कविता
युवा कवि। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधार्थी। गांव में क्या बचा गांव में क्या बचा है?वह पगडंडीजो हर सुबह सूरज संग चलती थीअब धूल में छिपी रहती हैजैसे समय की परतों मेंवह बरगद का पेड़जिसकी छांव में बचपन हँसता थाअब बस खामोश खड़ा हैयादों के साथ...
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