कविता संग्रह- ‘चिड़ियों ने आत्महत्या नहीं की’।

रोटियाँ

उसे भूख लगी है
और उसके पास
रोटी नहीं है

उसके पास रोटी नहीं है
तो उसे भूख क्यों लगी?

इसके लिए किसी अदालत में
भूख पर
मुकदमा भी ठोंका नहीं जा सकता है

सरकार रोटियाँ बांट रही है
लेकिन भूखों की कतार में
सबसे आगे वे लोग भी खड़े थे
जो भूखे ही नहीं हैं
और जिनके पेट पहले से ही भरे हुए हैं
इसलिए भूखे तक पहुंचते-पहुंचते
रोटियाँ खत्म हो जाती हैं

भूखे अब भी भूखे हैं
और जिनके पेट भरे हुए हैं
रोटियाँ उनके पास हैं।

चाँद

उसने कहा मुझे चाँद पर जाना है
धरती अब रहने लायक नहीं रही

बाकी ने भी यही दोहराया
चाँद कब तक चाँद रहेगा?
यह पूछने का साहस नहीं जुटा सका।

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