युवा कवयित्री।

आंकड़ा

धूप से झुलसे हुए हाथ
जब मिट्टी में बीज डालते हैं
तो उम्मीद बोई जाती है-
कि इस बार फसल
सिर्फ कर्ज नहीं उतारेगी
बल्कि भविष्य संवारेगी

पर मौसम
अब आसमान से नहीं
बैंकों की फाइलों से तय होता है
बरसात कम हो या ज्यादा
सूखा खेत में नहीं
किसान के सीने में पड़ता है

सरकारी घोषणाएं
खबरों में हरी-भरी लगती हैं
पर उसकी बही-खाते में
केवल लाल स्याही फैलती है

किसान जानता है-
उसका कर्ज
कभी मिट्टी की तरह ढक नहीं जाता
बल्कि बेल की तरह
उसके घर की दीवारों पर चढ़ता चला जाता है
और जब वह थककर
गांव की बड़ेर पर
रस्सी की गांठ लगाता है-
तो पूरा देश
बस एक आंकड़ा पढ़ता है:
‘एक और आत्महत्या’।

संपर्क :ग्राम – औंका, पोस्ट – सराय हरखू, जनपद – जौनपुर, उत्तर प्रदेश-222141 मो. 8530610163