युवा कवि, लेखक एवं अनुवादक। फिलहाल अध्ययनरत।

ठहरे हुए पुल

सारे पुल पार करने के लिए नहीं बनाए जाते
कुछ ठहरने के लिए भी बने होते हैं

ठहरे हुए पुल
दौड़ते पुलों से कहीं ज्यादा बुद्ध होते हैं

तुम ठहर सको
और दे सको नदियों की गवाही
कि कोई तो है जो उनसे मिलने आता है
और कविता हो जाता है।

कल-आज और कल

तुम्हारी जड़ें काटकर
तुम्हारे सच को टांग दिया जाएगा
कांटे की कील पर
और घोषित कर दिया जाएगा
तुम गूंगे हो
और तुम्हारा भविष्य अंधे की लाठी की तरह
सोचकर सहम जाएगा कि
भूत के पांव पीछे होते हैं
और तुम्हारा वर्तमान किसी म्यान में बंद
नौवीं शताब्दी की विजयी तलवार की तरह
जंग खा रहा होगा।

मां-बाप का गणित

मेरे मां-बाप ने नहीं पढ़ी-
गणित की किताबें!
नहीं पढ़े कोण, मान, किरण, रेखाएं
नहीं पढ़ी चाप और त्रिज्याएं

फिर भी वे अच्छी तरह जानते हैं
समय का क्षेत्रफल
दुख का व्यास
बातों के कोण
और भाग्य की किरणें, धूमिल रेखाएं

वे अच्छी तरह जानते हैं-
उपकार का ब्याज और
वक्त का मूलधन
अच्छी तरह जानते हैं
रोटी और पेट के भूगोल का साम्य
मां जानती है
परिवार और परिस्थितियों के समीकरण
पिता अच्छी तरह जानते हैं
बेरोजगारी की-
ज्यामितियां और प्रायिकताएं
मां-बाप अपने दौर के आर्यभट्ट हैं।

राष्ट्रवाद

आश्चर्य है
जिनके हिस्से में नहीं आती
लाचार भूख, बदनाम गरीबी, हताश पेट
उदास मन, मरा तन, भरी उलझन
अक्सर
उनके भाषणों में आ जाता है
राष्ट्रवाद!

दो जून की रोटी

घुटने टिके
झुकी पीठ
थकी पीठ
सब चुप-चुप खा जाती रोटी

उम्र
जवानी
भरा आदमी
सब चुप-चुप खा जाती रोटी

चुका शरीर
रुका पहाड़
जख्मी हाड़
सब चुप-चुप खा जाती रोटी

भाषा
कविता
कवि
कला
सब चुप-चप खा जाती रोटी

थाली में कब आई रोटी
रोटी में आ जाती थाली।

क्रिया

उदास नहीं होता कवि
या बंधी नहीं होतीं लड़कियां
या लड़खड़ाया न होता प्रेम
तो ये ठंडी दुनिया
क्रांतियों की तरह
सुंदर कविताओं से वंचित रह जाती।

स्त्री शिक्षा

मैं कहता हूँ
आह को अ में बदलने के बीच लगा होगा
सदियों का खौफनाक अंतराल!

आग-तेजाब से झुलसती औरतों को
याद आया होगा वर्णमाला का क्रम

झाड़ू की तीलियां देखते हुए
स्त्रियों ने जाने होंगे संख्याओं के अंक

और बिटिया ने जब
किताब को छुआ होगा
क्रांति जैसा कुछ हुआ होगा।

संपर्क :गांव ज्योरा मौरा, जिलानिवाड़ी, मध्यप्रदेश472338 मो.7617344968