मंगेश पडगांवकर
(1929-2015)  साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित मराठी लेखक। लगभग40 पुस्तकें प्रकाशित।
विपिन पवार
अनुवादक और लेखक। पुस्तकें ‘शब्दों के परे’, ‘अक्षरों की मेरी दुनिया’ (निबंध संग्रह), ‘पीली रोशनी का समंदर’ (कहानी संग्रह)। संप्रति रेल सेवा में।

 

 

प्रेम यानी प्रेम होता है

प्रेम यानी प्रेम होता है
तुम्हारा और हमारा बिलकुल ‘सेम’ होता है
क्या कहा
ये पंक्तियां बकवास लगती हैं
कविता की दृष्टि से घास लगती हैं
लगती हैं तो लगने दो
फंसती है तो फंसने दो
तभी तो
तो भी
प्रेम यानी प्रेम होता है
तुम्हारा और हमारा बिलकुल ‘सेम’ होता है

मराठी में ‘इश्श’ कहकर
आप प्रेम कर सकते हैं
उर्दू में ‘इश्क’ कहकर
आप प्रेम कर सकते हैं
कन्वेंट में पढ़कर भी
आप प्रेम कर सकते हैं
सोलहवां सावन बीता रे बीता
कि रोम-रोम में बसंत खिलता है
और खुली आंखों देखे सपनों में
मन का मीत झूला झूलता है
याद है न तुम्हें?
हमारे सोलहवें सावन की कहानी
मझधार में नाव में भर चुका था पानी
हम लहरों पर
उन्मुक्तता से लहरा रहे थे
नाव के साथ पानी में
डूबते-डूबते उतरा रहे थे
डूब जाते तो भी चल जाता
प्रेम ही खींचकर निकालता ऊपर

तुम्हें तो पता था
मुझे भी पता था

क्योंकि प्रेम यानी प्रेम होता है
तुम्हारा और हमारा ‘सेम’ होता है
प्रेम वेम मिथ्या है
कहने वाले बहुतेरे हैं
प्रेम यानी प्रशंसा है
कहने वाले बहुतेरे हैं

ऐसे बहुतेरों में से किसी एक ने
मुझसे कहा कि
हमने कभी पत्नी से
इसरार नहीं किया
पांच बच्चे हो गए लेकिन
कभी प्यार नहीं किया

क्या हम चूक गए
प्रेम बिना रुक गए

जब उसने मुझे समझाया
तब मैंने सिर्फ यही फरमाया कि
प्रेम यानी प्रेम यानी प्रेम होता है
तुम्हारा और हमारा लेकिन ‘सेम’ नहीं होता है

क्या कभी तुम्हें उसके साथ
बारिश में भीगना भाया है
एक चॉकलेट आधा-आधा
होठों में दबाकर खाया है
भरी दोपहर में उसके साथ
घंटों खाक छानी होगी
संपूर्ण समर्पण पाकर
देह की गहराई जानी होगी
प्रेम कभी रूठता है तो
कभी आंखों ही आंखों में हँसता है
प्रेम कभी झगड़ता भी है

दो पंक्तियों की चिट्ठी लिखना भी प्रेम है
कसकर आलिंगन में बंध जाना भी प्रेम है

प्रेम यानी प्रेम होता है
तुम्हारा और हमारा बिलकुल ‘सेम’ होता है।

अब वहां कुछ नहीं है

सूखे कीचड़ की
एक पगडंडी देख रहे हो न
वहां एक झरना बहता था
अब वहां कुछ नहीं है!

पेड़ की फुनगी पर नीला-सा
एक फूल देख रहे हो न
वहां एक पंछी गाया करता था
अब वहां कुछ नहीं है!

हरसिंगार के प़ेड तले
झरे हुए फूल देख रहे हो न
वहां से पवन विदा लेता था
अब वहां कुछ नहीं है!

अंधियारे के पहाड़ पर
एक तारा देख रहे हो न
वहीं से बादल पुकारता था
अब वहां कुछ नहीं है!

नदी के कछार पर
मंदिर के अवशेष देख रहे हो न?
कोई तो किसी के लिए
वहां आया करता था
अब वहां कुछ नहीं है!

संपर्क :विपिन पवार : फ्लैट नंबर 805, टॉवर नंबर 19, जॉयविल हड़पसर एनेक्स, शेवालेवाड़ी गांव, भारत पेट्रोल पंप के सामने, पोस्ट-मांजरी फार्म, पुणे-412307 मो. 8850781397