
युवा कवयित्री। संप्रति प्राध्यापिका।
चित्र : एक
लौट रही है ऑफिस से स्त्री
मन में दिन भर की कड़वाहट भरे
तानें, प्रतिस्पर्धा
सभ्य लोगों की
असभ्यता सहते
जवाब देती, मुंहजोर कहाती
थोड़ा सा ऑफिस साथ आता है
जिसे झटक कर छुड़ा नहीं पाती
आप कहते हैं घर में
ऑफिस की समस्या मत सुनाओ।
चित्र : दो
जा रही है ऑफिस स्त्री
टिफिन, चाय, बच्चों का होमवर्क
कराते हुए
आधी नींद बिस्तर पर छोड़कर
आज फिर अपना लंच बॉक्स
मेज पर भूल आई
आप कहते हैं
ऑफिस में
घर की समस्या मत लाओ।
आत्महत्या
तुम्हारे समाज में
आत्महत्या से बस
शरीर का अंत
देखा जाता है
पर सबसे पहले मरती हैं
भावनाएं, विचार, तर्क
सपने और कल्पनाएं
और जब शरीर का
कोई अर्थ नहीं रह जाता तो
किसी दिन इन तमाम
मृत वस्तुओं के संपर्क के कारण
शरीर भी मर जाता है।
संपर्क :प्रो़फेसर, हिंदी विभाग, जी डी बिनानी पी. जी. कॉलेज, मिर्ज़ापुर–231001 मो.9415876779

