
युवा कवि। अध्यापन तथा ‘महुआ’ पत्रिका का संपादन। अद्यतन कविता संग्रह ‘सभ्यता के गुणसूत्र’ ।

आम कवि
वह एक आम कवि है
आमजन पर कविताएं लिखता है
उनके दुख-व्यथा को
शब्दों में पिरोकर
कविताएं रचता है
लेकिन कभी आमजन के साथ
खड़ा नहीं दिखता
उसकी कविताओं में
आमजन के लिए संवेदना टपकती है
लेकिन वह कभी
आमजन के सामने नहीं जाता
उसके लिखे शब्दों में
आमजन कर चेहरा झलकता है
लेकिन उसका चेहरा
आमजन-सा नहीं दिखता
वह एक आम कवि है
आमजन के लिए कविताएं लिखता है
लेकिन उसकी कविताएं
आमजन के लिए नहीं होती
वह एक कवि है
उसे आम कवि बनना पसंद है
आमजन भी पसंद हैं
लेकिन आमजन बनना पसंद नहीं!
जमीन पर
चांद के पास
घर बना लिया
जुगनू सारे गायब हो गए
लेकिन अंधेरा
मन के भीतर समा गया
अधिक ऊंचाई पर
हवा कम हो जाती है
और आदमी का
दम घुटने लगता है
जब धरती पर था
चांद आसमान में था
एक जुगनू भी
काफी था रोशनी के लिए
छोटी-छोटी खुशियां
जमीन पर ही जगमगाती हैं
जिन्हें हर कोई
अपनी अंजुरी में भर सकता है!
संपर्क :नावाडीह, बोकारो, झारखंड–८२९१४४मो.९९३१५५२९८२
