
सुपरिचित कवि।साहित्य-संस्कृति की पत्रिका ‘आजकल’ के संपादक।प्रकाशित कविता संग्रह ‘रोजनामचा’, ‘इसी से बचा जीवन’।
नए मगध में
जाल में फँसेगी सबसे मासूम चिड़िया
चालाक लोमड़ी मदद करेगी बहेलिये की
हत्यारे पकड़ लेंगे राहगीर को चोर-चोर कहकर
पुलिस हत्यारों को शाबाशी देगी
फोटो खिंचवाएगी
किसी को शक्ल से पहचाना जाएगा
किसी को ख़ानपान से
किसी को दाढ़ी और ख़तने से
बपतिस्मा से पहचाने जाएंगे कई
कपड़ों के रंग से पहचाने जाएंगे
उन्हें घुसपैठिया और हत्यारा कहा जाएगा
गोकि बहुत चुस्त होगा नए मगध का राजकाज
फ़ौरन शिनाख्त होगा
पोस्टर लगाए जाएंगे कुर्क होंगे घर-जायदाद-दफ्तर
गोली मारी जाएगी चौराहे पर
अपराधी कोई हो बच न पाएगा
अपराध और अपराधी पहचानने का
तरीका बदल जाएगा
जानकार कहेंगे इसमें नया क्या है
यह तो मगध में हमेशा से होता आया है।
प्रतिरोध
कठिन होता है पहचानना चेहरा
प्रेम में डूबे आदमी का
उसका चेहरा उसका नहीं रह जाता
आदतें, उसकी नहीं
सबसे बड़ी बात, बदल जाती है सोच
वह आईना बन जाता है प्रियतम का
प्रेम सब कुछ बदल देता है
प्रेम सब-कुछ बदल देता है
दिमाग में जा बैठता है, जेहन में
आत्मा से एका बैठाता, बदलता वजूद
इसलिए सोचो-
गीदड़ से प्यार करोगे, गीदड़ बन जाओगे
सांप से प्यार करोगे, सांप बन सकते हो
भेड़िये से प्यार तुम्हें भेड़िये-सा खूंखार बना देगा
कायर का साथ कायर बना सकता है
दिलेर का प्यार, दिलेर
इसलिए प्रेम करो पर सावधानी से
सोचो तुम किसे प्यार कर रहे हो
क्योंकि प्रेम में डूबा आदमी
आईना है प्रियतम का
प्रेम हर हाल में मुक्त करता है और
बनाता निर्भीक
इतना कि बंधन सब ढीले पड़ जाएं
दीवारें अड़अड़ा कर ढह जाएं
इतना हल्का बनाता कि उड़ सको मनचाही उड़ान
इतना तनु कि कुछ भी घुल सके तुममें
तुम समा सको कहीं भी
आजाद होना चाहते हो तो प्रेम करो
नफरतें मिटाने के लिए प्रेम करो
प्रेम करो बंधनों को तोड़ने के लिए
दीवारें ढहाने के लिए प्रेम करो
हर विभाजन के खिलाफ प्रेम करो
जुल्मतें मिटाने के लिए प्रेम करो
दुःशासन हटाने के लिए प्रेम करो।
संपर्क : बी 339, केंद्रीय विहार, सेक्टर 51, नोएडा–201301 मो.9868855425


एक कवि दर्शन, इतिहास और राजनीतिक बोध के साथ ही जब समाज,इसके बदलते स्वरूप एवं समसामयिक विश्व के ऊपर अपनी पैनी नजर रखता है, तो उसकी रचनाओं का संसार व्यापक हो जाता है! ‘नए मगध में’ रेणु ने काफी खूबसूरत शैली में वर्तमान समाज व इसके बदलते स्वरूप को किसी शफ्फाफ दर्पण के समानांतर खड़ा करने का प्रयास किया है। इतिहास के पृष्ठों पर जमी धूल और कोहरे में ढकने वाले भविष्य, दोनों ही पीड़ा को सहेजते हुए,नवीन कल्पनाओं को जागृत करने का इसे एक सफल प्रयोग कहा जा सकता है! रेणु में जिस प्रकार जटिल तथ्यों को भी सरलता से प्रस्तुत करने का कौशल दीखता है,अद्भुत है!
इस बेहतरीन कविता की प्रस्तुति के लिए वागर्थ का आभार! राकेश कुमार रेणु जी को हार्दिक बधाई!!