
वरिष्ठ कवि। तीन दशक से शीर्ष पत्र–पत्रिकाओं में कविताएं, संस्मरण, लेख आदि प्रकाशित। पहला कविता संग्रह ‘बख्तियारपुर’। संप्रति झारखंड सरकार के सहकारिता विभाग में कार्यरत।
असंभावित के विरुद्ध
एक दिन कस्बे की वह लड़की लौट आई
वह भागी थी प्रेमी के साथ
जैसा कि अमूमन लड़कियां भागती हैं
प्रेम में या फिर छलावे में
लेकिन अभी यह कहना चाहिए
एक स्त्री लौटी थी अपने पुराने बचपन के घर में
एक बच्चा था उसके साथ
और एक अदद पति भी
जो संतुष्ट दिखता था
उस स्त्री के साथ लोहे का एक रंगीन बक्सा था
बड़ा-सा जो कई पीढ़ियों से साथ चला आता है
उस पर रंगों की ताजा नक्काशी की गंध थी
दो-तीन झोले और कंधे पर जूट का सुंदर झोला
बच्चे के हाथ में कचकड़े का एक झुनझुना
कुछ और चीजें जो रिक्शे पर चढ़ाते-उतारते
एक लगाव-सा पैदा करती हैं
उस स्त्री को लौटते हुए कस्बे ने देखा
यह असंभावित के विरुद्ध था!
भागी हुई लड़की कभी समृद्ध
और रागात्मक तरीके से नहीं लौटती!
इसलिए उसे देखा गया मगर वैसे ही
खजूर के पेड़ पर आम के फल-सा!
आंखों को धो-धो कर देखा गया
सच यह भी है किसी हादसे से बची हुई
वह एक भाग्यवान लड़की थी
जो जीवन के किसी सुखद संयोग से
अब सुखी गृहस्थन में बदल गई थी
भागी हुई लड़की सुखी तरीके से लौटी थी
उसका रिक्शा परिचित और शांत ढंग से रुका था
अपने पिता के छोड़े हुए घर के दरवाजे पर!
उसका लौटना आकस्मिक सुख
और विलक्षणता से भरा था
पर स्त्रियों में अलबत्ता एक विचलन थी
कस्बे का जीवन शांत दिखता था
लेकिन पुरुषों ने अपनी दिनचर्या में
व्यस्त दिखने की कोशिश की
गलियों में खेल रहे बच्चों के लिए
रुका हुआ रिक्शा एक मेहमान का रिक्शा भर था
जबकि लड़कों में
लौटी हुई स्त्री के पुराने चेहरे को
याद करने की ललक जग गई थी
…लेकिन अब हमें सिर्फ इतना ही जानना चाहिए
कि वह सपनों से भरी एक स्त्री थी
जो सालों बाद अपने पिता के घर लौटी थी!
सरई के फूल
वसंत के महीने में
सरई के फूल दिखते थे दूर तक
बेर की अनगिन झाड़ियां
केन, मकोय के लिए पहाड़ के नीचे तक
भागते चले थे बच्चों के झुंड
साल, कटहल, शिरीष और आम के पुराने पेड़ थे
पहाड़ की तलहटी तक जाते रास्तों पर!
वे हजारों पेड़ कहां बिला गए?
हम अपना जीवन कहां भूल आए हैं?
सरई के इन फूलों को
एक बार हमारे हाथों में दो
आंखों से लगा लूं इन्हें!
पता नहीं
और कितना बचा है जीवन!
वे कैमरे
उन फोटो स्टूडियो के
साइन बोर्ड तुम्हारे जेहन में होंगे
जिस पर परवीन बॉबी या अमिताभ बच्चन
काले गॉगल्स और गोल टोपी में नमूदार होते थे
उन लाखों कैमरों के बारे में सोचो
जो वक्त की तेज रफ्तार में
किसी कबाड़ में बदल गए हैं
उन्हें उनके मालिकों ने कहां रखा होगा?
डार्क रूम में जहां कभी
निगेटिव्स धुलते थे नीम रौशनी में
क्या वे कैमरे भी उन्हीं अंधेरों में कहीं खो गए हैं?
सहपाठिनी से मुलाकात
कुछ रोज पहले जौनपुर शहर के
बाहरी हिस्से की तरफ टहलते हुए
अपने साथ पढ़ने वाली
एक लड़की से मुलाकात हुई
वह चार-पांच साल के एक बच्चे की ऊंगली थामे
सड़क के किनारे धीरे-धीरे चल रही थी
थोड़ी दूरी से
उसने मुझे गहरी नजरों से ताका
फिर पहचानती हुई-सी बोली-
सौरभ तुम हो!
मैं उसे एकदम से नहीं पहचान पाया
इस बात के लिए मैंने उससे क्षमा मांगी
उसके कंधे भर आए थे
वह पुराने दिनों से ज्यादा अच्छी लग रही थी
उसने छूटते ही पूछा-
कैसे हो, शादी कहां की?
मैंने जवाब में कहा कि
अभी तक मुझे नौकरी नहीं मिली
इस बात पर अफसोस जताते हुए
पर उसने अनुभवी की तरह कहा कि
लेकिन अब मुझे शादी कर लेनी चाहिए
फिर हमने थोड़ी देर
नौकरी की समस्या पर बातचीत की
अपने पति के बारे में बताते हुए
वह काफी उत्सुक थी, जो सेना में डाक्टर थे
तनिक शर्माते हुए
यह भी कहा कि
उसके पति उसकी कल्पना से भी अच्छे हैं
और रुककर कहा कि ससुराल वाले भी
यह कहते हुए उसका चेहरा रक्तिम हो आया
कि वे उसका बहुत ख्याल रखते हैं
उसने मेरी उन कविताओं की चर्चा की
जो अब मेरी डायरी में दर्ज नहीं हैं
जिनकी याद भी जेहन में नहीं के बराबर है
उसे यह जानकर कि
मैं अभी भी लिख रहा हूँ कविताएं
आश्चर्य हुआ!
उसने हैरत में डालने वाली एक बात यह बताई
कि उसने भी कॉलेज के दिनों में
दो-चार कविताएं लिखी थीं
चूंकि वे प्रेम की कविताएं थीं
इसलिए मुझे दिखाने से हिचकती रही
मैंने हँसते हुए छह सालों के बाद उसे
आश्वस्त किया कि
सभी पहले प्रेम कविताएं ही लिखते हैं!
पर उसने बातचीत का मजमून ही बदल दिया
उसने उन लड़कियों के बारे में बताया
जो साथ पढ़ती थीं
और जिनकी शादियां कितनी दिक्कतों के बाद हुईं
प्रोफेसर शरण की आत्महत्या के
कुछ और कारणों को उसने स्पष्ट किया
साथ चल रहे बेटे में
जो चेहरे से उसी पर गया था
पति की प्रवृत्तियों को रेखांकित किया
उसने मुस्कुराते हुए एस सान्याल की याद दिलाई
जो हमारे क्लास की
सबसे सुंदर और सुशील लड़की थी
उसने चौंकाने और
गहरे आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह बताई
कि उसके मन में मेरे लिए थोड़ी जगह थी
बहुत निकट की दोस्त होने की वजह से
यह बात उसने कुछ प्रमाणिक ढंग से कही
इस बात पर मैं विचलित हो आया
और भीतर से उदास महसूस किया
मुझे बहुत निराशा हुई
जब उसने कहा कि वह एस सान्याल के बारे में
कुछ और नहीं बता सकती
दो साल हुए
उसका अंतिम खत दुबई से आया था
घिरती हुई सांझ में
जो अब मुझे उदास भी लगने लगी थी
उसने अपने घर का पता दिया
और दूसरे दिन सुबह का खाना
साथ खाने का आग्रह किया
भरे मन से मैंने उसके
इस आमंत्रण के प्रति खेद प्रकट किया
और रात की अपनी आखिरी गाड़ी के बारे में
जानकारी दी
उसने अलग होते हुए
इस बात की जानकारी से दुखी किया
कि डाक्टर की सलाह पर सुबह-शाम टहलना
अब उसके पूरे जीवन की मजबूरी में शामिल है
मैंने उसके बच्चे को चूमा
और उसके विरोध के बावजूद
बीस का नोट बच्चे की जेब में ठूंस दिया
संयोग से हुए इस मुलाकात पर
उसने दिली खुशी जाहिर की
नम हो आई आंखों को पोंछते हुए उसने
बाकी सहपाठियों को याद किया
फिर, कुछ सोचते हुए
इस मुलाकात में उसने अंतिम शब्द कहे-
ऐसी भेंट ईश्वर कृपा से ही संभव है!
नोनीहाट, जिला : दुमका–814145 झारखंड मो.7004433479

