भारतीय भाषा परिषद और महानगर के नाट्यदल रंगशिल्पी के संयुक्त तत्वावधान में रंग-यात्रा, रंग-अड्डा और रंगशिल्पी सम्मान का एक आयोजन परिषद सभाकक्ष में विगत 23 अगस्त को किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ रंगशिल्पी नाट्य दल के 22वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में दीप प्रज्वलित करके हुआ।
मौके पर परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ ने रंगशिल्पी के समस्त सदस्यों को नाट्य दल के इस जन्मोत्सव की बधाइयां और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि इसके एक-दो सदस्यों को छोड़कर ज्यादातर कलाकार बांग्लाभाषी हैं, फिर भी इस दल ने अपनी अधिकतर नाट्य प्रस्तुतियां हिंदी में दी हैं। परिषद प्रबंधन की वरिष्ठ सदस्या बिमला पोद्दार ने रंगशिल्पी के काम की सराहना की और इससे संबद्ध कलाकारों को अपने आशीर्वचन दिए।
‘रंग-अड्डा’ के तहत फिल्म निर्देशक श्री सुजीत दत्त, अभिनेता श्री साग्निक और फिल्म छायाकार श्री मानस भट्टाचार्य ने अपने-अपने कार्य अनुभव की चर्चा विस्तार से की और कलाकारों तथा नाट्य प्रेमियों की जिज्ञासाओं को भरसक शांत किया।
इसी क्रम में आगत अतिथियों ने रंगशिल्पी के दो कलाकार कल्पना ठाकुर झा को ‘महानंदा बसु स्मृति सम्मान’ और सुशील कांति को ‘अनिल बसु स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सनद रहे कि प्लावन बसु के माता-पिता के नाम से रंगशिल्पी के दो कलाकारों को उत्साहवर्द्धन के लिए हर वर्ष इस सम्मान से नवाजा जाता है। स्वतंत्रता सेनानी स्व. अनिल बसु एक ऐसे व्यक्तित्व का नाम रहा है जिनका पूरा जीवन कामगारों के लिए समर्पित था। ऐसे ही उनकी पत्नी स्व. महानंदा बसु आम लोगों, विशेषकर महिलाओं की जरूरतों की खातिर सदा तैयार रहती थीं।
कल्पना ठाकुर झा और सुशील कांति, दोनों लगातार लंबे समय से नाट्य-अभिनय विधा से जुड़े रहे हैं और कई कुशल नाट्य प्रदर्शन किए हैं। उनके लिए यह भी एक संयोग की बात रही है कि दोनों कभी स्व. उषा गांगुली के नाट्य दल ‘रंगकर्मी’ में रहकर कई नाटक साथ खेले हैं। आज वे रंगशिल्पी में रहकर नाट्य-मंचन के क्षेत्र में एक विशेष स्थान बना चुके हैं।
इस कार्यक्रम में दल के कलाकारों ने ‘प्रतिनायक’ नाटक का मंचन किया जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा। मौके पर सभा-कक्ष में शहर के कई जाने-माने लोग और नाट्य प्रेमी उपस्थित रहे।
प्रस्तुति : सुरेश शॉ

