह्वान-तले बोलता जा रहा हो।

‘बड़े भाई! यह मात्र गाइड नहीं है…’

रामनाथ ने धीरे से नटराजन से इतना कहा तो उन्होंने सहमति में सिर हिला दिया।

‘सो…. वी स्टार्ट विद अ लुक एट द बेस्ट ऑफ सिक्स थाउजेंड इयर्स ऑफ चाइनीज सिविलिजेशन! टुमॉरो एट टेन ओ क्लॉक शार्प, वी प्रोसीड टु नेशनल पैलेस म्यूजियम…ओके?’

सारे वैज्ञानिकों के ‘ओके!’ प्रत्युत्तर के बाद टोनी ने ‘शुभ रात्रि’ कहकर सबसे विदा ली। विदा लेते हुए अपनी टोपी को तिरछे-तिरछे खास ढंग से उतार लेना और फिर झटके से वापस पहन लेना शायद अपने मेहमानों के लिए टोनी का खास अंदाज था।

राष्ट्रीय महल संग्रहालय में चीन की सांस्कृतिक धरोहरों का बेहतर वर्णन करने के लिए टोनी ने एक ‘विशेषज्ञ’ गाइड से समय ले रखा था जो 30-32 वर्षीया जेन नामक आकर्षक युवती निकली।

‘नो बडी कैन रियली एंड फुल्ली एक्सप्लेन द ग्रेट चाइनीज कल्चरल वेल्थ डिस्प्लेड हियर बट जेन इज वन ऑफ द मोस्ट अकम्पिलश्ड गाइड्स हियर… सो, ओवर टु जेन।’ कहते हुए टोनी ने ‘सांस्कृतिक ज्ञानवर्धन’ के लिए वैज्ञानिकों को जेन के हवाले किया।

जेन वाकई कलाकृतियों की खूबी बड़े ढंग से बताती चली, सबसे प्रसिद्ध ‘जेडाइट कैबेज’ को तो उसके साथ जुड़े हुए मनोरंजक तथ्यों के साथ वर्णित किया।

मृत्तिका-कला वाले भाग में तो एक पात्र पर संस्कृत में उकेरा गया वर्णन देखकर रामनाथ की खुशी रोके न रुकी।

‘येऽस। नाऊ, यू सी। वी हैव, प्रिजर्व्ड अंड शो टु द रेस्ट ऑफ वर्ल्ड द वेरी बेस्ट ऑफ चाइनीज कल्चर…’

टोनी टप से बोल पड़ा और रामनाथ की जिज्ञासा के उत्तर में बताया भी कि ये वाली कलाकृति कम से कम चार सौ साल पुरानी होगी।

वैसे तो टोनी ने यहां कलाकृतियों पर ज्ञानवर्धन के लिए केस जेन के हवाले कर रखा था पर बीच-बीच में टिप्पणी जड़ने से न चूकता, कभी-कभी इस पर जेन के चेहरे पर हल्की-सी चिढ़ कौंध जाती।

कुछ दो दर्जन कलाकृतियों के ज्ञानवर्धन-सत्र के बाद बलविंदर से रहा न गया तो नटराजन से धीरे से बोल भी पड़ा-

‘सर जी! साड्डा गाइड पूरा पालिटिकल गाडड है। हर बात विच…।’

नटराजन ने आंखें तरेर कर उसे आगे बोलने से बरज दिया।

संग्रहालय-संपदा की झलक लेकर संतुष्ट वैज्ञानिक वापस वैन में बैठ ही रहे थे कि रामनाथ वैन के माथे पर लगा बैनर देखकर ठिठक गए।

उनको उधर निहारता देखकर टोनी तपाक से बोला- ‘इट इज इन मंडारिन, मीनिंग ‘फ्रेंड्स फ्रॉम द लैंड ऑफ सकामोनी बूऽडा…’

‘सो स्वीट!’ वैन में चढ़ रही वीणा ने इस पर टिप्पणी की नहीं कि टोनी हथेली सीने पर ले जाकर कमर तक झुक गया।

वैन में सबके व्यवस्थित हो जाने के बाद टोनी ने हाथ में माइक संभालते हुए घोषणा की-

‘फ्रॉम कल्चर टु साइंस एंड टेक्नॉलाजी, नाऊ वी प्रोसीड टु सिन्चू साइंस पार्क।’

सिन्चू की तरफ बढ़ रही वैन के अंदर सारे लोग चुपचाप बैठे हुए थे और बाहर के दृश्य का यदा-कदा नजारा लेते चल रहे थे कि टोनी ने माइक संभाला और खड़ा होकर बोला- ‘सो क्वायट! स्टिल फॉट्टी फाइव मिनट्स जर्नी टु रीच सिन्चू … लेट अस सिंग वन बाई वन …’ और उसने आव देखा न ताव माइक ‘लेडीज फर्स्ट!’ कहते हुए वीणा को थमा दिया।

अचकचा-सी गई वीणा के कंधे पर हाथ रखकर रीता ने कहा- ‘चलो, इसका मन रखने के लिए हम दोनों मिलकर गा देते हैं।’

पीछे से ‘ये गाइड है कि रिंगमास्टर’ बुड़बुड़ा रहे राहुल को नजरंदाज कर दोनों महिलाओं ने तान छेड़ी- ‘पायो जी पायो… राम रतन धन पायो’

भले एक भी शब्द न समझ पाए, टोनी मगन भाव से मुंडी हिलाता रहा, राहुल और विपिन उसकी भंगिमा का बुड़बुड़ाहटों में मजा लेते रहे। महिलाओं का भजन समाप्त हो गया तो बलविंदर सुरूर में आ गया और खुद ही उनसे माइक पकड़कर झूम-झूम कर गाने लगा-

‘बोलो ता रा रा ….’

टोनी कुछ देर तक जैसे धुन-लय पकड़ने की कोशिश करता दिखा, फिर झटके से मटक-मटक कर ‘टार्रा टार्रा ….’ बोलने लगा।

वरिष्ठ वैज्ञानिक मुस्कुराने लगे, कनिष्ठ वैज्ञानिक किंचित मखौल से उसका मटकना देखने लगे और महिला वैज्ञानिक तो इस अटपटे मनोरंजन के आवेग से हँसते-हँसते दोहरी हो गईं।

बलविंदर का गायन समाप्त होते ही वीणा को न जाने क्या सूझा कि उससे माइक लेकर टोनी को पकड़ाते हुए बोली-

‘नाऊ, अ सांग फ्रॉम अवर गुड गाइड टोनी …. अ सांग ह्विच मे बी हिज फेवरिट।’

बाकी वैज्ञानिकों ने उसके प्रस्ताव का समर्थन किया- ‘येऽस!’

टोनी ने एकदम से गंभीर मुख बना लिया, कई क्षण तो जैसे अपने से ही कुछ मंडारिन में बुड़बुड़ाता रहा और फिर धीरे से बोला- ‘इट इज वेरी पर्सनल, वेरी इमोशनल एंड इन मंडारिन… अवर गेस्ट्स फ्रॉम द लैंड ऑफ सकामोनी बूऽडा मे नॉट अप्रीशियेट…’

‘कम ऑन! नो एक्सक्यूजेज … कम ऑन!’

महिला वैज्ञानिकों ने उसे जोश दिलाने की कोशिश की।

बेचारगी में चारों ओर एक नजर मारते हुए वह अंतत: बोला- ‘ओऽके!… यू मे नॉट अंडरस्टैंड अ वर्ड ऑफ इट… बट, ओऽके!’

गुनगुनाने से शुरू हुआ टोनी का गायन शीघ्र ही एक कारुणिक-से लग रहे स्वर के आरोह-अवरोह में बदल गया जिसका एक शब्द भी समझ में न आने के बावजूद वैज्ञानिकों को उसके चेहरे पर छाया हुआ भाव ही बता दे रहा था कि यह गीत टोनी के हृदय के किसी बड़े संवेदनशील हिस्से से फूट रहा है।

गीत समाप्त होने पर वैज्ञानिकों ने तालियां बजाईं पर टोनी जैसे कुछ क्षण बुत-सा बना रहा। फिर जैसे अपने आप को संभालकर उसने सबको धन्यवाद दिया और कांप रही सी आवाज में कहा- ‘दिस वाज अ सांग फॉर माई सिस्टर, माई लांग लॉस्ट सिस्टर।’

सहानुभूति में चुप ही रह गए वैज्ञानिकों को तुरंत ही उसने संभल कर संबोधित किया- ‘बैक टु बिजनेस, लेडीज एंड जेंटलमेन। वी आर विदिन फाइव मिनट्स फ्रॉम सिन्चू।’

सिन्चू साइंस पार्क के बारे में नटराजन और रामनाथ जैसे वरिष्ठ वैज्ञानिकों को पहले से अच्छी जानकारी थी, पार्क के वैज्ञानिकों द्वारा ब्रीफिंग के दौरान वे कनिष्ठ वैज्ञानिकों को अपनी टिप्पणियों से समृद्ध करते रहे।

नैनो-टेक्नोलॉजी और स्टेम-सेल के क्षेत्रों में सिन्चू पार्क की उपलब्धियों को सुन-सुनकर कनिष्ठ वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हो गए। और ब्रीफिंग के दौरान जब पता चला कि सिन्चू साइंस पार्क में पेटेंट फाइल करने का औसत पांच पेटेंट प्रतिदिन का है तो वीणा आंखें गोल-गोल बनाकर रामनाथ से पूछ बैठी- ‘सच्ची… सर!’

रामनाथ ने सहमति में सिर हिलाकर धीरे से कहा-  ‘ताइवान पेटेंट फाइल करने के मामले में दुनिया के टॉप फाइव देशों में आता है… कल्पना करो, अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों के साथ!’

दोनों को अहसास नहीं था कि टोनी चुपचाप उनके पीछे वाली कतार में ही बैठा हुआ था। कुछ ही क्षणों बाद टोनी की धीमी-सी आवाज उनके कानों से टकराई-

‘दोज हू केम हियर इन 1949 फ्रॉम चाइनीज मेनलैंड वर द बेस्ट ऑफ चाइनीज टैलेन्ट इन एवरी रेसपेक्ट, एंड कंटिन्यू टु बी सो… दोज रफियंस आकुपाइंग द मेनलैंड नाऊ मे हैव मिसाइल्स एंड न्यूक्लियर बॉम्ब्स बट वी इन दिस स्मॉल आईलैंड हैव मच बेटर ब्रेन्स … मच मच बेटर ब्रेन्स…’

टोनी की टिप्पणी नटराजन के कानों में भी पड़ी, उन्होंने आंखों-आंखों में रामनाथ से जैसे कुछ कहा।

सिन्चू साइंस पार्क के दौरे में ताइवान की वैज्ञानिक-प्रौद्योगिक प्रगति की झलक से सुखद रूप से आश्चर्यचकित हो रखे युवा वैज्ञानिकों को आपस में उत्साह से बतियाते देखकर टोनी हल्के से मुस्कुरा दे रहा था। नटराजन और रामनाथ बीच-बीच में अपनी तरह से कनिष्ठ सहयोगियों की छोटी-मोटी जिज्ञासाओं का उत्तर देते चल रहे थे। पर जब सारे लोग वाहन के अंदर व्यवस्थित हो गए तो टोनी ने माइक थामकर उन्हें संबोधित किया-

‘ताइवान इज टू हैप्पी टु लेट फ्रेंड्स फ्रॉम द लैंड ऑफ सकामोनी बूऽडा हैव अ लुक एट इट्स साइंटिफिक एंड टेकनोलॉजिकल एडवांसमेंट… बट नाऊ, वी प्रोसीड टु द नेक्स्ट स्टेप आफ अवर कल्चरल टुअर…. द फेमस ताओ टेंपल ऑफ सिन्चू।’

ताओ के बारे में महिला वैज्ञानिकों ने जिज्ञासा प्रकट की नहीं कि टोनी ने ताओ दर्शन का सूत्र ही समझाना शुरू कर दिया। सुनते-सुनते नटराजन ने धीरे से रामनाथ से कहा- ‘मानना पड़ेगा कि आदमी काबिल है।’

ताओ मंदिर छोटा-सा ही था पर प्रार्थना के लिए एकत्रित ताइवानी एकाग्र होकर जो प्रार्थना गुनगुना रहे थे उसकी ध्वनि-तरंगें कानों को मनोहारी लग रही थीं। दढ़ियल देव की प्रतिमा सामने थी और उसके ठीक पीछे देवी की प्रतिमा थी, जिनके बारे में जिज्ञासा प्रकट करते ही टोनी ने स्पष्ट किया वे पति-पत्नी हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को प्रतिमा के सामने उछाले गए काठ के टुकड़ों के सीधा या उल्टा गिरने के माध्यम से पूरी होने या न होने का संकेत मिलता है।

‘यहां तो कोई टुकड़ा नहीं उछल रहा!’

वीणा के इतना कहते ही टोनी ने समझकर स्पष्ट किया – ‘प्लीज वेट फॉर द प्रेयर टु कान्क्लूड।’

‘पूरा अंतर्यामी है…’ नटराजन की गर्दन अपनी ओर मुड़ते ही बलविंदर ने वाक्य अधूरा छोड़ दिया।

प्रार्थना समाप्त होते ही वाकई लोग एक-एक कर देव-प्रतिमा के सामने झुककर कुछ बुदबुदाते हुए काठ के टुकड़े दाएं-बाएं उछालने लगे और फिर उनके गिरने की स्थिति देख-देखकर खुश होते या मुंह लटकाते रहे।

वैज्ञानिक यह सब कार्यकलाप बड़े कौतूहल से देखते जा रहे थे। सबकुछ गौर से देखता हुआ बलविंदर बड़बड़ाया- ‘मन्नतां अरज, गुहार… ओत्थे वी, एत्थे वी।’

तभी टोनी आहिस्ते से बोला- ‘टाइम टु कॉन्क्लूड दिस फेज ऑफ कल्चरल टुअर।’

आज के दिन का कार्यक्रम समाप्त हो जाने पर होटल पहुंचते ही टोनी ने सबको संबोधित किया- ‘सो, वी मीट अगेन टुमोरो मॉर्निंग। एंड आई होप दिस होटल हैज गिवन यू फ्रेंड्स नो कॉज ऑफ कंप्लेंट ऑन प्योर वेजिटेरियन फूड।’

विशेषकर महिला-वैज्ञानिकों ने शाकाहारी भोजन के लिए ही नहीं, उसकी गुणवत्ता के लिए भी टोनी को धन्यवाद दिया।

दरअसल, होटल के कर्मचारियों ने पूरे धैर्य से न सिर्फ शुद्ध शाकाहारी भोजन की उपलब्धि उनके लिए सुनिश्चित कर रखी थी, उनके रसोइए दुभाषिए की मदद लेकर उन्हें हर व्यंजन के घटक तथा पाक-विधि भी बता जाते थे।

अपने-अपने कमरे की ओर मुड़ने से पहले वीणा ने रीता से अभी तक तो हमारा टुअर बड़ा अच्छा चल रहा है कहा नहीं कि इसे सुनकर बलविंदर बोल पड़ा- ‘अग्गे वी चलेगा जी, साड्डा बूऽडा जो साथ है।’

पर उसकी टिप्पणी पर कोई भी नहीं हँसा।

अब तक के ‘साइंटिफिक टुअर’ से परम प्रभावित हो चुकीं वीणा और रीता ने नटराजन से अनुरोध किया कि दूसरे दिन के कार्यक्रम में कुछ गुंजाइश निकाल कर ताइपेई के किसी माने-जाने मॉल से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कुछ खरीदारी की जाए।

इसे सुनकर नटराजन ने टोनी से बात करने की जिम्मेदारी रामनाथ को सौंप दी।

‘टू हैप्पी टु अकोमोडेट दिस… टू हैप्पी’

टोनी के फोन पर मिले आश्वासन के बाद सबको थोड़े से संशोधित कार्यक्रम के बारे में बता दिया गया।

जिस विशालकाय मॉल के सामने वैज्ञानिक उतरे उसके विशाल प्रवेश द्वार के सिर पर मंडारिन में नामपट्ट जैसा कुछ अवस्थित था जिसके अक्षर ‘झक … झक’ चमके जा रहे थे।

‘द होल बिल्डिंग हैज ओनली शॉप्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक गुड्स। वन ऑफ द बिगेस्ट कलेक्शन इन वर्ल्ड।’

बोले जा रहे टोनी से, नामपट्ट की ओर इशारा कर, रामनाथ ने पूछा- ‘नेम?

‘रिकवर फॉ… हा, हा, हा!’

मॉल का नाम बताने के साथ इस तरह ठहाका लगाने पर वैज्ञानिकों को अपनी ओर आश्चर्य से देखते हुए नोटिस कर टोनी ने बमुश्किल हँसी रोकी और स्पष्ट किया- ‘फॉ मीन्स मेनलैंड चाइना। ह्वेनएवर दोज वन्स ऑकुपाइंग द मेनलैंड कम हियर टु वॉच अवर ग्रेट प्रोग्रेस इन इलेक्ट्रॉनिक्स, दे गेट अ शॉक टु सी दिस… हा! हा!’

वैज्ञानिकों ने अर्थभरी निगाहों से एक-दूसरे को देखा और टोनी के पीछे-पीछे उस इलेक्ट्रॉनिक महाबाजार में प्रवेश कर गए।

अंदर के कानफाड़ू संगीत के बीच एक-दूसरे से सलाह-मशविरा करते हुए युवा वैज्ञानिकों ने बड़े उत्साह से कैमरे इत्यादि खरीदना शुरू किया, टोनी ने उनका ज्ञानवर्धन भी किया कि यही ताइवानी उपकरण अमेरिका के बाजार में तीन गुने दाम पर मिलेगा।

खरीदारी से संतुष्ट युवा वैज्ञानिकों से होटल वापस पहुंचने के बाद नटराजन ने कहा- ‘रात का खाना सब साथ खाएंगे… कुछ बातें करनी हैं।’

रात्रि के भोजन में सबके मेज पर पहुंच जाने के बाद नटराजन ने थोड़े गंभीर अंदाज में कहा- ‘बात यह है कि हमारा गाइड टोनी कुछ ज्यादा ही पॉलिटिकल टिप्पणी करता रहता है, बल्कि इमोशन चार्ज्ड पॉलिटिकल टिप्पणी।’

‘वो तो है ही, सर जी! बंदा अपने को पॉलिटिकल साइंस का रिटायर्ड प्रोफेसर बताता है पर है पूरावक्ती पॉलिटिकल…’

बलविंदर का वाक्य बीच में ही काटते हुए नटराजन आगे बोले- ‘उसके व्यक्तित्व का विश्लेषण तो तमाम तरीकों से हो सकता है। और, दो दिन के दौरान हम उसे जान ही कितना पाए होंगे पर…’

और एक-एक बार सबके चेहरे पर नजर डालकर नटराजन दृढ़ता से बोले- ‘मैं जो बात करना चाहता हूँ वह है कि हमें किसी पॉलिटिकल टिप्पणी का न तो जवाब देना है, न अपने से कोई ऐसी टिप्पणी करनी है।’

‘मैंने तो नहीं…, कभी नहीं की…’

जैसे हवा में उड़े वाक्यों पर हाथ उठाते हुए नटराजन बोले- ‘मैं जानता हूँ कि आप में से किसी ने ऐसा नहीं किया। पर उसकी ऐसी टिप्पणियां कुछ ज्यादा ही होने लगीं तो मैंने और रामनाथ ने राय की कि एक बार सबको चेता देना ठीक होगा। आफिशियल टुअर में हमें बहुत सावधान रहना होता है।’

रामनाथ ने इसमें जोड़ा- ‘हां, हमें ताइवान के वैज्ञानिक-औद्योगिक विकास की एक झलक मिली और यही हमारे दौरे का उद्देश्य है। हमारी सरकार ‘वन चाइना’ पॉलिसी पर चलती है, आईलैंड-मेनलैंड के पचड़े से हमारा कोई लेना-देना नहीं।’

नटराजन और रामनाथ के निर्देशों को चुपचाप सुन लेने के बाद अपने-अपने कमरे की ओर बढ़ रहे युवा वैज्ञानिकों में से विपिन राहुल की ओर मुंह घुमाकर बोला- ‘मुझे तो टोनी सीधा ही आदमी लगता है।’

राहुल ने सहमति में मुंडी हिलाई तो बलविंदर ने बीच में टिप्पणी जड़ दी- ‘अजी! दो दिन और बचे हैं। फिर वो कहां और हम कहां!’

वैज्ञानिकों के दौरे के समापन में दक्षिणी ताइवान की ताइनान काउंटी में स्थित साइंस पार्क का भ्रमण प्रस्तावित था। रास्ते में टोनी समुद्री तूफानों से तथा उसके फलस्वरूप होने वाली अति वृष्टि से इस दक्षिणी हिस्से के सतत प्रभावित रहने और प्राकृतिक आपदा के मुकाबले के लिए ताइवान की वैज्ञानिक-प्रौद्योगिक तैयारी को उदाहरण सहित बताता रहा। कुछ वैज्ञानिकों ने रुचि लेकर प्रश्न पूछे तो उसने तकनीकी शब्दावली में भी खुलासा किया।

और, ताइनान साइंस पार्क में प्रवेश करते ही टोनी ने स्वागत के लिए पदाधिकारी से मंडारिन में कुछ कहकर दल को समुद्री तूफानों की मुसीबत से निपटने के लिए परिसर में बने पानी सामने वाले ताल और उच्चस्तर की जल-निकाषी की सुविधा का दीदार करवाया।

‘सही कहता है ये, ब्रेन भी है इनके पास और ब्रेन का उपयोग सही ढंग से कर अपने को बचाने की तमीज भी।’

बलविंदर राहुल की ओर मुंह कर फुसफुसाया।

‘एक्सेलेंट अरेंजमेंट फॉर एनी क्राइसिस!’

नटराजन ने जैसे दिल से निकली तारीफ के अंदाज में कहा।

भारतीय वैज्ञानिकों का पार्क के प्रोडक्शन-एरिया में घुसते ही स्वयं मुख्य प्रशासक द्वारा स्वागत किया गया। आप्टो इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के केंद्र इस साइंस पार्क द्वारा पिछले साल अठारह हजार करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य का कारोबार किए जाने की बात सुनकर युवा वैज्ञानिकों के चेहरे पर आश्चर्य छा गया। तथी नटराजन ने उनकी ओर मुंह घुमाकर धीरे से कहा-

‘साइंस पार्क का मॉडल ध्यान में रखो तो आश्चर्य नहीं होगा। शोध संस्थान, औद्योगिक यूनिट और क्लीयरेंस देने वाला सरकारी विभाग सब के सब एक ही परिसर में स्थित होते हैं। कहीं कोई बाधा नहीं, सफल शोध को मार्केबल प्रॉडक्ट तक पहुंचाने में न्यूनतम समय…’

ताइनान साइंस पार्क से बाहर निकलने के बाद सारे वैज्ञानिक वाहन में बैठ गए तो टोनी ने अपने खास अंदाज में माइक से उनको संबोधित किया-

‘सो दिस वाज द लास्ट पार्ट ऑफ योर टुअर फ्रॉम द एंगल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी। बट ताइनान हैज वन वेरी वेरी प्लेजेंट सरप्राइज फॉर यू।’

‘अब क्या सरप्राइज! पहले ही हम इनकी प्रॉग्रेस देख-देखकर अच्छे-अच्छे सरप्राइज्ड हो रखे हैं।’ बलविंदर राहुल की ओर मुंह घुमाकर बड़बड़ाया।

उसकी बड़बड़ाहट से बेखबर टोनी कहे जा रहा था- ‘सो प्लीज वेट फॉर द सरप्राइज!’ और उसने ड्राइवर को मंडारिन में कुछ निर्देश दिए। सिर्फ मंडारिन जाननेवाले ड्राइवर ने चेहरे पर चौड़ी मुस्कुराहट चिपकाए हुए गाड़ी स्टार्ट कर दी।

वैज्ञानिक लोग आंखें फाड़कर उस रेस्तरां के साइनबोर्ड को देखे जा रहे थे। मसाला इंडियन रेस्तरां सबसे पहले मंडारिन में, फिर देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी में और सबसे नीचे रोमन लिपि में लिखी गई अंग्रेजी में …

तभी छह-सात माह की गर्भवती लग रही एक ताइवानी महिला आई और सबको हाथ जोड़कर बोली- ‘नामाश्टे!’

मुस्कुरा रहे टोनी ने रेस्तरां की मालकिन के रूप में उसका परिचय वैज्ञानिकों से कराया और फिर मालिकन ने सबसे अंदर पधारने का आग्रह किया।

अंदर आश्चर्य का दूसरा संस्करण इंतजार कर रहा था।

‘नामाश्टे! नामाश्टे!’ करती हुई चार ताइवानी लड़कियां बाकायदा सलवार-कुर्ते में सज्जित आईं और मेहमानों को सादर बिठाया।

‘ओह टोनी, दिस इज अ रियल सरप्राइज। इट वाज सो नाइस ऑफ यू टु मेक सच अरेंजमेंट स्पेशली फॉर अस।’ वीणा एकदम से चहक उठी।

‘नो स्पेशल अरेंजमेंट! दिस इज एवरीडेज अफेयर हियर।’ जवाब रेस्तरां की मालकिन ने दिया।

सारे वैज्ञानिकों ने एक-दूसरे को देखा, फिर देखा भोज्य-पदार्थों की सूची को जिसमें सारे के सारे पदार्थ खालिस हिंदुस्तानी थे।

‘कैसे संभव है यहां?’ राहुल फुसफुसाया तो मालकिन ने चेहरे से ही आशय भांपकर बावर्ची को बुलवाया।

दिल्ली के लाजपत नगर के मूल निवासी रमेश मलहोत्रा ने पंजाबीनुमा हिंदी में सबका ज्ञानवर्धन किया कि यह रेस्तरां है ही शुद्ध शाकाहारी भारतीय व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध और इतवार को अच्छी-खासी संख्या में ग्राहक आते हैं।

एकदम हिंदुस्तानी तरीके से बनाए गए पालक-पनीर, तड़का दाल, रोटी, चावल, राजमा इत्यादि वैज्ञानिक लोग परम प्रसन्न होकर जीमने लगे। जब खाना समाप्त हो गया तो कांच के गिलासों में आई दूधवाली चाय।

और जब चाय भी पी ली गई तो कोने की मेज पर चुपचाप बैठकर सब देख रहा टोनी उठा और वैज्ञानिकों की मेज के पास आया।

वीणा चहकी- ‘थैंक्स अ लॉट फॉर दिस प्लेजेंट सरप्राइज! लांग लिव टोनी!’

टोनी ने मुस्कुरा कर टोपी हाथ में ली और हल्के से झुकते हुए बोला-

‘लांग लिव अवर टू ग्रेट सिविलिजेशंस। लांग लिव इंडिया-ताइवान फ्रेंडशिप!’

नटराजन की सारी हिदायतें भूलकर बलविंदर और राहुल ने नारा लगा दिया- ‘लांग लिव इंडिया-ताइवान फ्रेंडशिप!’

नटराजन और रामनाथ ने हिदायतों की इस अवहेलना को अनदेखा-अनसुना कर एक-दूसरे से आंखों-आंखों में कुछ कहते हुए बैग से बुद्ध की एक छोटी सी काष्ठ-प्रतिमा निकाली और रेस्तरां की मालकिन को भेंट करने के लिए उठे।

‘ओऽऽ! थैंक्स… थैंक्स अ लॉट!’

वह उपहार को कई कोण से निहार-निहारकर खुशी से जैसे उछल ही पड़ी।

और वापसी के लिए रेस्तरां से निकलते ही वैज्ञानिकों को मालकिन ने ही नहीं, सलवार-कुर्ते में सज्जित चारों ताइवानी लड़कियों ने भी बाकायदा बाहर आकर विदा किया।

चाइना एयरलाइंस के चेकिंग काउंटर पर टोनी मंडारिन में न जाने क्या मंत्र फूंक आया कि वैज्ञानिकों का वी.आई.पी. स्वागत करते हुए उन्हें एक-एक फूल भी थमा दिया गया।

सिक्योरिटी चेक के लिए जाने से पहले नटराजन अपने हैंडबैग की जिप खोले और बुद्ध की एक काष्ठ प्रतिमा निकालकर टोनी की ओर बढ़ा दिया – ‘अ स्मॉल गिफ्ट टु फ्रेंड टोनी, फ्राम ऑल ऑफ अस।’

टोनी की जैसे आंखें ही भर आईं। भरे से गले से बोला- ‘थैंक्स अ लॉट, थैंक्स अ लॉट! बिफोर आई डाई, वन डे आई विल कम टु सी द ग्रेट लैंड ऑफ सकामोनी बूऽडा।’

और फिर सबने विदा का हाथ हिला दिया।

वायुयान में नटराजन और रामनाथ अगल-बगल की सीट पर थे। टेक-ऑफ के करीब आधे घंटे बाद जब एयरहोस्टेस सब यात्रियों को नाश्ता-पानी कराने के बाद ट्रॉली ले जा चुकी थीं और अधिकांश यात्री झपकी या अर्धनिद्रा की मुद्रा में थे, रामनाथ ने नटराजन की ओर गर्दन मोड़कर कहा- ‘सही निपट गया यह टुअर!’

‘हां। अपने जूनियर्स तो काफी संतुष्ट दिख रहे हैं।’ नटराजन बोले।

‘दो मिनट बाद रामनाथ फिर बोले- ‘और अपना गाइड टोनी! बड़ा रोचक आदमी था।’

‘हां…!’ नटराजन ने जम्हाई के अंदाज में इतना कहकर, थोड़ा सोचकर जोड़ा- ‘कई मायनों में रोचक था। पर ट्रैजिक भी…’

‘क्यों?’

रामनाथ के प्रश्न के जवाब में नटराजन ने आहिस्ते से कहा- ‘उसकी सोच गुजरे हुए वक्त में अटक गई है, और शायद उसकी पूरी जिंदगी ही अटकी रहेगी।’

‘ओऽह!’ रामनाथ नटराजन की बात पर कुछ क्षण सोचने लगे। फिर बड़बड़ाए- ‘काफी हद तक वह बेचारा अतीत में अटका हुआ आदमी है।’

इसके बाद वैज्ञानिकों ने टोनी के बारे में कोई भी बात नहीं की।

 

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