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कथाकार : मलयालम के कथाकार और फिल्म अभिनेता। कई कृतियां। संप्रति केरल राज्य सांस्कृतिक कार्यकर्ता कल्याण बोर्ड के सचिव। |
अनुवादक : मलयालम से हिंदी में अनुवाद कार्य। संप्रति केरल के एक कॉलेज में शिक्षण। |

भाषा आदिम है। शब्दों को अपना अर्थ खोजने के लिए बहुत दूर का रास्ता तय करना पड़ता है। पुराने जमाने में शब्द जिस तरह मिट्टी से लथ-पथ होकर पड़ा रहता था, उसी तरह किसी के मस्तिष्क में पक कर पड़ा हुआ हो सकता है। फिर एक असहनीय क्षण में, जब उसे किसी बात के लिए चिल्लाना होगा, वह शब्द जोर-शोर से बोलेगा। तब उसका कुछ अर्थ होगा। अर्थ के माध्यम से ही मनुष्य ने शब्द की खोज की।
यहां तक कि एक छोटे कदम की यात्रा से भी शुरुआत हो सकती है। यदि किसी गिरे हुए पेड़ की शाखा पर खड़े हों, तो आप दुनिया देख सकते हैं। मुझे नहीं पता कि मैं यात्रा की किस राह पर हूँ। फिर भी एक शब्द में जो देखा जाता है उसका आधा हिस्सा और जो सुना जाता है उसका आधा हिस्सा लेकर एक बड़ी कहानी कही जा सकती है।
याददाश्त में बने रहने के लिए खुले दिमाग का होना भी जरूरी है। किसी चीज़ को भीतर भरने और उसे बोकर फसल काटने के लिए एक विस्तृत खेत होना चाहिए। तब एक शब्द भी कहानी बन जाएगा। बोम्मनहल्ली के पादरी ने कहा था कि जो समय उन्होंने देखा और जो शब्द उन्होंने सुने, उनके बारे में तुम लिखो। उन्हें सुनकर ही मैं इतना लिख रहा हूँ।
सड़क किनारे कई कारें कतार में खड़ी थीं। जब मैं होंडा, मारुति, हुंडई, फोर्ड, प्यूज़ो आदि विभिन्न कारों के पास से गुजर रहा था तो ‘चंद्रन जी, मुझे नहीं ले जाएंगे?’ पूछने वाली मारुति कारों से मैंने यह शब्द सुना। मुझे नहीं पता कि आगे आने वाले समय में किस रास्ते पर जाना होगा और कौन मुझे बात करने के लिए उकसाएगा। लेकिन वह शब्द अभी भी मेरे आसपास है। मेरे कानों के पास उसकी गुनगुनाहट-सा कुछ है।
पता नहीं उस स्थान का नाम सचिवोत्तमापुरम कब पड़ा। सुनने में आया था कि पहले वह जमीन सरकार ने रेलवे के लिए अधिग्रहीत की थी। चारों ओर खेत। उसके इर्द-गिर्द बरसात के मौसम में शोर-शराबे के साथ, गर्मियों में रोती-बिलखती बहती कडंबा नदी। पातार से पहाड़ी पार कर कडंबा नदी के नाव में चढ़कर लोग तिरुवंबाडी इसी सरकारी भूमि से होते हुए जाने लगे। नदी पार धीरे-धीरे शहर बनता गया।
जब शहर बनने लगा तो यहां शहर बसाने वाले आकर रहने लगे। तिरपाल, प्लास्टिक और टिन शीट बांध कर उसके दरवाजे के रूप में साड़ी को रीपर से लगाकर सोने का ठिकाना बनाया गया, जिसे घर नहीं कहा जा सकता। बस, आपको बारिश और धूप से बचाने के लिए एक छत भर थी। जमीन पर बिछी चटाई पर बैठकर पका हुआ खाना खाता था और थक जाने पर उसपर ही लेट जाता था। स्त्री के साथा सोने भर की जमीन थी। बिना पते का जीवन। कोई भी अवैध कार्य करने पर छुपाने या गायब करने के लिए शहर के भीतर की पाताल गुफा। यदि उसके भीतर प्रवेश किया जाए तो बिना वापसी के पागल कर देने वाले कई रास्ते मिलेंगे। मैं उन रास्तों पर अनायास यात्रा करता हूँ।
पुलिस की जांच रिपोर्ट में उसका नाम था पापड़ चंद्रन। उसने नौ गाड़ियों की चोरी, दो घरों में डकैती के दौरान परिवार के सदस्यों पर हमला और एक बार सड़क किनारे बस के इंतजार में खड़ी युवती की माला तोड़ने की कोशिश की थी। स्वाभाविक रूप से, यदि सब मिला कर उसे सजा सुनायी जाए तो वह उम्र कैद है।
तो अब हम ठीक-ठीक जानते हैं कि चंद्रन कहां होगा। अगर वह जेल के अंदर नंबर बन गया होगा तो जरूर वहां होगा, नहीं तो वहां से कूद कर सचिवोत्तमापुरम की नदी में डूबकर लेटा होगा।
जब मेरी कार चोरी हो गई तो मैंने फैसला किया कि अगर चंद्रन जेल में होगा तो मैं उससे मिलने जाऊंगा। अगर किसी मामले में उसे पुलिस ने पकड़ा होता तो इसकी जानकारी मुझे जरूर मिल जाती। लेकिन यह नहीं बता सकता कि मेरी कार चंद्रन ने ही हड़पी। केवल प्राथमिक साक्ष्य के आधार पर इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। लेकिन मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर राधाकृष्णन ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है। सबूत के मिलने पर ही आरोपी को गिरफ्तार करना आसान होगा। फिर मुकदमा सुचारु रास्ते पर चलेगा। मैंने इंस्पेक्टर से ही पूछा कि चंद्रन कहां मिल सकता है। यह कड़ी मेहनत से कमाई गई कार थी।
पुलिस चोरों को कुछ हद तक जानती है। जब वे चोरी के स्थान पर आए और अपराध का निरीक्षण किया, तो उन्होंने कहा, यह पापड चंद्रन का काम है… इस बार वह अकेला नहीं था मैंने धीरे से एक पुलिस वाले से पूछा कि उन्हें यह कैसे पता चला। पुलिस वाले ने मेरी ओर कठोर दृष्टि से देखा। उसकी दृष्टि से ऐसा लगा कि मैंने कुछ कसूर किया है। फिर मैंने कुछ नहीं कहा। आखिर नुकसान तो मेरा ही हुआ था।
उस समय पिता घर पर थे। मैंने उस दिन सुबह एक यात्रा की योजना बनाई थी। जाने के लिए जल्दी उठ गया था। तभी जोरदार बारिश हुई। गलत समय की बारिश को कोसते हुए मैं वापस सो गया। पिता जी उठे, अखबार ले आकर मुझे पुकारा : कुंजुमोन, क्या तुम चले गए? उन्हें पता है कि अगर कोई नहीं है, तो जवाब नहीं मिलेगा। पिता की आदत कुछ ऐसी ही थी। कोई रहे न रहे, वह तो पुकार कर पूछेंगे ही।
पिता जी हमेशा उत्तर चाहते थे। यदि नहीं मिला तो बार-बार पूछते रहेंगे। इसलिए मैं तुरंत जवाब देता था :
मैं नहीं गया पापा, जब उठा, बहुत तेज बारिश होने लगी थी।
तब कार कौन ले गया?… पिताजी की आवाज थोड़ी ऊंची थी।
पेट के निचले हिस्से में कुछ अजीब हरकत हुई। जाकर देखा तो गेट का ताला तोड़ दिया गया था। ऐसा लगता था मानो गेट बंद है। गेट सीधे गैरेज की ओर खुलता है। वहां से आपको घर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। गैरेज में कोई कार नहीं।
आंगन में बदबू थी, कुत्ते के मल की गंध। वह बहुत तेज़ थी। मैंने खोजा, तो एहसास हुआ कि मानव के ही मल की गंध आ रही थी। एक जगह नहीं, बल्कि आंगन के कई हिस्सों में। जोरदार बारिश के बावजूद नाक में जलन पैदा करने वाली वह गंध अभी भी बनी हुई है। कुछ स्थानों से पानी के साथ मल बह कर दीवार के किनारे पर जमा हुआ है।
मैंने इंस्पेक्टर राधाकृष्णन से जो कहा, उसने सुना। वह मेरे पास खड़े हो गए और कहा- यहां चंद्रन के आने के कई संकेत मिले हैं। कुछ सबूत जो हर चोर चोरी करने से पहले करता है। यह उस चोर की अपनी विशेषता होती है। कार की चोरी करने वाले चंद्रन के नियमित तौर-तरीके होते हैं, वे यहां हैं। गेट पर ताला लगाकर चले जाने का आभास होने देना भी उसी का हिस्सा है। आमतौर वह अकेला ही चोरी करता है। यहां पर उसने मल-मूत्र विसर्जन किया है तो उसके साथ एक और व्यक्ति था। इसकी पूरी तरह से पुष्टि भी नहीं की जा सकती। चलिए, देखते हैं कि इस प्रकार का और भी कोई है क्या। सर, आप स्टेशन आ जाइएगा?
आमतौर पर हर कोई यही सोचता है कि पुलिस वाले ही जानते हैं कि चोर कहां है। ऐसा भी सोचा जा सकता है कि उनके बीच एक प्रकार का अवैध संबंध जरूर होगा। आम धारणा यह होती है कि उनको बिक्री का हिस्सा मिलता है। लेकिन चोर की जिंदगी के बारे में पुलिस से ज्यादा चोरी का माल खरीदने वाले जानते हैं। पुलिस और सामान्य लोगों को लगता है कि जब वह चोरी की गाड़ियां बेचेगा तो उसे बड़ी रकम मिलेगी। वे यह भी सोचते हैं कि चोर बहुत जल्दी अमीर बन सकता है।
लेकिन किसी कार चोर का जीवन हमेशा दुख से भरा होता है। बिचौलिए मालिक होते हैं जो खूब पैसे कमा लेते हैं। उन्हें पूंजीपति के रूप में जाना जाता है। ऐसे ही कुछ बिचौलिए होते हैं जो चोर को गाड़ी बेचने में मदद करते हैं। क्या आप जानते हैं, चोरी की हुई मारुति डिजायर या मारुति एर्टिगा बेचने पर किसी चोर को क्या मिलता होगा? कार की कीमत सोचकर आप मुनाफे को न जोड़िए। अरे यार, चोरी का माल है न… इतना ही काफी है, कहकर वह अधिकतम राशि पच्चीस हजार देगा। लेकिन मिलने वाली रकम की अपेक्षा चोरी करना अधिक संतुष्टिदायक है। जब आप उस रास्ते पर चलकर देखेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि चोर कितने गरीब होते हैं। चोरी के बाद, जितनी जल्दी हो सके माल को निपटाने की सोच हर एक चोर में रहती है। लूटने के बाद माल को किसी गोदाम में छिपाकर, बाद में उसे सही जगह पहुंचाकर बेचने पर ही वह चैन की नींद सो सकेगा।
…
जब हम स्टेशन पहुंचे तो वहां भीड़ लगी थी। पिछले चुनाव के दौरान शुरू गाली-गलौज के बाद चार लोगों की गर्दन काट दी गई थी और छाती फाड़ दी गयी थी तो उसकी गिरफ्तारी और पुलिस स्टेशन परिसर में पार्टी कार्यकर्ताओं के दंगे चल रहे थे। मैं उसके बीच से वहां जा पहुंचा था। भीड़ को तब खून की गंध होने लगी थी।
मैंने लोगों को एक तरफ धकेल कर पुलिस स्टेशन के अंदर चला गया। चूंकि बारिश थम गई थी तो भीतरी भाग नमी से भरा हुआ था। उसके साथ अलग-अलग तरह के सेंट की तीखी और खराब गंध भी आ रही थी। हत्या और गाली-गलौज की घटना के आगे स्टेशन में किसी ने मेरी ओर ध्यान नहीं दिया।
कुछ समय बाद मुझे एहसास हुआ कि पुलिस को कार की चोरी की तुलना में हत्याओं और महिलाओं के साथ बलात्कार की कहानियों में अधिक दिलचस्पी है। देर तक इंतजार किया तो एक पुलिस वाले ने मेहरबानी दिखाते हुए मुझे बुलाया।
सर, वह कार चोरी का मामला है न…
मैंने हां के रूप में सिर हिलाया।
सर, आप बैठिए…
मैंने कार ख़रीदने से लेकर उसके ग़ायब होने तक की कहानी बताई। उस पुलिस वाले ने वह सब कुछ लिख लिया। मेरे लिए वह बिलकुल अपरिचित भाषा थी। मुझे समझ नहीं आया कि पुलिस इतने उलझे ढंग से क्यों लिख रही थी। जैसे भाषा और शब्द अलग-अलग लगते थे। मैंने वे सारी बातें सुनी और उन्हें सत्य मानकर हस्ताक्षर कर दिया।
अब आप जाइए सर… हम कार ढूंढ लेंगे।
उसके बाद का समय कार के लिए लिया गया कर्ज चुकाने का था। बैंक और मैंने कई कहानियां बताईं।
आप कर्ज क्यों नहीं चुकाते सर…
मैंने बैंक को सूचित कर दिया था कि कार की चोरी हो गई।
भले ही पुलिस केस हो, कर्ज नहीं चुकाओगे तो मुख्य कार्यालय से पूछताछ होगी सर।
बीमा उसी के लिए है न…
आप जानते हैं सर वह कब मिलेगा..
जब पुलिस नोटिस देती है तब।
वह नोटिस कब मिलेगी सर…
पुलिस जांच कर रही है न…
केस का कोई सुराग मिला सर…
मैं पूछता हूँ…
मुख्य कार्यालय तो अब उसे जब्त कर लेंगे सर…
वह कार ही जब्त करने का माल है न…
नहीं सर… जिस चीज पर कर्ज दे रहे थे, उसके गुम हो जाने पर या खो जाने पर, उसके साथ अनुलग्नक था सर…
वह तो मुझे नहीं पता था…
सर, आपने ही तो समझौता पत्र पढ़ कर उस पर हस्ताक्षर कर दिया था…
समझौता तो कार खरीदने के लिए था न…
सर इसे जल्दी ठीक कीजिए… वरना लोग घर आ जाएंगे… पता नहीं वे क्या कहेंगे…
जब वे आएंगे तो मैं उन्हें बताऊंगा…
झगड़ा होने पर कृपया बैंक का नाम उसमें न घसीटेंगे तो बेहतर होगा…
अरे सर… झगड़ा करने पर यहां कानून नाम की चीज है न…
सर, कानून बैंक का अपना है…
बैंक और मैं कहानियां लिखकर पोस्ट करते रहे, उस बीच इंस्पेक्टर राधाकृष्णन का बुलावा आया।
हरींद्रन सर, हमें पलुकल्लु नामक जगह तक जाना है। उधर पुलिस ने कुछ गाड़ियां पकड़ रखी हैं… कहीं आपकी कार उधर मिल जाएगी तो…
मैं आऊंगा, बस मुझे बताओ कब…
इंस्पेक्टर ने सिर हिलाया। मेरा मूड ख़राब था। मैंने अपने दिल की बात को थोड़ी ऊंची आवाज में ही कह डाली कि जो कार उठा ले गया था, वह मुझे किस ढंग की वापस मिलेगी। उस वक्त मुझे लगा था कि इंस्पेक्टर को मेरी बात सुनाई देनी चाहिए। उन्होंने मेरी तरफ देखा।
सर आप बैठिए…
मैं बैठ गया।
देखिए सर, आपने जो कहा बिलकुल सही है… आपकी कार अब किस सूरत में मिलेगी कुछ बता नहीं सकते… अगर कार किसी गैर कानूनी गतिविधियों के लिए पकड़ी गई है तो उसका मुकदमा अलग से होगा… अदालत… उन लोगों ने नंबर बदल दिए होंगे… एक बात बताऊं… अब हम वहां जो कार देखेंगे, यदि आपकी हो भी तो मना कर दीजिए… हम बीमा का दावा कर लेंगे!
चोरी हुई कार के लिए बीमा मिलेगा क्या? कह रहे थे, कुछ समस्याएं हैं…
तो सर आप यहां जो गाड़ियां खड़ी हैं उनमें से पसंदीदा एक लेकर जाइए…
मैं समझ गया कि राधाकृष्णन सर ने मुझे शांत करने के लिए ऐसा कहा था। फिर भी मैंने कहा-
सर आप मेरी चिंता को समझ नहीं पा रहे हैं… उस कार को मैंने बड़ी उम्मीद से खरीदी थी… मैंने उसे कायदे से एक बार भी नहीं चलाया…
मैं सर आपकी टेंशन समझ सकता हूँ… देखते हैं… हम उस पापड़ चंद्रन को उठा लेंगे तो सब कुछ मिल जाएगा… मैं आपको फोन करूंगा…
गाड़ी के बाजार में कबाड़ इकट्ठा करने वाले नीलकेशी की जुबान से मुझे पापड़ चंद्रन नामक बृहद साम्राज्य के अंदर घुसने का एक महत्वपूर्ण शब्द मिला। रविवार को जब पिता द्वारा एकत्रित की गई पुरानी चीजें लेने वह आया तो मैंने उससे बात की थी।
केशी, मैं सोच रहा था कि तुमसे मिलूं…
क्या सर… आपके कार्यालय में कोई कबाड़ है…
अरे वह नहीं…मेरी कार किसी ने चोरी कर ली यार…
अरे अरे… कब सर…
दो महीने हो गए… क्या तुम्हारा कोई परिचित है जो चोरी की गाड़ी खरीदता है…उस रास्ते पर ढूंढ़ने से कोई जानकारी मिलेगी तो…
पुराना सामान बोरे में खींच कर डाल रहा नीलकेशी कुछ देर तक कुछ नहीं बोला। बोरे का खुला मुंह सिल कर वह खड़ा हो गया। उसने इधर-उधर देखा और धीरे से कहा:
सर, मैलाडी में एक आदमी है… वह चोरी के सामान खरीदते हैं… वह जो आपने पापड़ का नाम कहा न… उसका भी लेन-देन वहीं होता है…
पापड़…?
जी सर…पापड़ चंद्रन…
मैलाडी के उस आदमी का क्या नाम है…
उसका नाम नहीं पता… लेकिन तेंगापालयत्त कोत्तुसामी कहने से काफी है… किसी से यह मत कहिए कि यह सब मैंने आपको बताया… अगर उसको पता चला तो मेरी गर्दन काट देंगे…
मैलाडी की सड़क किनारे ऐसे लोग भरे पड़े हैं जो पत्थर को तराश कर मूर्तियां बनाते हैं। किसी दूसरे की परवाह किए बिना सब कोई पत्थर, छेनी और हथौड़े की ओर देखता है। देखने पर तो वह किसी अन्य मूर्ति की तरह लग सकता है। मैं पत्थर की धूल उड़ाती हवा के बीच किसी कार्यशाला के पास खड़ा रहा। शिल्पी को मेरा वहां खड़े रहने का पता तक नहीं चला। मुझे आश्चर्य हुआ कि उड़ती धूल वाली हवा में वह पत्थर को कैसे तराशेगा। मैंने सोचा कि हवा के शांत होने का इंतज़ार करते हुए वह मेरी तरफ देखेगा। उसके सामने तिरछा खड़ा किए गए नारियल के पत्ते के बीच से सूरज की रोशनी आ रही थी। छेनी पर हथौड़े की चोट की आवाज़ हवा की आवाज़ का साथ दे रही थी। जब मुझे यकीन हो गया कि तराशने वाला मेरी ओर नहीं देखेगा तो मैंने उसे शू-शू आवाज कर पुकारा। हवा और तराशने की आवाज के बीच वह पुकार उतनी साफ नहीं हुई। जब मैंने काफी जोर से हेलो कहा तो उसने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे यह कौन यहां परेशान करने आ गया!
कोत्तुसामी से मिलना था…
वह कौन…? ऐसा कोई इधर नहीं है…
फिर उसने कुछ कहे बिना अपने काम में लीन हो गया। मुझे लगा कि आगे कुछ पूछने पर भी उसका जवाब नहीं मिलेगा। तेज हवा आवाज के साथ आरुवामोषी दर्रा को पार कर गई।
मैंने उस जगह पर चारों ओर देखा, न जाने कौन मुझे दूसरा रास्ता दिखाएगा। मैंने सोचा कि कोई मुझे देखकर आएगा और पूछेगा कि मैं यहाँ क्यों आया? ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। मैं धीरे-धीरे मुड़ने लगा तो अचानक आसमान से गिरने जैसा एक काला नाटा आदमी मेरे सामने आ टपका। मैं चौंक गया और पीछे की ओर गिरने से बचकर खड़ा रहा।
क्या सर… आप यहां जिससे मिलने आए हैं… उससे मिले बिना कैसे जाएंगे…
क्या कहा आपने…? मैं समझ नहीं पाया… आप तेंगापालयत्त कोत्तुसामी हैं…
वह मैं नहीं…उसी से मिलने जा रहे हैं… बात क्या है…
बात मैं उसी से पूछ लूं तो चलेगा न…
नाटा आदमी जोर-जोर से हँसा। वह अपने शरीर से इतनी तेज आवाज निकाल सकेगा यह किसी की उम्मीद की बात नहीं थी।
फिर उसने मुझे साथ चलने के लिए बुलाया।
चोरी का माल पूरा हमेशा एक तरह का बोझ बन जाता है। उसको टुकड़े-टुकड़े कर कई हिस्सों में बेचना आसान होगा। तब समय ज्यादा लगेगा। उससे बेहतर किसी जान-पहचान के मैकेनिक या वर्कशॉप मास्टर से मिलना होता है। लेकिन हमें पक्का यकीन होना चाहिए कि वे लोग हमारे साथ ही खड़े होंगे।
चोरों की तरह ही पुलिस वाले भी बड़े माहिर होते हैं। वे जहां चाहेंगे वहां घुसपैठ करेंगे। तब खुद को मजबूत बनाकर खड़ा करने वाला व्यक्ति ही दंड से बच सकता है। पैसे देकर खरीदने वाले बहुत कम होते हैं। कुछ व्यापारी जो फाइनेंसर भी होते हैं, चोरी के माल को खरीद कर नई आरसी बनवा लेते हैं और उस पर लोन देकर बेच देते हैं। इस देश की सड़कों पर ऐसी कई कारें चल रही हैं। भाग्यशाली लोग उन कारों में यात्रा करेंगे। अन्यथा कभी भी पकड़े जा सकते हैं।
…
यह कबाड़ व्यापार की जगह थी। मुझे ऐसा लग रहा था कि वह नाटा आदमी अपने पैरों से नहीं चल रहा था। वह किसी कलाबाज़ी की तरह उछलकर ढेर हुए बोरों पर लुढ़क गया। मैं लोहे की चीज़ों से भरे समुद्र में एक छोटी नाव की तरह इधर-उधर डोलता रहा। मैं लोहे की तीखी गंध सहन नहीं कर पा रहा था। विशाल इमारत में एक साथ बंधी कबाड़ की चीज़ों के बीच से हवा के कारण लोहे की धूल उड़ी। धूल मेरी आंखों में भर गई। मैंने अपनी आंखें मलीं। जब आंखें खोलीं तो सामने था छह फीट से अधिक लंबा एक काला दानव। उसकी डराने वाली आंखें खुली हुई थीं। सिर पर बालों की जटा। लंबी बिना आस्तीन की बनियान जैसी शर्ट। वह कोयला और चर्बी से गंदी हो चुकी थी। ढीली पैंट के ऊपर एक बड़ी बेल्ट जिसके साथ कुछ औजार लगे हुए थे।
आप कौन हैं…क्या चाहिए…
तेंगापालयत्त कोत्तुसामी…
मेरी आवाज़ अत्यधिक पतली थी।
वह तो मैं ही हूँ… सर आपको क्या चाहिए…
एक ही सांस में मैंने अपनी कार चोरी होने की कहानी सुना दी। यह भी कहा कि कहीं वह कार सामी ने तो नहीं खरीदी थी, यह पता करने के लिए मैं आया हूँ।
कार की कोई तस्वीर है क्या…
मैंने अपना फोन टटोला। गैलरी में से अपनी कार की फोटो ढूंढ़ कर उसको दिखाया। उसने फोन लेकर कार की तस्वीर को जूम करके देखा।
उसकी आंखें बड़ी बेचैनी से इधर-उधर घूमती रहीं, मैं समझ गया। हाथ बढ़ा कर फोन मुझे देते हुए भी उसने अपना मुंह नहीं खोला। धीरे से घूम कर वह पुरानी कारों को टुकड़ों में कर रखी जगह की ओर बढ़ा। नाटा आदमी ने मुझे हाथ से इशारा कर उसके साथ चलने को कहा।
सर…कार का रैपर तक नहीं हटाये थे क्या…
मैंने न में सिर हिलाया।
यह मलयालियों की आदत होती है… खरीदकर दस साल बीतने पर भी रैपर तक नहीं हटाएंगे…
नई कारों की चोरी करना उत्तम होता है। अगर कुछ पैसे हाथ लगना है तो नई गाड़ियों से ही उम्मीद की जा सकती है। शहर के भीड़ भरे पार्किंग स्थानों में आजकल चोरों के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। सच कहें तो बेचारे चोरों के बारे में अब कोई नहीं सोचता।
पुराने समय में तो बड़ी कठिनाई झेलकर किसी कार को खोल लेता था। बाद में हर एक कार मुझे अपनी ओर खींचती हुई बुलाती थी। कार ने कभी मुझसे कहा भी था कि चंद्रन जी के हाथ से छूने पर मुझे दो सौ दस किलोमीटर की गति प्राप्त होती है। ड्राइवर सीट पर बैठकर गाड़ी चलाने लगता है तो कार कहती है: चंद्रन जी, मैं इस पल का इंतजार कर रही थी। जो मुझे चलाता है वह धीमी-धीमी गति से मुझे बिना आजादी दिए चलाकर ले जाएगा। वह कभी यह देखता तक नहीं है कि मेरे स्पीडोमीटर में दो सौ दस की गति क्यों लिख रखी है।
आप देखिए चंद्रन जी…चालीस से ज्यादा की गति में भागने की मेरी अदम्य इच्छा हमेशा रहती है। चालू हो जाए तो पेट्रोल वाली पीली बत्ती के जलने तक लक्ष्य स्थान पहुंच जाएंगे।
जितनी जल्दी हो सके, माइनर शॉप पहुंच जाना होता है। यह जो माइनर शॉप है, पहली सीढ़ी होती है। उधर कार के भविष्य पर निर्णय लिया जाएगा। कोत्तुसामी जैसे लोगों के शॉप पहुंचने पर तो झिंगालाला। आप निश्चिंत रहिए। सामी सब कुछ देख लेगा। जो बंद करना होगा, वह कर देगा। जो खोलना होगा, वह भी कर देगा। नई कार मिलने पर तो उसकी हँसी कुछ अनोखी होती है। पूरी पृथ्वी को हिलाने वाली हँसी।
खुद सामी ही कहता है कि तिरुवितांकूर के राजाओं की भी हँसी ऐसी नहीं रही होगी। उनके पकड़ने की शैली, गर्दन के पीछे से हाथ डालकर एक पकड़। उस पकड़ में आंखें बाहर निकल आएंगी। तो भी उसमें एक तरह का प्यार रहता है। अबे, सुअर के बच्चे… स्क्रू, कील सब कुछ अलग-थलग कर लेंगे… न… रैपर वाली नई कारों को छोटे बच्चों की तरह सामी छूता है। ऐसा भी लगेगा कि हाथ लगने पर उसे दर्द होगा…
सामी द्वारा नई कार के हर एक स्क्रू को बड़ी सावधानी से निकालकर हल्का खरोंच भी आए बिना स्पेयर पार्ट्स में बदलते देखना मजेदार है। कोत्तासामी ने ही कहा था कि नई कार को उसी रूप में बेचने से बेहतर स्पेयर पार्ट्स बनाकर बेचना है। आप उस कीमत में एक नई कार खरीद सकते हैं। इंजन को निकालकर अलग करने पर सामी रोने लगेगा। वह रोना गड़गड़ाहट के साथ होगा। अबे… यह तो मर चुकी रे… अब और इसकी जान लेना कितना बड़ा पाप होगा…इंजिन की चेसिस नंबर को सीसे से बदलने तक वह रोना-चिल्लाना जारी ही रहेगा। इंजिन का नंबर बदलने के बाद सामी की चिल्लाहट कुछ इस तरह निकलेगी- अबे… हो चुका… कोत्तुसामी से मिलने के बाद ही मेरा जीवन कुछ अच्छा बना था। वरना मैं किसी रसातल में समा जाती।
राधाकृष्णन सर का तबादला हो गया है। जाने से पहले मुझे फ़ोन किया था : हरीन्द्रन सर… कार चोरी एक तरह की पहेली है। अथाह समुद्र की भांति वह पाताल तक चली जाएगी। अगर आप डुबकी लगाएंगे तो क्या होगा, यह कोई नहीं बता सकता। कभी मोती मिल जाएगी, और कभी व्हेल के मुंह में फंस जाएंगे। अगर डूबना चाहते तो डूब सकते हैं या फिर यह सब क्या है, सोचते हुए धीरे-धीरे आप चप्पू चला कर जा भी सकते हैं। कौन से ऐसे घाव हैं जिन्हें वक्त नहीं भरेगा…
मुझे कुछ भी समझ नहीं आया। आप बीमा कंपनी में तभी जा सकते हैं जब आपको पुलिस स्टेशन से नोटिस मिले कि कार नहीं मिल सकी। पुलिस वाले आएंगे-जाएंगे। यह नहीं जानता कि वे कब वह नोटिस देंगे। वह मिलेगा तो ही बैंक वालों को शांति मिलेगी। राधाकृष्णन सर की जगह लेने वाले इंस्पेक्टर मेरे पास से गुजरे। वह मुझे देखकर मुस्कुराकर चले गए।
सर मेरी गाड़ी… मैंने जोर से पूछा।
अरे हरीन्द्रन सर, हम ढूंढ़ रहे हैं! उन्होंने चलते-चलते पीछे मुड़कर देखते हुए कहा।
स्टेशन से बाहर निकलते समय मुझे किसी ने पीछे से पुकारा। मैंने पीछे मुड़कर देखा। वह मुझे देखकर अच्छी तरह मुस्कुराया। मेरे पास आकर हाथ मिलाया। मैंने उस अजनबी को सिर से पैर तक देखा, जैसे मैं उसे नहीं जानता हूँ। काला पहाड़-सा शरीर। ऐसे रंग की शर्ट और पैंट जो उसके रंग से बिलकुल मेल नहीं खाता। लेकिन वह बिलकुल साफ-सुथरा और सभ्य था। उसकी एक आंख अधखुली थी। उसके ऊपर तलवार से हुआ घाव और उसके भरने का निशान।
सर, आप सामी को ढूंढ़ने वाले ही हैं न?
कौन सामी…
तेंगापालयम कोत्तु सामी…
आप कौन…
सर… मैंने सुना कि आप वहां गए थे और कार ढूंढ रहे थे। आपकी वह कार उधर नहीं है सर। उसकी नई आरसी बनी और कहीं और चल रही है…
तुम कौन… मेरी कार कहां है…
मैं कोई नहीं हूँ… और आप उस कार की तलाश मत कीजिए।
तुम पापड़ चंद्रन हो क्या… मैं उससे कैसे मिल सकता हूँ?
पापड़ चंद्रन, वह कौन है सर…?
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मधुपाल : नंबर 9, निर्मी होम्स, काजिरमपारा पोस्ट, तिरुवनंतपुरम, केरल-695030, मो.8075953769
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