कविता संग्रह ‘मां और अन्य कविताएं, ‘मौन को मुखर होने दो’ एक लघुकथा संग्रह -‘एक स्पेस’। भोजपुरी में भी लेखन।

होली

सुनो!
पलाश के फूलों से
एक चुटकी सुर्ख लाल रंग
सूरजमुखी की पंखुड़ियों से
एक चुटकी दमकता पीला रंग
और चने के खेत से
एक मुट्ठी हरियाली
तुम लौटते वक्त ले आना घर

इस बार होली में
मुझे बच्चों को
इन्हीं रंगों का तिलक लगाना है
ताकि सात समंदर पार भी
बसा रहे उनके दिल में
अपना घर गांव और देश
फीकी न हो कभी
इन रंगों की चमक
बदल जाए भले
उनका देश परिवेश।

संपर्क : द्वारा जस्टिस दीपक रौशन, बंगला नंबर – 4, न्यू जज कॉलोनी, डोरंडा , रांची – 834002