हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’
कवि और अनुवादक।कविता संग्रह ‘दूसरा चित्र’, ‘मन की स्याही’, ‘गीत अकवि का’ और ‘अपने-अपने ईमान’। अद्यतन कविता संग्रह ‘छिपेगा कुछ नहीं यहाँ’। विश्व साहित्य के अनुवादों के तीन संग्रह : ‘स्वतंत्रता जैसे शब्द’, ‘जब उतरेगी साँझ शांतिमय’ और ये झरोखे उजालों के प्रकाशित।

चेन मेताक

अम्दो (तिब्बत) के एक प्रमुख कवि। चेन्तसा में 1970 में जन्म। चेन मेताक का अर्थ है चेन्तसा से आग की चिंगारी। मूल नाम सोनम तेनका, किंतु लेखन में पेन नेम ‘चेन मेताक’ का प्रयोग। सितंबर, 2022 में शीनिंग में 52 वर्ष की आयु में निधन।

यह दुनिया अजीब

यह एक अजीब दुनिया है
इस दुनिया में
हर कोई मुखौटे लगाकर रहता है
एक मुखौटा सफेद है
और दूसरा काला
काले मुखौटे वाले वे हैं
जो हमेशा घुटनों पर रहते हैं
और सफेद मुखौटे वाले वे
जो ऊंची कुर्सियों पर विराजमान हैं
जब सफेद मुखौटे वाले
काले मुखौटों वालों के पास से गुजरते हैं
तो काले मुखौटे वालों को हाथ जोड़ना होता है
यदि सफेद मुखौटे वाले
असंतोष प्रकट करें
तो काले मुखौटे वालों को
एक साथ साष्टांग प्रणाम करना होता है
इस रिवाज की ताकत को देखते हुए
कुछ लोगों ने दो मुखौटों का इंतजाम किया है
जब वे काला मुखौटा लगाते हैं
तो बड़ी विनम्रता से चलते हैं
सफेद मुखौटा लगाने पर
वे चाबुक घसीटते चलते हैं
जब मैं इस दुनिया में आया
बिना किसी मुखौटे का था
जब मैंने इस दुनिया के लोगों को
यह दिखाने की कोशिश की
कि मेरा चेहरा हाड़मांस का बना है
तो सबसे पहले वे लोग गुस्सा हुए
जो सफेद मुखौटा पहने हुए थे
उन्होंने मुझे धमकाते हुए अपने धनुषबाणों से
मुझ पर इस तरह निशाना साधा
मानो उन्होंने
अपना कोई सच्चा दुश्मन देख लिया हो
फिर काले मुखौटे वालों ने
अपने डर और घबराहट में
मुझे परेशान किया
अपने हथौड़ों से मुझे पीटा
और मुझ पर पत्थर फेंके
मानो उन्होंने
धर्म का नाश करने वाले
किसी राक्षस को देख लिया हो
अब यदि तुम्हें इस दुनिया में आना हो
तो तुम्हें पता होना चाहिए
कि तुम किस समूह से हो
यदि तुम झूठ और फरेब चुनते हो
तो तुम्हें सफेद मुखौटे के साथ आना चाहिए
यदि तुम उन्हें पसंद करते हो
जो आलसी और अकर्मण्य हैं
तो तुम्हें स्वयं को
काले मुखौटे में तब्दील करना होगा
अन्यथा, इस दुनिया में मत आना
बजाय इसके अपनी नींद का मजा लेना।

शांति

अपार्टमेंट के गलियारों में
एक बूंद की आवाज भी नहीं
खांसी की आवाज नहीं
किसी के बोलने की आवाज नहीं
विलाप की कोई आवाज नहीं
कोई भी सीढ़ियां चढ़ता-उतरता नहीं
बच्चों के खेलने या रोने की आवाज नहीं
बाहर से हार्न की कोई आवाज नहीं
किसी भी वाद्य यंत्र से
सुनाई नहीं दे रहा कोई संगीत
हवा की आवाज नहीं
शाखाओं के हिलने की आवाज नहीं
पत्तों की सरसराहट नहीं
कोई फर्क नहीं पड़ता
कि आपके कान कितने संवेदनशील हैं
यहां तो सुनाई नहीं देती
किसी जानवर की धड़कन भी —
ऐसे एक रौशन दिन में
ऐसी एक बड़ी जगह
सोच रहा हूँ
कि आखिर हुई ऐसी कौन सी बड़ी बात
कि मेरा कलेजा मुँह को आ गया
और मुझे सामान्य होने में लगा काफी वक्त।

अधूरी कविता

जब भी मुझे मिलता है खाली समय
लिखता हूँ मैं अधूरी कविता
और रख लेता हूँ इसे अपने बैग में
एक अकेली कविता नहीं ले जा सकती
मुझे ‘पवित्र भूमि’ में
न ही यह घसीट सकती मुझे नरक में
एक पूर्ण कविता
ले ली जाएगी मेरे मित्रों और अजनबियों द्वारा
जो इसे कर सकते हैं पसंद या नापसंद
एक अधूरी कविता देती है मुझे
आनंद और संतोष।

अस्थायी

बर्फ जो गिरी थी कल रात में
सुबह-सुबह गायब हो गई
कोहरा जिसने ले लिया था
अपने आगोश में सुबह को
हो गई गायब दोपहर में
दोपहर में चमकने वाली सूर्य किरणें
गायब हो गईं शाम होते ही
स्त्री जिससे मैंने की थी शादी
दस साल पहले
अब कहां है वह?

11, सूर्या अपार्टमेंट, रिंग रोड, राणाप्रताप नगर, नागपुर (महाराष्ट्र)- 440022 मो.9422811671