मोहन राकेश के पात्र आधुनिक समय की प्रवृत्तियों के प्रतिरूप हैं : कुसुम खेमानी

मोहन राकेश के पात्र आधुनिक समय की प्रवृत्तियों के प्रतिरूप हैं : कुसुम खेमानी

    वरिष्ठ लेखिका।‘सच कहती कहानियाँ’, ‘एक अचम्भा प्रेम’ (कहानी संग्रह)। ‘एक शख्स कहानी-सा’ (जीवनी) ‘लावण्यदेवी’, ‘जड़ियाबाई’, ‘लालबत्ती की अमृतकन्याएं’,  ‘मारवाड़ी राजबाड़ी’ (उपन्यास) आदि चर्चित रचनाएँ। समकालीन आलोचक और निर्देशक नाटककार मोहन राकेश के...
भाषा : हमारी अस्मिता – कुसुम खेमानी

भाषा : हमारी अस्मिता – कुसुम खेमानी

    वरिष्ठ लेखिका।‘सच कहती कहानियाँ’, ‘एक अचम्भा प्रेम’ (कहानी संग्रह)। ‘एक शख्स कहानी-सा’ (जीवनी) ‘लावण्यदेवी’, ‘जड़ियाबाई’, ‘लालबत्ती की अमृतकन्याएं’,  ‘मारवाड़ी राजबाड़ी’ (उपन्यास) आदि चर्चित रचनाएँ।   देश या राष्ट्र की परिभाषा करते समय उसके क्षेत्रफल,...
हिटलर का देश अहिंसा के मार्ग पर (जर्मनी यात्रा) : कुसुम खेमानी

हिटलर का देश अहिंसा के मार्ग पर (जर्मनी यात्रा) : कुसुम खेमानी

    वरिष्ठ लेखिका।‘सच कहती कहानियाँ’, ‘एक अचम्भा प्रेम’ (कहानी संग्रह)। ‘एक शख्स कहानी-सा’ (जीवनी) ‘लावण्यदेवी’, ‘जड़ियाबाई’, ‘लालबत्ती की अमृतकन्याएं’,  ‘मारवाड़ी राजबाड़ी’ (उपन्यास) आदि चर्चित रचनाएँ। प्रख्यात शिक्षाविद डॉ.सुनील सेनगुप्ता ने हम्बोल्ट...
इस बार कहानी – नया मोड़ : कुसुम खेमानी

इस बार कहानी – नया मोड़ : कुसुम खेमानी

    वरिष्ठ लेखिका।‘सच कहती कहानियाँ’, ‘एक अचम्भा प्रेम’ (कहानी संग्रह)। ‘एक शख्स कहानी-सा’ (जीवनी) ‘लावण्यदेवी’, ‘जड़ियाबाई’, ‘लालबत्ती की अमृतकन्याएं’,  ‘मारवाड़ी राजबाड़ी’ (उपन्यास) आदि चर्चित रचनाएँ। हलकी ठंड की नर्म और अलसाई-सी उस रविवारी सुबह को जब बरामदे...
मोत्ज़ार्ट-क़ाफ़्क़ा का प्राग – चेकोस्लोवाक़िया : कुसुम खेमानी

मोत्ज़ार्ट-क़ाफ़्क़ा का प्राग – चेकोस्लोवाक़िया : कुसुम खेमानी

    वरिष्ठ लेखिका।‘सच कहती कहानियाँ’, ‘एक अचम्भा प्रेम’ (कहानी संग्रह)। ‘एक शख्स कहानी-सा’ (जीवनी) ‘लावण्यदेवी’, ‘जड़ियाबाई’, ‘लालबत्ती की अमृतकन्याएं’,  ‘मारवाड़ी राजबाड़ी’ (उपन्यास) आदि चर्चित रचनाएँ।   निर्मल भाई (निर्मल वर्मा) से प्राग के बारे में...