विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

उन औरतों के प्रति मैं ज्यादा कृतज्ञ हूँ
जिन्होंने मेरी जिंदगी में
कुछ बरसों का इजाफा किया है
इस ग्रह को बचाए रखने के लिए
यह कितनी अनिवार्य है

 
वे औरतें मेरी प्रेमिकाएँ नहीं रहीं कभी
न ही मैं उन औरतों का प्रेमी रहा हूँ
हम एक-दूसरे की फेहरिस्त में
कभी शामिल न रहे
वे आईं मेरी सबसे उदास रात में
मेरी पलकों को चूमा
मेरी जूठी सिगरेट की आखिरी कस खींची

 
वे आईं ठीक उसी वक्त जब मैं लिख रहा था
अपनी आत्महत्या-पर्ची की आखिरी पंक्ति
उसने मेरे कमरे की उदास अलगनी पर
हमारे बदन के कपड़ों को सजाया
और उस रात हमने लिखी एक लंबी कविता

 
वे औरतें आती हैं इस तरह
कि फिर कभी लौटकर नहीं आतीं
औरतें फकत जन्म नहीं देतीं
पुनर्जन्म भी देती हैं।

संपर्क: स्व.डॉ.उमेश चंद्र चैरसिया (अधिवक्ता), मुहल्ला-मुंगरौड़ा, पोस्ट-जमालपुर, पिन-811214, जिला-मुंगेर (बिहार) मो.7870786842