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| चंद्रमती केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित मलयालम की वरिष्ठ कहानीकार। प्रमुख रचनाएं – स्वयं-स्वंतम, तट्टाराक्कुटियिले विग्राहंगल, वेताला कथाकल (उपन्यासिका), ओषुकाते ओरु पुषा (उपन्यास), ञन्डुकालुटे नाट्टिल ओरिटावेला, निंगल निरीक्षणात्तिलानु (कहानियां)। |
सुमित पी.वी. मलयालम और हिंदी में लेखन और परस्पर अनुवाद कार्य। हिंदी की चार किताबें और चार अनूदित पुस्तकें प्रकाशित। संप्रति केरल के एक महाविद्यालय में अध्यापन कार्य। |

यह सब कंप्यूटर पर तैयार कर लेमिनेटेड कागज से बने एक बड़े बोर्ड से शुरू हुआ, जिसे जॉन कुरियन ने अपने घर के सामने बिजली के खंभे पर लगाया था।
‘सावधान! यहां कचरा फेंकना अपराध है। आप गुप्त कैमरे की निगरानी में हैं।’
सिर्फ जॉन कुरियन ही जानता है कि वहां कोई गुप्त कैमरा नहीं है। वह यह भी जानता है कि अगर तेय्याम्मा को पता चल गया, तो उनकी बेटी और नौकरानी को पता चल जाएगा और फिर स्थानीय लोगों में जागरूकता फैलाना बस थोड़े ही दूर की बात होगी।
फिर भी, अगले दिन तेय्याम्मा ने पूछा, ‘ए जी, आपने सड़क पर कोई गुप्त कैमरा लगाया है क्या?’
‘ओह, उसे मैं नहीं पुलिस ने लगाया।’ उन्होंने कहा।
‘कल सिनी भी कह रही थी, यह सब पापा की नौटंकी है, वहां कोई कैमरा नहीं लगा है।’
जॉन कुरियन को बड़ा गुस्सा आया। उन्होंने ऊंची आवाज में कहा, ‘अरे, पुलिस के हाथों में कमीज के इस बटन के जितने छोटे कैमरे हैं। तुम उन्हें अपनी आंखों से नहीं देख सकती। ऐसा ही कुछ उन्होंने यहां पर भी लगाया होगा।’
कुरियन ने यह बोर्ड इसलिए लगाया था क्योंकि घर के सामने कूड़े का थैला रखा मिला था। उसने सुबह नाश्ते के बाद हमेशा की तरह अपना लैपटॉप खोला ही था कि नौकरानी जमीला के आंगन में झाड़ू लगाने की आवाज सुनाई दी। वह दौड़कर खिड़की की तरफ गया। उसे जमीला की गोरी त्वचा, गाल, उसके घुंघराले बाल, उसके भरे हुए होंठ और उसके उभरे हुए दांत सब कुछ बेहद पसंद हैं। मैक्सी के ऊपर से दिखता हुआ उसका भरा हुआ बदन और भी ज्यादा पसंद था। लेकिन तेय्याम्मा की निगरानी क्षमता को याद कर, उसने अपनी सभी पसंदों को सिर्फ देखने तक ही सीमित रखा था।
जमीला ने अपनी पीठ हिलाई, कूड़ा झाड़ती हुई गेट तक गई। घर का कूड़ा झाड़कर सड़क पर न फेंकने का नियम रेजिडेंट्स एसोसिएशन ने पहले ही लागू कर दिया था। घर के सामने के कचरा हटाने के लिए वे किसी कर्मचारी को वेतन देते भी हैं। लेकिन जमीला छोटे-मोटे चालाकी का काम भी करती है। अगर थोड़ा-बहुत कचरा ही होता है तो गेट के बाहर कोई न होने की बात को सुनिश्चित करते हुए वह उसे सड़क पर बिखेर देती है। कचरे का चौड़ाई पर बिखर जाने से कोई उस घर को दोषी भी नहीं ठहराएगा।
जॉन कुरियन ने देखा कि जमीला अभी अपनी चालाकी के लिए तैयारी कर ही रही थी। लेकिन जब जमीला ने गेट खोला, तो उसने देखा कि वह तेय्याम्मा भाभी चिल्लाती हुई वापस दौड़कर अंदर आई। वह एक सहज क्रिया की तरह, खिड़की के पास से फिसल कर हट गया।
तेय्याम्मा के साथ दौड़कर बाहर जाने पर जॉन कुरियन ने घर के सामने बिजली के खंभे पर एक प्लास्टिक का थैला टांगा हुआ देखा, जिस पर बाहर से मक्खियां और चींटियां रेंग रही थीं और अंदर से बदबू आ रही थी।
‘लगता है कल किसी ने यहां पर लाकर डाला है।’ तेय्याम्मा ने कहा।
तब सिनी ने कहा ‘रात को होगी, मम्मी, जब मैं आठ बजे ट्यूशन से वापस आई, तब यहां कोई नहीं था।’
‘ए जी, आपने गेट कब बंद कर दिया था? तब देखा है क्या?’
जॉन कुरियन ने बिना कोई जवाब दिए बदबूदार थैला घर के पीछे गाड़ दिया। अगली सुबह, बिजली के खंभे के पास दो थैले उसका इंतजार कर रहे थे।
उस रात, जॉन कुरियन ने अपने घर पर एक डिनर पार्टी रखी थी। उनके अपने दोस्त बाबू कुरुविला की बारहवीं किताब को मिले पुरस्कार के जश्न के रूप में वह पार्टी थी। नशे में भी, कुरुविला को बाहर की बदबू आ रही थी। कूड़े के थैलों के आ गिरने की आवाज सुनकर कुरुविला हँस पड़ा।
‘यार, पुरस्कार और कूड़े के थैले एक जैसे होते हैं। जहां कुछ नहीं है, वहां एक को गिरने दो तो पीछे-पीछे कई आ कर गिरते जाएंगे।’
‘तो, क्या तुम्हारी सारी शिकायतें दूर हो गईं?’
‘कौन-सी शिकायतें?’
‘बारह किताबें लिखने के बावजूद एक भी पुरस्कार नहीं मिला कहकर तुम रोते-चिल्लाते थे न?’
‘उसके खिलाफ प्रतिक्रिया देता हूँ तो कोई मेरी तरफ ध्यान नहीं देता।’
जॉन कुरियन हँसा… ‘जो भी हो, अब तो तुम्हें लैटिन अमेरिका में जाकर पैदा होने की जरूरत नहीं पड़ेगी न।’
‘कुरियन, लैटिन अमेरिका जाकर पैदा होने का इरादा तो मैंने छोड़ दिया यार।’
कुरुविला और भी जोर से हँसा। ‘अब मुझे यही जगह काफी है।’
कुरुविला के कहने पर, जॉन कुरियन ने रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अधिकारियों से मिलने का फैसला किया।
रेजिडेंट्स एसोसिएशन के सचिव ने कहा, ‘जो कूड़े के थैले फेंके जा रहे हैं, वह एक बहुत बड़ी सामाजिक समस्या है। हमें पूरी रात जागकर अपराधी को पकड़ना ही होगा। आमतौर पर ऐसे मामलों में एसोसिएशन के सदस्य एकजुट होकर काम करते हैं। लेकिन आपके मामले में एक तकनीकी बाधा है। मुझे बताने की जरूरत नहीं है कि वह क्या है।’
जॉन कुरियन रेजिडेंट्स एसोसिएशन के छोटे कमरे में पंखे के नीचे पसीने से तरबतर हो रहा था। उसने अपने खर्चे पर बगल की सड़क खोद कर मिट्टी डाला था क्योंकि बरसात के मौसम में उसके घर की ओर पानी के बहाव को रोकने के लिए एसोसिएशन ने कुछ नहीं किया था। उस समय, जिन लोगों ने, ‘अच्छा काम’, ‘बढ़िया उदाहरण’ कहकर देखते रहे बाद में उसके खिलाफ हुए। क्योंकि पानी जॉन कुरियन के घर में न जाते हुए सीधे रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के घर के सामने जाकर रुकने लगा था।
उसके बाद, जॉन कुरियन को एसोसिएशन से अब संपर्क करना पड़ रहा है। लेकिन उसे एहसास होने लगा कि पदाधिकारियों के बदल जाने से समस्या कम हो जाएगी सोचना कितना गलत था।
‘तो, जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान खुद ही खोज लीजिए’ सचिव ने कहा। ‘अगर दूसरे घर के लोग आपके घर के सामने कूड़े के थैलों की शिकायत करते हैं, तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।’
जितनी गालियां जानते थे उन सबको दोहराते हुए जॉन कुरियन उधर से बाहर चला आया।
घर के सामने बैठे तीन बदबूदार थैलों ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुरा दिए। तुमलोग बस वहीं बैठे रहोगे- जॉन कुरियन ने उनसे कहा। मैं कुछ नहीं करने वाला।
लेकिन, उसी शाम, रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अधिकारी उससे मिलने आए।
‘जब इतने सारे घर हैं, तो कोई आपके घर के ठीक सामने ही ये सारे कचरे के थैले क्यों लाकर रख देंगे?’ अध्यक्ष ने पूछा। ‘आपके व्यवहार के कारण ही होगा।’
‘तो?’ जॉन कुरियन गुस्से से बोला।
‘हम उन सारी बातों की ओर नहीं जाएंगे।’ सचिव ने कहा। ‘यह सब जल्द से जल्द यहां से हटाना होगा। वरना हमें पर्यावरण प्रदूषण की शिकायत दर्ज करानी पड़ेगी।’
‘सुबह तीन थैलियां थीं। अब पांच थैलियां हैं। लोगों को इस रास्ते पर चलना नहीं है क्या?’
यह समझते हुए कि विद्वान के लिए मौन रहना निश्चित रूप से हितकर हो सकता है, जॉन कुरियन ने पांचों थैलों को घर के पिछवाड़े में गाड़ दिया और बिजली के खंभे पर ‘सावधान रहें। यहां कचरा फेंकना अपराध है। आप गुप्त कैमरे की निगरानी में हैं’ लिख कर बोर्ड लगा दिया।
यही कहानी के प्रारंभ में बताई गई सारी बातों की शुरुआत थी।
बाबू कुरुविला ने जॉन कुरियन को बधाई दी, ‘यार, कम से कम मेरी बात सुनने के लिए तुम तो हो। अब देखना, कचरे का एक भी थैला यहां नहीं गिरेगा। और मैंने सुना है कि मुझे दूसरा पुरस्कार भी जल्द मिलने जा रहा है। बाद में विस्तार से बताऊंगा।’
जॉन कुरियन हँसा। ‘कचरे के थैलों की तरह गिरने लगे हैं, है ना?’
‘गिरने लगा है यार। अब पकड़ भी लोगे तो मैं रुकने वाला नहीं हूँ।’
सिनी ने अपने मित्र को फोन किया, ‘अरे, पापा ने मम्मी को बताया था कि पुलिस ने कैमरा लगाया है। बटन जैसा छोटा कैमरा है। क्या यह सच हो सकता है?’
‘मुझे नहीं पता, सिनी।’ जोजो ने कहा।
‘खैर, अब मैं अपनी बाइक लेकर कहीं उस रास्ते पर नहीं आऊंगा। पुलिस लड़कियों की छेड़खानी करने वालों के साथ बड़ा सख्त है।’
‘तो, मानते हो कि तुम लड़कियों की छेड़खानी करने वाले हो?’
‘हट। अब हम केवल ट्यूशन सेंटर स्किप कर कॉफी पीने चलेंगे। बस उतना ही काफी है।’
रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अधिकारी बिजली के खंभे के सामने खड़े होकर अविश्वास के साथ देख रहे थे।
‘कैमरा कहां है? मुझे तो दिखाई नहीं दे रहा है।’
‘इसे किसने लगाया? पुलिस ने?’
‘मुझे लगता है कि यह सब उस कुरियन की नौटंकी हैं।’
‘खैर, हम इसकी जांच जरूर करेंगे। चलो, पुलिस स्टेशन और निगम कार्यालय चलते हैं।’
बिजली के खंभे के नीचे कूड़े का थैला नहीं पड़ा मिल रहा है- इस बात से आश्वस्त होकर अखबार पढ़ रहे जॉन कुरियन के सामने एक पुलिस वाला प्रकट हुआ।
‘साहब, आप जरा थाने तक आ जाइए। वह बोर्ड भी उतारकर अपने साथ ले आइए।’
इंस्पेक्टर ने निर्दयता से बोर्ड को फेंका तो वह कमरे के दूर कोने में जा गिरा। वहां एक आदमी दीवार से सटा हुआ, सबकी तरफ पीठ करके बैठा कुछ खा रहा था। एक पुलिस वाला उसे पानी पिलाते हुए उसके पास खड़ा था। जॉन कुरियन को उसके खाने के पैकेट से तले हुए चिकन की महक आ रही थी। जब बोर्ड पास गिरा तो उसने पलट कर देखा। जॉन कुरियन को उसका चेहरा जाना-पहचाना लगा।
‘मैं जो कह रहा हूँ उसे ध्यान से सुनो।’ इंस्पेक्टर ने कहा।
‘हमारे इस लोकतांत्रिक देश में किसी को भी दूसरों पर निगरानी रखने का अधिकार नहीं है। तुम कोई लाइसेंसधारी सीआईडी तो नहीं हो!’
नहीं के रूप में जॉन कुरियन ने सिर हिलाया।
‘तो बताओ, तुमने सरकारी बिजली के खंभे पर ऐसा बोर्ड क्यों लगाया? तुमने सरकार से अनुमति ली थी? कम से कम निगम से तो?’
‘नहीं।’
क्या तुम्हें पता है कि तुमने जो किया वह आपराधिक मामला है? जहां कैमरा नहीं है, वहां जब तुम बोर्ड लगाते हो कि वहां कैमरा लगा है, तो यह धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप है। अधिकारियों की अनुमति के बिना सत्ता को अपने हाथ में लेना एक और अपराध है।’
जॉन कुरियन के पसीने छूट गए।
‘क्या तुमने अपने घर की बगल वाली सड़क छह महीने पहले खुद मिट्टी से भरी थी?’
‘जी हां, भर दी गई थी।’
‘हमें यह भी शिकायत मिली है कि इसकी वजह से पड़ोसियों के आंगन में पानी जमा हो रहा है। रेजिडेंट्स एसोसिएशन यह चाहता है कि तुम्हें सार्वजनिक उपद्रवी घोषित किया जाए। सड़क भरने के लिए तुम्हें मिट्टी कहां से मिली?’
‘क्या तुम रेत माफिया से जुड़े हो?’
जैसे ही जॉन कुरियन को चक्कर आने लगा, इंस्पेक्टर का मोबाइल बज उठा।
इंस्पेक्टर मोबाइल लेकर कमरे से बाहर चला गया।
पीठ पीछा करके बैठा आदमी खाना खाकर खड़ा हो गया। पुलिस वाले ने विनम्रता से उसकी मेज से खाने का जूठा पैकेट उठाया। उसने भौंहें चढ़ाते हुए पूछा, ‘मुर्गी कहां से है?’
‘साहब के घर से’ पुलिस वाले ने धीमी आवाज के साथ जवाब दिया।
‘उसकी पत्नी को नमक कम करने को कहो।’
दांतों से कुछ निकाल फेंकते हुए वह चलकर आगे निकल गया। जॉन कुरियन वहीं खड़े सोच रहा था कि उसका चेहरा इतना जाना-पहचाना है, फिर भी याद नहीं आ रहा है कि वह कौन है। तभी बाबू कुरुविला काले गाउन पहने एक युवक और इंस्पेक्टर के साथ अंदर आए।
‘इन सबकी कोई जरूरत नहीं है।’ इंस्पेक्टर ने कहा। ‘गिरफ्तार करने पर ही जमानत लेनी होगी। सारी औपचारिकताएं पूरी करनी हैं। उसके बाद, रिहा किया जा सकता है।’
‘तो फिर औपचारिकताएं क्या हैं, सर?’ बाबू कुरुविला ने पूछा।
‘मैं बाबू कुरुविला। लेखक हूँ। हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता रहा हूँ। मुझे पिछले हफ्ते एक पुरस्कार मिला है सर।’ जॉन कुरियन को तरोताजा महसूस हुआ। मातृभूमि और मनोरमा समाचार पत्रों में खबरें थीं। कुछ लोगों ने तो तस्वीर भी छापी है।
‘तस्वीरों का कोई मतलब नहीं है।’ बाबू कुरुविला ने कहा। ‘लेखन ही मुख्य बात है।’
‘सर, आपको बैठ जाना चाहिए।’ इंस्पेक्टर को अचानक सम्मान देने का सूझा।
‘मैंने जॉन कुरियन को उनके रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव द्वारा दी गई याचिका पर चेतावनी देने के लिए बुलाया था। खैर, वह झूठा बोर्ड ही तो खलनायक है।’
‘ऐसा बोर्ड लगाना गैर कानूनी है?’ काले कोट वाले आदमी ने पूछा।
‘कानून की तो अच्छी जानकारी आपकी होनी चाहिए न?’ इंस्पेक्टर ने पूछा। ‘कम से कम, अधिकारियों से अनुमति नहीं लेनी चाहिए? उन्हें बता भी तो सकता है?’
‘क्या यह दीवार पर ‘बिल न चिपकाएं’ लिखने के लिए भी लागू होता है सर?’ बाबू कुरुविला ने पूछा।
‘अगर आप ऐसा सवाल करेंगे तो… मेरे कहने का मतलब है, बिना कैमरे के, यहां कैमरा है, लिख रखना तो तीसरे दर्जे का झूठ नहीं है?’
‘मैं भी तो यही कह रहा हूँ, सर।’ बाबू कुरुविला ने कहा। ‘आप सिर्फ तीसरे और दूसरे दर्जे के लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई करते हैं। आपलोगों को इससे ज्यादा करोड़ों में खेलने वाले तो दिखेंगे ही नहीं।’
‘यहां ऐसा कहने का कोई मतलब नहीं है।’
‘कहीं पर भी बता दूंगा। मैं कुछ ऐसा ही आदमी हूँ।’
‘ठीक है, आप इनको ले जा सकते हैं। जाते समय वह बोर्ड भी अपने साथ ले जाना। आगे उसे वहां मत लगाना।’
‘नहीं सर।’ जॉन कुरियन ने भरपूर विनम्र होकर कहा।
तभी उस बोर्ड पर जोर से पैर धंसाते हुए चिकन करी के साथ खाकर गया वह आदमी पुलीसवाले के साथ उधर चला आया।
‘ओह, यह…’ काले कोट वाला चौंक गया।
जॉन कुरियन ने उस आदमी को उसका चेहरा देखते ही पहचान लिया। वही चेहरा जो पिछले कुछ दिनों से अखबारों में छाया हुआ था। हमेशा की तरह तिरस्कार भरे भाव के साथ वह पुलिस वालों के बीच हथकड़ी पहने खड़ा था… उसको चढ़ायी गई कार को घेरती हिंसक भीड़। अपनी सीट पर बैठा वह आदमी घमंडी निगाहों से उस भीड़ को घूर रहा था।
अखबारों और चैनलों पर दिखाई गई कुछ तस्वीरों में, वह मंत्रियों, नेताओं, फिल्मी सितारों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के साथ हँसता हुआ खड़ा था। कार चलाकर या अन्य प्रकार से उसने जिन लोगों को मारा था, उनकी तस्वीरें दुर्लभ ही दिखाई जा रही थीं।
जॉन कुरियन को अचानक उनमें से एक दृश्य याद आ गया। उस आदमी के महल जैसे आलीशान घर के सामने खड़ी एक दुबली-पतली लड़की माइक्रोफोन पकड़े कैमरे की तरफ देख कर बोलती जा रही थी-
‘…जहां एक मक्खी भी नहीं घुस सकती, इस अद्भुत हवेली के सामने से कैमरामैन निधीश के साथ मैं रम्या प्रकाश।’
तब तीन दृश्य स्पष्ट हो गए। बिना किसी सुरक्षा गार्ड के खाली कियोस्क। बछेड़ों के साथ दो बड़े कुत्ते, गेट की निचली ग्रिल से सावधानी से देख रहे थे। साथ ही साथ दीवार पर एक बोर्ड जिस पर मोटे अक्षरों में लिखा था-
‘जो भी अतिक्रमण करेगा उसे सजा मिलेगी। आप कैमरे की निगरानी में हैं।’
‘क्या उसे वह बोर्ड लगाने की इजाजत मिली थी? लेकिन उसे तो इसके लिए गिरफ्तार नहीं किया गया था।’
उस समय यह चीख जोरदार थी कि गिरफ्तारी केवल तमाशा है। फिर, सभी विरोधों की तरह, वह भी धीमी और कमजोर पड़ गई। उसे चिकन करी के साथ थाने का खाना भी मिलता रहा।
जब इंस्पेक्टर ने उसे देखा, तो दूसरों को देखने में अपनी परेशानी को छिपाते हुए कहा, ‘ठीक है, तुम जा सकते हो।’
तब बाबू कुरुविला में एक अद्भुत बदलाव हो रहा था। पूंछ को सही कर जैसे कुत्ता खड़ा होता है उसी प्रकार वह उठ खड़ा हुआ।
‘अरे! यार कुरुविला?’ चिकन करी के साथ खाना खाने वाले उस आदमी की जोर की हँसी वहां गूंज उठी। ‘क्या रे, तुमको भी ये लोग उठा लाए क्या?’
‘अरे! नहीं सर, मैं तो बस अपने दोस्त को यहां से निकाल कर ले जाने के लिए…’
‘तुम्हारा है न दोस्त!’ वह फिर हँसा। ‘क्या तुमने पुरस्कार की सारी रकम खर्च कर दी? तो मुझे बताना, मैं तुम्हें एक और पुरस्कार दूंगा।’
जोर से हँसते हुए, वह पुलिस वाले के साथ जेल के खाली कमरे के अंदर चला गया।
किसी ने किसी की तरफ नहीं देखा, सब पुलिस स्टेशन से निकले, अपनी-अपनी गाड़ियों में बैठे और चुपचाप घर की ओर चल पड़े।
जब गाड़ी से निकाले गए ‘निगरानी’ बोर्ड को लात मारकर अंदर फेंका जा रहा था, तो जॉन कुरियन ने उसपर चिकन करी खाने वाले के जूतों के निशान देखे।
तभी, तेय्याम्मा दौड़ कर चिल्लाती हुई आई, ‘ए जी, क्या पुलिस ने आपको पीटा?’
‘जमीला से कहो कि वह बोर्ड जला दे’, उसने कहा और अंदर चला गया।
ऊपर अपने कमरे की खिड़की से बाहर झांककर सिनी ने फोन पर कहा, ‘यार, पापा आ गए, लगता है पुलिस ने उन्हें जल्दी छोड़ दिया।’
‘खैर, अब तो वह किसी पर निगरानी करने तो नहीं निकलेंगे।’ दूसरी तरफ से पुरुष की आवाज हँसी में तब्दील हुई। ‘हम सुरक्षित हैं… ठीक है, कल ट्यूशन सेंटर में मिलते हैं।’
सिनी अपना उदास चेहरा पुन: तैयार कर दौड़कर नीचे चली गई।
कुरियन जब छत की ओर ताकते हुए अपने बिस्तर पर आराम कर रहा था, तभी उसने जमीला की आवाज सुनी, ‘अरे तेय्याम्मा भाभी, फिर आ गया है गंदे कूड़े का थैला, उसमें मुर्गी के पंख और पर भरे हैं।’
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