
युवा कवयित्री। संप्रति शामली जनपद (उत्तरप्रदेश) के एक परिषदीय विद्यालय में अध्यापक।

स्त्रियों का जत्था
क्या देखा है तुमने
दुखी स्त्रियों का जत्था
एक ही दिशा की ओर चलते हुए
एक ही शोक गीत गाते हुए
एक सूखती नदी की खोज में
झाड़ियों में रास्ते खोजते हुए
क्या देखा है तुमने दुर्भेद्य पेड़ों को सूखते हुए
घटाघोप में आकाश को रोते हुए
बिजली को तड़तड़ाते और
गिरते हुए पक्के मकानों पर
बेमौसम की बारिश में बर्बाद होती फसलों को
गेहूं में लगते घुन को
और घरों में रोज बढ़ती दीमकों को
क्या तुमने देखा है गर्भ में दम तोड़ती संतानों को
सफेदी पर लगी कालिख
और कलंक को
जिस घर पैदा हुई
उसी के दरवाजे अपने लिए बंद होते हुए
उम्मीदों की नागफनी मुरझाते हुए
और कटते हुए पेड़
सिर पर गिरते हुए
क्या देखा है तुमने कभी उन स्त्रियों को
जिनके दुख कभी एक नहीं थे
फिर भी वे जत्थे में चलीं।
संपर्क : मकान नं. 876, सौरभ रघुवंशी चौक, काकानगर शामली, उत्तरप्रदेश-247776 मो.9520956000
