अफगानी कहानी ‘तकिया’ : फरांगिस एलयासी, हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

अफगानी कहानी ‘तकिया’ : फरांगिस एलयासी, हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

कई सालों तक मैंने चैन की नींद ली। मैं हमेशा कहती कि यह मेरे तकिये की वजह से है। जैसे ही मैं उस तकिये पर सिर रखती, मुझे नींद आ जाती – इतनी गहरी नींद कि मुझे घड़ी में केवल रात के 10 बजे और सुबह 6 बजे का ही पता होता, उसके बीच के अंधेरे का मुझे कुछ भी नहीं मालूम।...
साइप्रसी कविताएं :नेसे येसेन, अंग्रेजी से अनुवाद  : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

साइप्रसी कविताएं :नेसे येसेन, अंग्रेजी से अनुवाद : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’कवि और अनुवादक। अद्यतन कविता संग्रह ‘छिपेगा कुछ नहीं यहां’। विश्व साहित्य के अनुवादों के तीन संग्रह : ‘स्वतंत्रता जैसे शब्द’, ‘जब उतरेगी सांझ शांतिमय’ और ये झरोखे उजालों के।   बड़े शब्द जब कविता बोलेगी बड़े शब्दसारे हथियार हो...
ईरानी कविताएं :फारुग फरोख्जाद, अनुवाद :बालकृष्ण काबरा ‘ऐतेश’

ईरानी कविताएं :फारुग फरोख्जाद, अनुवाद :बालकृष्ण काबरा ‘ऐतेश’

हिंदी प्रस्तुति: बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’कवि और अनुवादक। कविता संग्रह ‘दूसरा चित्र’, ‘मन की स्याही’, ‘गीत अकवि का’ और ‘अपने-अपने ईमान’। अद्यतन कविता संग्रह ‘छिपेगा कुछ नहीं यहाँ’। विश्व साहित्य के अनुवादों के तीन संग्रह : ‘स्वतंत्रता जैसे शब्द’, ‘जब उतरेगी साँझ शांतिमय’...
चेन मेताक की तिब्बती कविताएँ, हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

चेन मेताक की तिब्बती कविताएँ, हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’कवि और अनुवादक।कविता संग्रह ‘दूसरा चित्र’, ‘मन की स्याही’, ‘गीत अकवि का’ और ‘अपने-अपने ईमान’। अद्यतन कविता संग्रह ‘छिपेगा कुछ नहीं यहाँ’। विश्व साहित्य के अनुवादों के तीन संग्रह : ‘स्वतंत्रता जैसे शब्द’, ‘जब उतरेगी साँझ शांतिमय’...
प्रस्फुटन : ज़ैनब अख़्लाकी, हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

प्रस्फुटन : ज़ैनब अख़्लाकी, हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

हिंदी प्रस्तुति : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’कवि और अनुवादक।अद्यतन कविता संग्रह : ‘छिपेगा कुछ नहीं यहां’।विश्व काव्यों के अनुवादों के दो संग्रह ‘स्वतंत्रता जैसे शब्द’ और ‘जब उतरेगी सांझ शांतिमय’ और विश्व कथाओं और लेखों का संग्रह प्रकाशित ‘ये झरोखे उजालों के’। ज़ैनब अख़्लाकी...