युवा कवि। विभिन्न पत्र–पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। संप्रति कलकत्ता विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के अध्यक्ष।
यकीन
मैंने नैनीताल की प्राकृतिक छटा देखी
बहुत खुश हुआ, ऊपर वाले की कला पर
दूसरी बार ताजमहल देखा
तो और खुश हुआ लोगों के हुनर पर
तीसरी बार तब खुश हुआ
जब एक बच्ची को देखा
सड़क पर फेंके फूल से गुलदस्ता बनाकर
बेचते हुए
वह बोल रही थी
इसे मैंने बनाया है, खरीद लीजिए साहब
भगवान भला करेगा
जिस मुल्क का बच्चा
मेहनत करना जानता है
वह सब कुछ कर सकता है
इस तरह
जिंदगी पर यकीन पुख्ता हो गया।
बयान
मैं दिन-रात सुबह-शाम
उठते-बैठते जागते-सोते
हँसते-खेलते नाचते-गाते
खाते-पीते हर घड़ी
हर पल
कविता लिखना चाहता हूँ
मुझमें इतनी आग है
इतनी तड़प है
वास्तव में मैं गवाही देना चाहता हूँ
मैं बयान दर्ज कराना चाहता हूँ जल्दी-जल्दी
मेरे पास अपराधियों की लंबी फेहरिस्त है
लिख दूं जल्दी
मेरे पास वक्त बहुत कम है
मैं मार दिया जाऊंगा!
संपर्क कलकत्ता विश्वविद्यालय शिक्षक क्वार्टर, के डी–7, पी–1/7 सीआईटी रोड स्कीम तखख एम, कंकुरगाछी, कोलकाता–700054 मो. 9800936139