वरिष्ठ कवि। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। एक कविता संग्रह ‘चिड़िया ने आत्महत्या नहीं की’।

कुछ तो है

रातरानी की तरह महकती हुई
दुनिया न नहीं
पर कुछ तो है
जंगल के भीतर
जहां पगडंडियां लेकर
जाती हैं हमें
कुछ तो है
जो हमें अपनी तरफ
खींचती है
कुछ तो है
रसीले फलों के स्वाद जैसा
अव्यक्त-सा
जिसके लिए हम तड़प रहे हैं
उसे पाने के लिए
हम आए हैं जंगल में
शहर से इतनी दूर
जंगल में सुकून है
जो परस्पर स्पर्धा से भरे
और भागमभाग से परे
शहर में नहीं है।

नदी

नदियां सारी
सूख जाती हैं
पर एक नदी है
जो कभी नहीं सूखती

वह जंगली फूलों की तरह
खिलती-खिलखिलाती है
महकती है रातरानी की तरह
मौसम कोई हो
भरी रहती है वह लबालब

कभी फुर्सत मिले
जाना उस बूढ़े के पास
जो बाहर से दिखता है
सूखे दरख्त-सा
किंतु उसके भीतर
स्नेह से भरी एक नदी पाओगे
जरा देर बैठो उसके साए में
तो भीग जाओगे।

संपर्क: जया पब्लिक स्कूल के आगे, झलक ब्युटी पॉर्लर के पास, हरि नगर, दुर्ग-491001 छत्तीसगढ़ मो.7880215321