वरिष्ठ कवि।गज़ल संग्रह जिस्म रोटी का नंगा होता हैऔर कविता संग्रह ईश्वर का अनुवाद करते हुए

1.
यह
चुंबन ही है
जिसमें डूबने पर होती है
ईश्वर के होने की अनुभूति
दुनिया की सारी प्रार्थनाएं तो
नास्तिक ही बनाती हैं

2.
देह की अंतिम सांसों तक
देह की भाषा की तरह
देह में रहेगा चुंबन
देह के भूगोल की धुरी बनकर
देह के भूगोल में डूबा हुआ चुंबन
देह में पृथ्वी की तरह घूमता है
कामाध्यात्म।

3.
पंखुरी-सा हल्का मुलायम
एक अनासक्त चुंबन
महायोगी की तरह होता है
अनंत की गहराई नापता है जो
देह का ईश्वर
आंसू भरी आंखों में मुस्कराता है
चुंबन आत्मा की भभूत होते हैं।

4.
चुंबन एक ऐसा वृत्त है
जिसकी परिधि कहीं नहीं होती
दृश्य का हर कण उसका
केंद्र होता है
चुंबन विचार से बड़ा होता है
चुंबन की आत्मा के बाल
कभी सफेद नहीं होते।

5.
एक ही सांस से जुड़े हुए चुंबन
एकांत की सृष्टि का
हरा रस होते हैं
धमनियों में उड़ेल देते हैं
अपना उजास
बेचैनियों के तमाम संदर्भ
चुंबन की रात
काले अंगूरों के गुच्छों-सी होती है
चुंबन का एकांत
तारों भरा।

6.
चुंबन
अपने भीतर निःशब्द होते हैं
अपने ही भीतर ध्यानस्थ
चुंबन
हमें हमसे रिहा करते हैं
स्वर्ग से घृणा पैदा करते हैं
चुंबन।

7.
अजब मिठास है
खारे पानी में
नदी का चुंबन
समुद्र तक जाता है
समुद्र का हमशक्ल हो
जाता है
चुंबन का हरापन
समुद्र से शुरू होता है।

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