भारतीय भाषा परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह में राष्ट्रीय सद्भाव का परिचय देते हुए तमिलनाडु के प्रसिद्ध लेखक एस. रामाकृष्णन को पुरस्कृत किया गया।  उन्होंने जब तमिल में अपना लेखकीय वक्तव्य देना शुरू किया, ठसाठस भरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि मेरे गांव में कहानियों को उड़ता हुआ लालटेन कहा जाता है। इनके अलावा गुजराती की प्रसिद्ध कथाकार श्रीमती वर्षा अडालजा, बांग्ला के श्री नलिनी बेरा और हिंदी के गजलकार, कथाकार और आलोचक श्री ज्ञान प्रकाश विवेक भी सम्मानित किए गए। इनमें से प्रत्येक को शाल, स्मृतिचिह्न और मानपत्र के अलावा 1 लाख की राशि प्रदान की गई।

समारोह में मुख्य अतिथि प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय की पूर्व-कुलपति अनुराधा लोहिया ने सभी को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि पुरस्कार अंतिम मंजिल नहीं बल्कि एक नई शुरुआत का आह्वान है। परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने कहा कि सीताराम जी सेकसरिया द्वारा स्थापित भारतीय भाषा परिषद ने 50 साल का लंबा साहित्यिक सफर बड़ी उपलब्धियों के साथ पूरा किया है। हम कोलकाता के अपने ट्रस्टियों, पदाधिकारियों और लेखकों-साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त करते हैं कि उनका हमें लगातार सहयोग मिलता रहा है।

पुरस्कार समारोह में असमिया की कथाकार पापरी बर्मन, उर्दू के गजलकार मोईद रशीदी, तेलुगु के जी. आदिनारायणा और हिंदी के कवि विहाग वैभव को युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें से प्रत्येक को शाल, स्मृतिचिह्न और मानपत्र के अलावा 51 हजार की राशि प्रदान की गई।

‘भारतीयता की अंतर्दृष्टि’ पर आयोजित संवाद सत्र में प्रसिद्ध गुजराती कथाकार वर्षा अडालजा ने कहा कि मैं अपने भीतरी सुख के लिए लिखती हूँ। स्त्रियों के  विकास को परंपरागत रूढ़ियां अवरुद्ध करती हैं। बांग्ला कथाकार नलिनी बेरा ने कहा कि भारतीय होने का भाव केवल जन्म और निवास तक सीमित नहीं है बल्कि एक मानसिक भावना है। हरियाणा से आए हिंदी लेखक ज्ञान प्रकाश विवेक ने कहा कि भारतीयता के बारे में सोचते ही मेरे जेहन में विविधता, विशालता, विचित्रता जैसे शब्द कौंध जाते हैं।

युवा हिंदी कवि विहाग वैभव ने कहा कि भारतीयता की पहचान आधुनिक भारत के संवैधानिक मूल्यों के बाहर नहीं हो सकती। असमिया की युवा लेखिका पापरी बर्मन ने कहा कि असमिया साहित्य ने भारतीयता को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान किया है। उर्दू के युवा लेखक मोईद रशीदी ने कहा कि भारतीयता किसी एक रंग, एक भाषा और एक संस्कृति तक सीमित चीज नहीं है। तेलुगु के युवा लेखक जी.आदिनारायणा ने कहा कि एक सच्चा लेखक अतीत से प्रेरणा लेता है, पर उसकी नकल नहीं करता।

संवाद सत्र में अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉ.शंभुनाथ ने कहा कि भारतीयता वस्तुतः स्थानीयता, भारतीय राष्ट्रीयता और वैश्विकता – इन तीन चीजों से बना त्रिभुज है जिसके बिना हर भारतीय अधूरा है। परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह में परिषद के ट्रस्टियों डॉ. कुसुम खेमानी, श्री ईश्वरी प्रसाद टांटिया, श्री संजीव अग्रवाल तथा श्री घनश्याम सुगला सम्मानित किए गए।

संवाद सत्र का संचालन करते हुए प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि भारतीय भाषा परिषद वरिष्ठ लेखकों के अलावा युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए सदा तत्पर रहती है। समारोह में पहलगाम घटना तथा कोलकाता के होटल के अग्निकांड में दिवंगत लोगों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की गई।