रूप-विरूप : राजेंद्र लहरिया

रूप-विरूप : राजेंद्र लहरिया

वरिष्ठ लेखक। अद्यतन कथा संचयन ‘राजेंद्र लहरिया की चुनिंदा-कहानियां’। उस समय सुधाकर ‘वानी’ अपनी चित्र-प्रदर्शनी की सफलता की खुशी में मगन था। मगन अर्थात अपने घर के बाहर की तरफ खुलने वाले उस कमरे में, जिसे वह अपना ‘ड्राइंग रूम’ कहता था, अपने तीन निकटतम मित्रों के साथ...