
कवि, लेखक और संपादक। दो उपन्यास, एक कविता संग्रह और आठ संपादित पुस्तकें प्रकाशित।
मुझे डर है
मुझे डर है
कि सुकुड़ते आसमान में
उड़ रही हैं पतंगें
मुझे डर है
कि खत्म हो रहे हैं
शिशु वार्ड में ऑक्सीजन सिलिंडर
मुझे डर है
कि औरतों के लिए हाथरस
जिला नहीं पूरा देश होता जा रहा है
मुझे डर है
कि गर्भगृह में
गूंज रहे हैं नारे
मुझे डर है
कि अतिक्रमण हटाने वाले बुलडोजर
बढ़ रहे हैं पुस्तकालयों की ओर
मुझे डर है
कि मेरे पहुंचने से पहले
कहीं डल न जाए मेरा वोट
मुझे डर है
कि बोलने वाले
अकेले पड़ रहे हैं गिरफ्तारी के समय
मुझे डर है
कि फैसले
चौराहों पर सुनाए जा रहे हैं
मुझे डर है
कि जिनके हाथ मैं धुला रहा हूँ
उनके नाखूनों पर लगा है मेरा रक्त
मुझे डर है
कि उनको पता है
संक्रामक है मेरा डर
मुझे डर है
कि मुझसे अधिक
उनको मेरे डर का पता है।
संपर्क : स्वतंत्र प्रकाशन भवन, गीता सदन, अपूर्वा हॉस्पिटल के पीछे, रांची रोड, पोस्ट – मरार जिला – रामगढ़, झारखंड, पिन – 829117 मो. 9811188949

