रुमी लस्कर ब’रा
असमिया की सुपरिचित कवयित्री, कथाकार, अनुवादिका, स्तंभ लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता। तीन कविता संग्रह, ग्यारह उपन्यास, तीन कहानी संग्रह, एक जीवनी तथा हिंदी एवं बांग्ला से असमिया में पांच पुस्तकों का अनुवाद।
देवेंद्र कुमार देवेश
हिंदी कवि, आलोचक, अनुवादक और संपादक। डेढ़ दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित जिनमें मौलिक, संपादित और असमिया, बांग्ला एवं अंग्रेजी से अनूदित पुस्तकें शामिल। संप्रति साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली में उप सचिव।

 

समय

समय…
थोड़ी देर ठहरो
पूर्ण कर लूं अपनी शून्यता
मेरी चांदनी के देश का जयंती समारोह
जहां नाच रही है, गा रही है
खेल रही है, घूम रही है
बॉबी प्रिंट फ्रॉक पहने हुए
वह कौन है, कौन है वह?

मैं स्वयं को पहचान लूं
देख लूं अच्छी तरह से
ठहरो जरा
समय…
फिर एक बार
बन जाऊं किशोरी
धीरे-धीरे बढ़ते हुए
सुगठित गर्भ से जन्म देना चाहती हूँ
शक्तिमान सूर्य को
जिसके वीर्य से सिक्त होगी
शुष्क मरुभूमि

समय…
दादी मां की गोद की गर्माहट
और नीति कथा की स्वर्ण परी
जिसके हाथ में थी जादू की छड़ी
पलक झपकते जो कर देती राक्षसों का संहार
कहां है ऐसी शक्ति का उत्स?
समय…
पूछना ही नहीं हुआ
समय…
दो मुझे थोड़ा-सा समय
जिसकी गोद में सर रखकर
सुन सकूं फिर एक बार
शैशव की वही सुरीली लोरियां…
जी भरकर देख लूं एक बार
छूटा हुआ अपना वह गांव
जहां गूंथा हुआ है मेरा जीवंत बचपन
वही गांव, वही नदी, वही खेत
वही भोली-भाली सखियां
तुम्हारे हृदय में ही सिमटा हुआ है
समय…
कितना हाहाकार?
तभी तो
रहते हुए भी कहीं
तुमने फैला दी दलीचे पर
छोड़ कर आए हुए दिनों की गहरी सांसें
दुर्दांत, दूरंत, तीव्रगामी घोड़े दौड़ते हैं
आगे… और आगे…
उसकी पीठ पर बैठकर
देख नहीं पाती मुड़कर पीछे
इस यात्रा की
टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं
समय, तुम्हारे ही हाथों से खींची गई हैं

मेरी चांदनी के देश का जयंती समारोह
रख नहीं सकती
पकड़ कर नहीं रख सकती
अपनी अदम्य इच्छाएं
समय…
मन को कर नहीं सकती वश में
तुम्हारे ही साथ करना चाहती हूँ विश्व-विजय
गढ़ना चाहती हूँ मजबूत आलय।

संपर्क :
रुमी लस्कर ब’रा : मकान सं. 30, निबिड़ालय, प्रोटेक्ट पर्ल के नजदीक, त्रिवेणी पथ, सुरुजनगर, सिक्स माइल, गुवाहाटी, असम 781022, मो. 8638308794

देवेंद्र कुमार देवेश: फ्लैट नं. ए 1106, ऑफिसर सिटी-1, राजनगर एक्सटेंशन, गाजियाबाद 201017 (उ.प्र.), मो. 9868456153