सिडनी, ऑस्ट्रेलिया की प्रवासी कथाकार और कवयित्री। कहानी और कविताओं की बारह पुस्तकें। ऑस्ट्रेलिया के लेखकों के पांच संकलनों का संपादन, जिनमें दो काव्य संग्रह और तीन कहानी संग्रह सम्मिलित। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान तथा अन्य अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित।

लोग अक्सर कहते हैं कि हर बच्चे के पैदा होने की कोई वजह होती है और उसका अपना एक अस्तित्व होता है। मैं भी यही मानता था – जब तक मुझे पता नहीं चला कि मैं हूँ, पर नहीं हूँ।  मेरा अपना अस्तित्व नहीं है। अरे-अरे मुझे नाजायज औलाद न कहिए। मैं किसी के पाप की निशानी नहीं हूँ और न ही किसी के बलात्कार का परिणाम हूँ। मेरे माता और पिता दोनों हैं। बस उन्होंने मुझे स्वीकार नहीं किया तो क्या हुआ? वे एक-दूसरे को नहीं जानते तो कोई बात नहीं।  नहीं भाई, मेरी मां कोई प्रोस्टीट्यूट नहीं है। मां और पिता दोनों अच्छी जॉब कर रहे हैं, खाते-पीते समृद्ध घर के हैं।  वे तो लोगों की मदद करना चाहते थे और मैं  झूठ के सहारे दुनिया में आ गया। जी नहीं, मैं या मेरे माता-पिता ने झूठ नहीं बोले। मैं सिर्फ एक गलती का परिणाम हूँ।

मेरा नाम स्टीव है। मुझे याद है तब मैं दो साल का था। मेरी उम्र के ज्यादातर बच्चे इतराते हुए किसी प्रैम या स्ट्रॉलर में सवार अपने माता-पिता के संग बाजार घूमते हैं या नए-नए खिलौनों से खेलते हैं या फिर झूले पर बैठे झूलते हैं। यानी कि दुनिया एक्स्प्लोर करते हैं। और मैं… मैं अपने अस्तित्व की तलाश कर रहा हूँ। अपनी सफाई दे रहा हूँ। मुझे इस बात की चिंता है कि आगे कौन-सा अजनबी मुझे पालने के लिए मजबूर हो सकता है।

सच ये है कि मेरा जन्म बस एक गलती की वजह से हुआ। ‘बस एक छोटी-सी गलती’। इस ‘बस’ शब्द पर मैं हँसूं या रोऊं समझ नहीं आता। उनकी नजरों में यह एक छोटी-सी टाइपिंग मिस्टेक थी, फर्टिलिटी क्लिनिक में एक ‘अनफॉरट्यूनेट मिस्टेक’। नहीं…नहीं… आप गलत समझ रहे हैं। इसमें मेरे माता-पिता की कोई गलती नहीं थी।

दरअसल जब आपको बताऊंगा तो आप खुद उलझ जाएंगे। असल में मेरे माता-पिता मेरे माता-पिता नहीं हैं। मेरी मां ने मुझे कभी गोदी में नहीं उठाया। जब मैं रोता था तो मेरे पिताजी ने मुझे कभी अपनी बाहों में नहीं लिया। क्योंकि वास्तव में वे मेरे मां या पिता नहीं हैं। मैं मिसमैच ट्यूब, गलत लेबल और दो परिवारों की जरूरत पूरी करने के लिए जन्मी औलाद हूँ। और इसमें सबसे बड़ी गलती थी लैब असिस्टेंट की या उस नर्स की, जिसने कुछ नहीं सोचा। शायद शराब के नशे में या नींद में झूम रहा हो। उसने गलत मिक्स अप किया और मेरे जन्म के बीज बो दिए। पहले मुझसे नहीं पूछा और बाद में मुझे अपनी हालत पर छोड़ने को बेचैन हो गए।

आइए, मेरे पास बैठिए। मैं आपको शुरू से बताता हूँ कि असली कहानी क्या है? जिसे कोई खुलकर नहीं बताता क्योंकि सबकुछ गड़बड़ है।

दरअसल इसकी शुरुआत स्टार फर्टिलिटी सेंटर से हुई थी। यह बहुत प्रसिद्ध और महंगा सेंटर था और निःसंतान दंपतियों के लिए वरदान था।  इसे 100% संतुष्टि दर के लिए जाना जाता था। यह मेरे पैदा होने के पहले की बात है।

सुबह के लगभग नौ बजे होंगे, जब बच्चे की चाहत में बेताब एक कपल (जोड़ा) सेंटर में आया। एक अमीर, सुंदर, दंपति जिनके पास सब कुछ था। अच्छी नौकरी, घर मकान, बढ़िया कार पर वो नहीं था जिसकी उन्हें चाहत थी।  यानी मैं। मेरा मतलब है मेरे जैसा एक सुंदर, हृष्ट पुष्ट, खुशमिजाज बच्चा। वे ऐसे बच्चे के लिए बेताब जरूर थे पर उसे वे खुद पैदा करने में अक्षम थे।

फर्टिलिटी सेंटर में आर्थिक रूप से संघर्षरत या दूसरों की मदद के लिए आतुर युवा पैसे के लिए स्पर्म और एग्स डोनेट करते हैं। अब डोनेशन के लिए दोनों जेंडर के बहुत सारे लोग आते हैं, पर विदेश में सबकुछ ठीक से रखा जाता है। रिकॉर्ड प्रॉपर ढंग से फाइलों में दर्ज किया जाता है।  ऐसी भूल होना असंभव है। पर किसी ने फाइलों में कुछ गड़बड़ी कर दी। स्मिथ दंपति द्वारा चुने गए डोनर स्पर्म और एग का उपयोग करने के बजाय, उन्होंने डोनर युवक जैक और युवती लिली के एग्स यानी अंडों का उपयोग कर दिया। इसलिए, आनुवंशिक रूप से, मैं उनका बच्चा हूँ। पर रुकिए, लिली और जैक दोनों आपस में रिलेटेड नहीं हैं। वे एक दूसरे को बिलकुल नहीं जानते।

उन्हें जब तक अपनी गलती का पता लगा तब तक मैं अस्तित्व में आ चुका था। ऐसी मां के गर्भ में, जो मेरी मां नहीं थी। जो मुझे चाहती ही नहीं थी। यानी स्मिथ दंपति को कोई और बच्चा नहीं चाहिए था। और न ही मेरे पिता जैक और मां लिली को। उन्होंने तो किसी निःसंतान दंपति की मदद के लिए स्पर्म और एग डोनेट किए थे।

जब मैं मिसेज स्मिथ के गर्भ में गया, तो स्मिथ दंपति को पता नहीं था कि मैं उनका अंश नहीं हूँ। और उन्होंने मेरी अच्छी देखभाल की। वह तो मेरे पैदा होने का जश्न मना रहे थे। जब स्मिथ दंपति ने अपने बचे हुए एग्स किसी अन्य क्लिनिक में भेज देने की बात की, तो पता लगा मेरी उस वक्त की मां यानी कैली के सारे के सारे एग्स (अंडे) वैसे के वैसे हैं। यानी उसमें से एक का भी इस्तेमाल नहीं हुआ।

अब प्रश्न उठा कि मैं किसके एग्स से बना? और फिर मेरे असली माता-पिता की तलाश जारी हुई। डी एन ए टेस्ट से पता लगा कि मेरा पिता जैक है, यानी मेरी पैदाइश में उसके स्पर्म का इस्तेमाल किया गया था। जैक मस्त मौला, हैंडसम युवक- एक अच्छे परिवार से है। पर अपनी जिंदगी में बहुत व्यस्त है। और उसे कैली की जगह लिली के एग्स से मिला दिया गया और अब मेरी बायोलॉजिकल मां को जब मेरे अनचाहे जन्म के बारे में बताया गया तो वह भी मेरी जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती थी।

सबके मुंह में यही प्रश्न था आखिर ऐसा कैसे हो सकता है?

मिस्टर स्मिथ ने एजेंसी के विरुद्ध कोर्ट में केस किया। मेरे माता-पिता जैक और लिली ने भी कहा कि उन्हें अभी बच्चा नहीं चाहिए था। और मैं? मेरी तो कोई चॉइस ही नहीं थी।

उन सबने मुझे देखा, भ्रमित। मैं सभी का मिक्सचर था यानी मिला जुला रूप।  मेरी आंखें नीली नहीं, बल्कि गहरे भूरे रंग की थीं। मेरी त्वचा का रंग गोरा नहीं पीला था। जब सच्चाई सामने आई तब मैं कहीं का नहीं रहा। अब मेरा क्या होता? मैं कहां जाता?

मुझे एक मां चाहिए थी। एक पिता के प्यार की जरूरत थी। अपनाना तो दूर, सब फर्टिलिटी क्लिनिक पर केस ठोके बैठे थे। सब अपनी जिम्मेदारी से बच रहे थे। सबको पैसा चाहिए था। जब मैं किसी परिवार का था ही नहीं तो मुझे कौन अपनाता? पर सबको अपनी पड़ी थी। मेरा दुख कोई समझना नहीं चाहता था। दो बाप और दो मांओं के होते हुए भी मैं अनाथ था।

उसके बाद मुझे समझ में आया कि मुझे कोई भी रखना नहीं चाहता था। मुझे बस याद है- तेज आवाजें, लड़ाई बहस, कोर्ट रूम, एंटीसेप्टिक की गंध। एक बार कैली मुझे गोद में लेकर खूब रोई। मुझे अपनी बांहों में लेकर फुसफुसाते हुए कहा कि मैं बहुत अच्छा हूँ पर मैं उसकी जिम्मेदारी नहीं हूँ। उसे अपना बच्चा चाहिए था। अपने एग्स और उसके पसंदीदा स्पर्म से पैदा। जैक ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं कोई उसके लिए गणित की एक ऐसी समस्या हूँ, जिसे वह हल नहीं कर सकता। लिली ने तो पहले ही हाथ झाड़ लिए थे।

स्मिथ दंपत्ति को भी इसमें घसीटा गया। मैं उनसे अनेक बार कोर्ट हाउस के गलियारे में मिला।

उन चारों में से कोई भी मुझे अपनाना नहीं चाहता था। इसलिए, मैं एक केस नंबर बन गया था। एक कानूनी विसंगति। विज्ञान, कानून और त्रुटि से पैदा हुआ एक बच्चा। और अंत में मुझे फोस्टर केयर भेज दिया गया।

जब तक मैं दो साल का हुआ, तब तक मैं तीन घरों में रह चुका था। हर एक घर पिछले घर से ज्यादा अस्थायी लगता था। अधिकतर लोगों को मैं पसंद आता था एक जिज्ञासु बच्चा, शांत बच्चा लेकिन मेरी सच्चाई ने उन्हें डरा दिया था।

एक दोपहर जब बरसात हो रही थी, मुझे मिसेज ब्राउन  के फोस्टर केयर में भेज दिया गया।  वह एक बुजुर्ग महिला थीं, जिसमें लैवेंडर की महक आती थी। मैं देखते ही समझ गया कि वह एक दयालु महिला थीं, लेकिन वे जिंदगी से  इतनी थकी दिखाई देती थीं कि मुझे लगता था कि वे मुझे ज्यादा समय तक नहीं रख सकेंगी।

मेरे साथ उनके पास एक फाइल भी आई थी, जिसके अंदर कोर्ट के दस्तावेज, मेडिकल रिकार्ड्स और फोटो थीं। यह जरूर जैक और लिली की रही होंगी। उस दिन, जिस दिन मेरा मिश्रण किया गया था, लैब से बाहर निकलती हुई एक नर्स की सुरक्षा तस्वीर भी उसमें थी। फोटो के किनारे पर उसका नाम लिखा था- लॉरा डेविस।

नहीं पता क्यों, लेकिन जब मैंने उसका चेहरा देखा तो मुझे महसूस हुआ कि वह युवा नर्स, डरी हुई लग रही थी। जैसे उसने जो किया, उसका इरादा नहीं था। या शायद उसे पता ही नहीं था कि उसने क्या किया है।

अब मैं दस साल का हो गया हूँ। स्कूल जाता हूँ, पढ़ाई करता हूँ और मिसेज ब्राउन की मदद भी कर देता हूँ। आश्चर्य तो तब हुआ जब एक दिन लॉरा डेविस मुझे ढूंढते हुए मिसेज ब्राउन के पास पहुंची।

उसने मिसेज ब्राउन से अकेले में न जाने क्या बात की। मिसेज ब्राउन ने मुझसे प्यार से कहा कहा- ‘स्टीव, लॉरा को कोर्ट ने आर्डर दिया है वह तुम्हें अपने साथ ले जाए।’

‘पर मुझे उस महिला के साथ नहीं जाना जिसने मेरी लाइफ बर्बाद कर दी।’ मैंने नफरत और गुस्से से जवाब दिया।

‘पर यह शहर छोटा है, मेरे पास तुम्हें पढ़ाने के लिए उतना पैसा भी नहीं है।’

मुझे नहीं पढ़ना। मैं आपके साथ रहकर खुश हूँ।’

‘वह एक अच्छी महिला है। अच्छा, चलो थोड़े दिन के लिए जाकर देखो। और कोर्ट के ऑर्डर्स तो मानने ही पड़ेंगे। मैं भी आती-जाती रहूंगी वहां।’

मिसेज ब्राउन ने मुझे मना लिया। मेरे सामान के साथ एक बार फिर मैं नए घर के लिए निकल पड़ा।

अब मैं लॉरा के साथ रहने लगा। उसने मुझे अपने घर में कमरा दिया, गर्म खाना दिया और मुझसे बोली- ‘मुझे पता है कि तुम अपने मिसमैच जन्म के लिए मुझे जिम्मेदार मानते हो। पर सच तो ये है कि इसमें मेरी कोई गलती नहीं है।’

‘तो इसका जिम्मेदार कौन है?’

‘डॉ. नेल्सन…, दरअसल यह डॉ. नेल्सन की गलती है।’

‘तो आप…?’

‘सच तो यह है कि मैंने वही किया जो डॉ. नेल्सन ने कहा।’

‘ओह, तो सच मायने में डॉ नेल्सन मेरे पिता हैं। जिन्होंने मुझे इस दुनिया में लाकर अनाथ बना दिया।’

‘हां, उन्हें ही असली मायने में तुम्हारा जनक माना जा सकता है।’ वह धीरे से बोली।

एक दिन मैंने पूछा, ‘क्या आपको लगता है कि डॉ. नेल्सन अभी भी वहां काम करते हैं?’

लॉरा ने इंकार में अपना सिर हिलाया।

‘लोगों की नजर में डॉ. नेल्सन कोर्ट केस के बाद गायब हो गए। लोग सोचते हैं कि वे विदेश चले गए। लेकिन मुझे पता है कि वे कहीं नहीं गए हैं। और उन्हीं के कहने से मैंने तुम्हें अडॉप्ट किया है।’

‘तो डॉ. नेल्सन कहां हैं?’ मैंने पूछा।

‘डॉ. नेल्सन अब एक अलग – डॉ. पीटर लव उपनाम से एक निजी क्लिनिक चलाते हैं। वे एक दिन तुमसे मिलने आएंगे।’

‘नहीं… पर मैं उनसे कभी नहीं मिलूंगा। उन्हें इस तरह मुझे जन्म देने का हक बिलकुल नहीं था। अगर वे मेरे जनक हैं तो इस पर उन्हें शर्म आनी चाहिए। उन्होंने मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी। मैं उनसे मिलना तो दूर उनकी शकल भी देखना पसंद नहीं करूंगा।’ कहते-कहते मैं रोने लगा।

लॉरा ने मुझे समझाया, ‘डॉ. नेल्सन को अपनी गलती का एहसास हो गया है। उन्होंने तुम्हें अपनाने का फैसला किया है। क्या तुम मेरे साथ उनके घर में रहना चाहोगे? वे हमसे मिलने आते जाते रहेंगे।’

लॉरा मेरे बालों को सहला रही थी। उसने मुझे पानी का गिलास और टिशू थमाए।

‘देखो, तुम्हें अपने डैड मिल जाएंगे। तुम्हारे असली जनक। जिन्होंने तुम्हें एग्स और स्पर्म मिलाकर बनाया, चाहे गलती से ही। तुम्हें रूप दिया, रंग दिया, जिंदगी दी। वे तुम्हें अपना नाम देंगे, पढ़ाई-लिखाई का खर्चा उठाएंगे और तुम्हें वे सारी सुख सुविधाएं देंगे जो तुम्हारे असली डैड तुमको देते।’

मुझे लगा शायद लॉरा ठीक कह रही है।

आखिरकार मैं अपने असली डैड से मुलाकात कर पाऊंगा।

दो दिन बाद लॉरा ने फिर पूछा, ‘क्या तुम उन्हें देखने को तैयार हो?’

‘किसे? डैड को? अभी?’ मैं आश्चर्य करता हूँ।

जाने क्यों मेरे मुंह से ‘डैड’ निकला।

‘हां, वे अभी पांच मिनट में तुमको वीडियो कॉल करेंगे। चलो अच्छी तरह तैयार हो जाओ।’

मैं बहुत उत्सुक हूँ। मेरे इंतजार की घड़ियां बहुत मुश्किल से कट रही हैं। आज मुझे मेरे असली डैड मिल जाएंगे, जो मुझे प्यार से अपनाएंगे। पांच मिनट कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। हम स्टडी रूम के अंदर जाते हैं और लॉरा कोने में रखे कंप्यूटर को ऑन कर देती है।

लॉरा जूम कॉल लगाती है-

‘हलो स्टीव! मैं तुम्हारा पिता, डॉ नेल्सन।’

‘ड… डै… डैड’ मेरे मुंह से निकलता है। और मैं उन्हें अपलक देखता रह जाता हूँ। आखिर मुझे मेरे डैड मिल ही गए।

पहली बार मुझे लगने लगा है कि मेरा अस्तित्व है। और देखिए न, मैं अपनी कहानी आप सबको बता रहा हूँ।

 

संपर्क : 1, लेघ प्लेस, वेस्ट पेनांट हिल्स, एनएसडब्ल्यू 2125  ऑस्ट्रेलिया/ ईमेल – rekha_rajvanshi@yahoo.com.au