गूँजती रहती है प्रतिध्वनिकविता संग्रह एवं भोर की किरणनवगीत संग्रह के साथसाथ बालसाहित्य की 8 पुस्तकें। संप्रति : स्वतंत्र लेखन।

दर्प में डूबी आत्माएं

एक साथ भीतर
बहुत-कुछ टूट जाता है
जब आवाज़ आती है कहीं
किसी बच्चे के सुबकने की
वह झरना जो बह रहा होता है
मीठे जल के साथ
सूख जाता है
पृथ्वी जो घूम रही होती है
अपनी धुरी पर
भूल जाती है कुछ देर के लिए घूमना
काँपने लगती है उसकी देह
पूछती है वह
आकाश में टिमटिमाते तारों से
क्या ज़रूरी है तुम्हारा इस तरह से चमकना
निरुत्तर हो जाते हैं तारे
बहुत सारे प्रश्न घूमने लगते हैं ब्रह्मांड में
कोई समझता क्यों नहीं
कि तितलियों की खिलखिलाहट के सामने
कभी कोई अर्थ नहीं रखतीं
दर्प में डूबी हुई आत्माएं।

लौट आया घर

हत्यारे ने आज नहीं की कोई हत्या
रात-भर वह भटकता रहा
इधर-से-उधर बस्ती में
खंभों पर लगे लैंपपोस्ट
जल रहे थे
ऐसे ही एक लैंपपोस्ट के नीचे
खड़े होकर उसने देखा
अपना चेहरा औरों की तरह ही
दिख रहा था
वह भी उसकी समझ में
नहीं आ रहा था
किसकी गर्दन पर रखे अपना चाकू
सुबह हो चली थी
वह लौट आया अपने घर।

संपर्क :विद्यापुर वार्ड, निकट जी.आई.सी., रानीखेत रोड, द्वाराहाट, अल्मोड़ा, उत्तराखंड-263653 मो.9639373737